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रविवार, 28 फ़रवरी 2010

होरी


होरी पे ऐसे रंग ना डारो,
रार ना मचाओ बनवारी ।
खिलत रहे फुलवा गुनगुनाए भंवरा
देख देख मोर हंसत काहे पियरा
सखी सहेली करत ठिठोली
काहे दो उन्हें अवसर गिरिधारी । रार न मचाओ बनवारी

रंग भिगोया गुलाल गाल मले
चूनर भीगी भीगे मोर केश पडे
थर थर कांपत, गात सुकोमल
और न मारो न मारो पिचकारी । रार न मचाओ बनवारी

गोप गोपी संग रास रचायें
जमुना तट पे धूम मचायें
हम बूंद, सागर तो आप प्रभु
बिनती करो स्वीकार हमारी । रार न मचाओ बनवारी

शनिवार, 7 मार्च 2009

होली


उड रहे रंग अबीर गुलाल
होली खेल रहे नंद लाल ।

गोपी ग्वाले दंग हो गये
श्रीरंग के रंग में खो गये
हवा वसंती लगी डोलने
हिलोरें उठीं प्रेम-रस-ताल । उड रहे....

मगन हो रहीं वृक्ष लताएँ
लिख कर फूलों की कविताएँ
भौंरे गुनगुन गीत सुनाते
बसंत की बाज रही खडताल । उड रहे....

मना रही गोकुल में होली
बरसाने की राधा भोली
कनखी से देखे वनमाली
मगन सब गोपी ग्वाल बाल । उड रहे....

आज का विचार
दुनिया में अच्छे लोग ज्यादा हैं और बुरे कम इसीसे दुनिया चलती रहती है ।
स्वास्थ्य सुझाव
मेथी का साग फेफडों के स्वास्थ्य के लिये गुणकारी है ।

शुक्रवार, 14 मार्च 2008

होली है........

थोडी सी मस्ती थोडी शरारत
थोडीसी सर्दी थोडी हरारत
झूटी लडाई, सच्ची सी चाहत
लेकर के आई है होली..

थोडा सा रंग ज्यादा सा पानी
थोडासा लाल और थोडासा धानी
थोडे से शाम थोडी राधा रानी
लेकर के आई है होली..

थोडे गुलाबी थोडेसे लाल
बादल अबीरी और गुलाल
दिल में न रखना कोई मलाल
कहती है आकर के होली..

थोडा मृदंग और थोडीसी ढोलक
थोडीसी थिरकन थोडीसी पुलक
थोडी सी मचलन थोडीसी झिझ़क
दिल में जगाती है होली..

प्यारे से बोल और मीठा सा राग
थोडीसी प्रीत थोडा अनुराग
जी भर के खेलो री गोरी आज फाग
फिर फिर ना आये ये होली ..


आज का विचार
निराशावाद आसुरी शक्ती है और आशावाद दैवी
आशावादी बने रहिये ।

स्वास्थ्य सुझाव
कोकम शरबत सुबह पीने से आप दिनभर चुस्त
दुरुस्त बने रहेंगे ।