शुक्रवार, 30 जनवरी 2009

गांधी का दर्शन चाहिये



मौत के तांडव में भी
जीवन को होना चाहिये
सोच हो शारीर तब भी
मन तो कोमल चाहिये ।
स्वार्थ के माहौल में भी
निस्वार्थ तन मन चाहिये
तेरे मन में मेरे मन में
इक आस दर्पण चाहिये ।
इस आस के साथ थोडा
कर्म होना चाहिये
तब ही डलेगी नीव
मन में स्वप्न होना चाहिये ।
एक एक पग धरके बनेगी
राह अपने सु-राज की
इस वक्त अब संसार को
गाँधी का दर्शन चाहिये ।

गुरुवार, 22 जनवरी 2009

हम और वो


इधर हम जिंदगी के कायल हैं
उधर वो जान के भी दुष्मन है ।
इधर हम प्रेम गीत गाते है
वो उधर सर पे बांधे कफन हैं ।
हाथ जो हम बढायें दोस्ती का
वो तो थामें दुष्मनी का दामन हैं ।
भोले नादान मासूमों को वो
बनाते जाते दुश्मने अमन है ।
हम हैं जम्हूरियत की संतानें
तानाशाही के बनें वो इबन हैं ।
छीनना चाहते हैं आजादी
लहराते मातमी का परचम हैं ।
इससे हासिल किसी को क्या होगा
हम जलेंगे तो वो भी तो दफन हैं ।

आज का विचार
यदि शांति सम्मान पूर्वक नही रखी जा सकती तो वह शांती ही नही है ।

स्वास्थ्य सुझाव
फाइबर युक्त पदार्थों का सेवन करें यह कोलेस्ट्रोल को कम करते हैं ।

रविवार, 18 जनवरी 2009

हमारे तीर्थ......


पिछला पूरा महीना, घूमने फिरने में गया । मुंबई, पनवेल, पुणें, भोपाल, इंदौर, उज्जैन और वापस दिल्ली । इस बार की ये यात्रा तो तीर्थ यात्रा हो गई । पुणें से गाणगापूर गये दत्त महाराज की पादुकाओं के दर्शन के लिये । वहाँ से वापस पुणें आकर वहां से दो दिन घूम कर देखें अष्ट-विनायक फिर उज्जैन में महाँकाल और इंदौर से ओंकारेश्वर । इस सारे पुण्य-कर्म का श्रेय सुहास और विजय को जाता है। वे अमेरिका से केवल इसी कार्य के लिये आये थे । और चूंकि उन्हें घुमाना था हमारे भी तीर्थ हो गये ।

हमारे तीर्थ-स्थल अब किसी भी माने में पवित्र नही रह गये हैं ।न वातावरण न पर्यावरण । सब दूषित ।
इन्सान भी । पंडित लोग इस तरह मोल भाव करते हैं कि मन उचट जाता है । इन्सानों का लालच. मंदिरों के आसपास की गंदगी, नाली स्वरूप नदियाँ, और टूटे फूटे रास्ते । इंदौर उज्जैन के रास्तों में अवश्य सुधार है ।
पर गाणगापूर रोड से गाणगापुर मंदिर तक का रास्ता ..... रास्ता है ही नही केवल गढ्ढे और वे भी बडे बडे । अष्ट विनायक मंदिरों के आसपास की स्थिति थोडी ठीक पर अभी भी करने जैसा बहुत कुछ है । 110 करोड लोगों के देस में सफाई के लिये क्यूं लोग उपलब्ध नही है । परिसर स्वच्छ क्यूं नही रह सकता । और प्रसाधन की जगहों के बारे में क्या कहूं पर कहीं कहीं 1रु. लेकर सफाई की व्यवस्था थी ।
मुझे तो लगता है कि हर भक्त को दर्शन से पहले शुल्क स्वरूप सफाई का काम करना चाहिये कि वह कम से कम मंदिर के प्रांगण में फेंकी गई 10 चीजें उठाकर कूडेदान में डाले, उदाहरणार्थ केले के छिलके, प्लास्टिक की थैलियां, बोतलें, नारियल की जटायें, फूल, पत्ते, मिठाई के टुकडे, मूंगफली के छिलके आदि । मै तैयार हूं झाडू लगाने के लिये भी । यह शायद सबसे बडा पुण्य कर्म होगा । और हमारे मंदिर भी साफ होंगे, यदि मंदिर आने वाला हर व्यक्ति यह करे और फिर एक समय ऐसा आयेगा कि कूडा कूडे दान में ही डलेगा । हर मंदिर में यह सूचना होनी चाहिये कि अगर आप सचमुच चाहते हैं कि ईश्वर आपकी प्रार्थना सुने तो मंदिर का परिसर साफ रखने में मदद कीजीये । कृपया कूडे के रूप में प्रांगण में फेंकी गई 10 वस्तूओं को उठा कर कूडे दान में डालें । इस मामले मं हमें सरदारों से सीख लेनी चाहिये जो कर सेवा करना पुण्य का काम समझते है ।

शनिवार, 13 दिसंबर 2008

राष्ट्रप्रिय है...


न कोई आयेगा हमको बचाने
न कोई हाथ ही आगे करेगा
जबाँ से ही जतायेंगे हम-दर्दी
मदद शायद ही कोई कुछ करेगा

दूसरे के भरोसे जो रहा है
काज उसका तो डूबा है हमेशा
अगर खुद मे नही है कोई हिम्मत
बिन लडाई ही, वो हारा है हमेशा

हमें अब एकजुट होना पडेगा
और बदलनी होगी किस्मत
ताकि अपने ही दम पे हम खडे हों
हमें खुद की बढानी होगी ताकत

उठे दुश्मन की आँख इससे पहले
डर, दृष्टि जाने का, उसे हो
हमारी एकता की शक्ति पर ही
नाज करने का हक हमको भी तो हो

हम किसी देश के दुष्मन नही हैं
पर अगर दुष्मनी पर कोई उतरे
लगा देंगे अब प्राणों की बाजी
मोल ले लेंगे, पथ में, जो हों खतरे

जवानों पर हमारे नाज़ हमको
अपने भूमी की रक्षा हक हमारा
त्याग जो भी हो करना वह करेंगे
राष्ट्र प्रिय है और राष्ट्र ध्वज है प्यारा

रविवार, 30 नवंबर 2008

सिंह हो तो


सिंह हो तो उठो गर्जना करो
और सियार हो, तो कुछ कहना नही है ।
दुष्मन के वार पर पलट वार तो करो
गर कायर हो, तो कुछ करना नही है ।

अपनी संख्या पर गर नाज़ है तुम्हें
उस नाज़ जैसा कुछ तो कर गुजरो
वरना तो कीडे भी जन्मते हैं करोडों
मरना है जो कीडों सा, कुछ कहना नही है ।

जिनके बाजू मे है ताकत और हिम्मत
एक बार जोश से उनकी जयकार तो करो
भरलो स्वयं में उनका ये जज्बा जोश का
कमजोर ही रहना है, तो कुछ कहना नही है ।

घर और पाठशाला बने केंद्र नीति का
राष्ट्र प्रेम से बच्चों को कर दो ओत प्रोत
हर बच्चा बनें एक आदर्श सैनिक भी
सिखाओ ये पाठ कभी डरना नही है ।

समय पडे तो खुद ललकारो दुश्मन को
एक दिन तो हम सबको मरना यहीं है
डिस्को नही, हमको है तांडव की जरूरत
वरना हम जैसों की फिर सजा यही है ।

आज का विचार
मान सम्मान किसी के देने से नही मिलते अपनी अपनी योग्यता के अनुसार मिलते हैं ।

स्वास्थ्य सुझाव

नियमीत व्यायाम करें,
बलशाली बनें ।

शनिवार, 22 नवंबर 2008

श्रध्दांजली


जैसे ही दिल्ली पहुँचे खबर मिली कि अण्णा की तबियत बहुत ज्यादा खराब है .
तुरत फुरत टिकिट कटवाकर जबलपूर गये । नलियाँ लगाकर बिस्तर पर लेटे भाई
को देखा तो दिल कचोट सा गया । पर उन्होंने सब को पहचान लिया ।
इतनी तकलीफ के बावजूद उनका पहेलियीँ बुझाने का स्वभाव वैसा ही था । शाम को
हम दोबारा मिलने अस्पताल गये तो मुझे और मिलिंद को देखकर एक सरगम गुनगुनाये
और कहा बताओ कौनसा राग है .। मैने कहा,” क्या अण्णा तुम भी किसे पूछ रहे हो “ तो
थोडा हँस कर चुप हो गये । उसी दिन उनके एक दोस्त मिलने आये और मजाक करने
लगे,” काले साब समोसा ले आऊँ” तो कहा ,”अरे तुम ले तो आओगे पर ये लोग मुझे खाने
नही देंगे, चुपके से ले आना बाद में” । उसके बाद तो ताकत जैसे हर दिन कम ही होती गई ।
और बोलना भी कम कम होकर सिर्फ दर्द के बारे में बात करने तक ही सीमित हो गया और
१९ नवंबर को सुबह साढेपांच बजे उन्हे इस पीडा से मुक्ति मिल गई । अण्णा और मै साथ साथ बडे हुए थे । खेलना लडाई झगडा क़ॉलेज जाना सब एक साथ आँखों के सामने से सरक गया । दूसरे दिन जबलपूर के अखबार में उनके लिये श्रध्दांजली छपी वही यहाँ दे रही हूं । और कुछ तो लिखा नही जा रहा ।

इसे दो बार क्लिक कर के पढें ।

रविवार, 2 नवंबर 2008

कभी तो चले आओ


कभी तो चले आओ मेहमान बन कर
और पूछो मेरा नाम अनजान बनकर ।

हमें हक्का बक्का कर दो तुम इतना
हम ना समझ पाये अचरज हो कितना
देखें कभी तुम को या फैले घर को
या चीजें सम्हालें परेशान बनकर । कभी तो......

कहें बैठने को या पानी पिलायें
चाय को पूछें या पंखा चलायें
न सूझे जो कुछ तो शरबत ले आयें
या खुद ही खडे हों गुलदान बनकर । कभी तो..

तुम्हारे ही चेहरे को पढते रहें हम
देखो जो तुम, तो नजरें चुरायें
या फिर ये सोचें झुका कर के पलकें
कि क्यूँ आये हो दिल का अरमान बनकर । कभी तो ...

तुम कुछ जो पूछो तो हम कैसे समझे
खयालों में जब हों अपने ही उलझे
तुम ही हमें फिर बता देना हँस के
कि क्या काम था और आये हो क्यूं कर । कभी तो.....

आज का विचार

याद रहे कि आप बहुत खास है और आपकी भूमिका आपके अलावा और कोई नही निभा सकता ।

स्वास्थ्य सुझाव

रक्त में लोह की मात्रा बढाने के लिये खायें
३ बादाम
३ खूबानी
३ खजूर
३ अंजीर
१५ मुनक्का
सबको मिला कर रोज नाश्ते में खायें ।
२ महीनें करें ।