मंगलवार, 6 अप्रैल 2010

सूना सूना सा रस्ता

सूना सूना सा है रस्ता
पर देख एक मुसाफिर चला ।
माना कि घुप्प अंधेरा है
पर तू एक दिया तो जला .
लाख हैं चाहें बाधायें
पर आगे बढे ये सिलसिला ।
चांद अमावस का ना हो तो
क्या पूनम की औकात भला ।
तेरे पायल की छम छम
फिर क्या सितार की तान भला ।
पीपल के पत्ते जब डोलें
पंखा पुरवाई का चला ।
जब बात हो बस मेरी तेरी
तो क्या दुनिया की बात भला ।

33 टिप्‍पणियां:

संजय भास्‍कर ने कहा…

हर रंग को आपने बहुत ही सुन्‍दर शब्‍दों में पिरोया है, बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

संजय भास्‍कर ने कहा…

ग़ज़ब की कविता ... कोई बार सोचता हूँ इतना अच्छा कैसे लिखा जाता है

ब्लॉ.ललित शर्मा ने कहा…

पीपल के पत्ते जब डोलें
पंखा पुरवाई का चला ।
जब बात हो बस मेरी तेरी
तो क्या दुनिया की बात भला।

सही कहा आपने,
बहुत ही उम्दा अभिव्यक्ति,

आभार

दिगम्बर नासवा ने कहा…

जब बात हो बस मेरी तेरी
तो क्या दुनिया की बात भला ..

Dil mein bahut hi madhur ehsaas bharti rachna ... ye sach hai agar aapas ki baat ho rahi hai to duniya ka kya kaam ... kash ye jeevan aise hi aapas mein baaten karte huve kat jaaye ...

Shekhar Kumawat ने कहा…

चांद अमावस का ना हो तो


badi chunoti he

waqay me bahut sundar photo he


shekhar kumawat

http://kavyawani.blogspot.com/

सीमा सचदेव ने कहा…

जब बात हो बस मेरी तेरी
तो क्या दुनिया की बात भला ।

bhaavon ki sundar abhivaykti

kunwarji's ने कहा…

"लाख हैं चाहें बाधायें
पर आगे बढे ये सिलसिला ।
चांद अमावस का ना हो तो
क्या पूनम की औकात भला ।
तेरे पायल की छम छम
फिर क्या सितार की तान भला ।"

SUNDAR....

kunwar ji,

seema gupta ने कहा…

चांद अमावस का ना हो तो
क्या पूनम की औकात भला ।
तेरे पायल की छम छम
फिर क्या सितार की तान भला
" मन को छु गयी ये पंक्तियाँ.."
regards

daanish ने कहा…

चांद अमावस का ना हो तो
क्या पूनम की औकात भला ।

सच कहा आपने
और ऐसे सच को शब्दों में बाँधना
बहुत ही दुश्वार
लेकिन आपकी लेखनी को सलाम
सब सहज कर दिखाया आपने
एक स्तरीय रचना पर बधाई .

शरद कोकास ने कहा…

वाह आशा जी बहुत सुन्दर आशावाद है इस कविता में ।

जितेन्द़ भगत ने कहा…

प्रेरक और मि‍ठास- दोनो का आभास-
जब बात हो बस मेरी तेरी
तो क्या दुनिया की बात भला

Asha Joglekar ने कहा…

आप सबका आभार, मेरा किसी ब्लॉग पर टिप्पणी न देने के बावजूद आप लोगो ने जो उत्साह बढाया उस से अभिभूत हूँ, परंतु ये अकारण नही था वहां से घर बंद करने की तैयारी और यहां आकर जो थकान हुई उसी का दोष है पर अब से नियमीत रहूंगी । आशा है आप स्नेह बनाये रखेंगे ।

Gyan Dutt Pandey ने कहा…

सुन्दर लगी कविता - अकेला चले को प्रेरणा देती।

sandhyagupta ने कहा…

माना कि घुप्प अंधेरा है
पर तू एक दिया तो जला .
लाख हैं चाहें बाधायें
पर आगे बढे ये सिलसिला ।

Sundar aur prerak rachna.badhai.

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' ने कहा…

माना कि घुप्प अंधेरा है
पर तू एक दिया तो जला .
पूरी रचना सकारात्मक संदेश दे रही है.

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" ने कहा…

उम्मीद की बात करती खूबसूरत एहसास भरे लफ्ज़ हैं ! बधाई !

Pankaj Upadhyay (पंकज उपाध्याय) ने कहा…

:) कोशिश करने वालो की हार नही होती..

वेरी वेरी पाजिटिव पोस्ट..

अरुणेश मिश्र ने कहा…

प्रशंसनीय ।

kshama ने कहा…

सूना सूना सा है रस्ता
पर देख एक मुसाफिर चला ।
माना कि घुप्प अंधेरा है
पर तू एक दिया तो जला .
लाख हैं चाहें बाधायें
पर आगे बढे ये सिलसिला ।
Jijivisha se bharee sanjeedgee! Aprateem rachana!

kshama ने कहा…

Aapki sanjeeda lekhani mujhe baar,baar aapke blog pe le aati hai..

Alpana Verma ने कहा…

जीवन में आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देती कविता .

सूफ़ी आशीष/ ਸੂਫ਼ੀ ਆਸ਼ੀਸ਼ ने कहा…

Kar prayaas badh nirantar,
Apne gantavya ki ore!
Hoaga suraakh aasma mein,
Phenk patthar lagake zor!
Utkrisht!

dipayan ने कहा…

बहुत सुन्दर एवं प्रेणना देती हुई कविता । बहुत ही सुन्दर भावनायें ।

Unknown ने कहा…

आशाताई!...इस कविता में ढला हुआ एक एक शब्द अमूल्य रत्न सा है!... बहुत सुंदर अनूभूति कराई है आपने!

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

चांद अमावस का ना हो तो
क्या पूनम की औकात भला ।

जब बात हो बस मेरी तेरी
तो क्या दुनिया की बात भला ।

बहुत खूब .....!!

येबातें यूँ ही होती रहे .....!!

डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) ने कहा…

सुंदर शब्दों के साथ.... बहुत अच्छी लगी यह कविता.....

ज्योति सिंह ने कहा…

पीपल के पत्ते जब डोलें
पंखा पुरवाई का चला ।
जब बात हो बस मेरी तेरी
तो क्या दुनिया की बात भला।
bahut hi sundar ,aasha se bhari rachna

देवेन्द्र पाण्डेय ने कहा…

जब बात हो बस मेरी तेरी
तो क्या दुनिया की बात भला

-सच्ची बात।
कविता में आशा का भाव तरोताजा करता है मन को..

Mayur Malhar ने कहा…

kaku khub sunder kavita lehale aahe. aaj paheleyan da blog var aala ata niyamit visit kareen. ek da punhaa bhadhai.

mridula pradhan ने कहा…

very good.

shama ने कहा…

सूना सूना सा है रस्ता
पर देख एक मुसाफिर चला ।
माना कि घुप्प अंधेरा है
पर तू एक दिया तो जला .
लाख हैं चाहें बाधायें
पर आगे बढे ये सिलसिला ।
Purzor lekhan!Kya kamal ho!

nilesh mathur ने कहा…

सुन्दर रचना !

चैताली आहेर. ने कहा…

काय बोलू...... इतकी सुंदर कविता आहे..... शब्द नाहीत...!!