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शुक्रवार, 15 नवंबर 2013

ये रिश्ते




रिश्ते भी कितने अजीब होते है,
      कभी लगते हैं दूर, पर्वत से 
      कभी दिल के करीब होते हैं
      कभी बहते हैं झरने से कल कल
      तो कभी बर्फ से जम जाते हैं।

      रिश्तों को सींच के रखना जतन से
      तभी वे पौधों से लहलहाते हैं
      रोशनी में होते हैं सदा रोशन
      और फूलों से खिलखिलाते हैं।
      वरना वे भाप से उड जाते हैं
      और मरुथल से सूख जाते हैं।

      रिश्ते मांगते हैं गर्माहट
      ये शीत बक्सों में नही पलते
      रिश्तों को सांस खुल के लेने दो
      ये अंधेरों में भी नही खिलते।

      रिश्ते चुभते हैं कभी कांटों से
      मन को लोहू-लुहान करते हैं
      ये आँसूं भी लाते हैं आँखों में
      गलतफहमी में खो से जाते हैं
      ऐसे में बात काम आती है  
      तब खुशियां भी ये खिलाते हैं।
     
      रिश्ते अंधेरों में थाम लेते हाथ
      और फिर राह भी सुझाते है
      डगमगाने लगते है जैसे कदम
      सहारा दे के साध लेते हैं।
      ये रिश्ते भी कितने अजीब होते हैं।

गुरुवार, 8 नवंबर 2012

रिश्तों की रंगोली




रिश्तों की रंगोली सजायें
रंग भरे लाल, नीले, हरे, पीले ।
प्यार के, इसरार के, दुलार के ।

स्नेह के दीपक जगमगायें
घर आंगन  उजास फैले
मान की, मुस्कान की, सम्मान की,

वधु, कन्या, गृहलक्ष्मी,
पूजी जायें
आदर से, प्यार से, मनुहार से


मीठे बोलों के पकवान सजायें
प्यारे प्यारे, मन मोहक, 
शीतल, कोमल, रस भरे ।


निर्मल मन और आंगन
पूजा का थाल सजे,
हो प्रसाद मिष्टान्न,
दीपों से उजियारी रजनी करें


तब ही होगी सार्थक लक्ष्मी पूजा
और होगा संपन्न दीपावली का
ये त्यौहार ।