शनिवार, 13 दिसंबर 2008

राष्ट्रप्रिय है...


न कोई आयेगा हमको बचाने
न कोई हाथ ही आगे करेगा
जबाँ से ही जतायेंगे हम-दर्दी
मदद शायद ही कोई कुछ करेगा

दूसरे के भरोसे जो रहा है
काज उसका तो डूबा है हमेशा
अगर खुद मे नही है कोई हिम्मत
बिन लडाई ही, वो हारा है हमेशा

हमें अब एकजुट होना पडेगा
और बदलनी होगी किस्मत
ताकि अपने ही दम पे हम खडे हों
हमें खुद की बढानी होगी ताकत

उठे दुश्मन की आँख इससे पहले
डर, दृष्टि जाने का, उसे हो
हमारी एकता की शक्ति पर ही
नाज करने का हक हमको भी तो हो

हम किसी देश के दुष्मन नही हैं
पर अगर दुष्मनी पर कोई उतरे
लगा देंगे अब प्राणों की बाजी
मोल ले लेंगे, पथ में, जो हों खतरे

जवानों पर हमारे नाज़ हमको
अपने भूमी की रक्षा हक हमारा
त्याग जो भी हो करना वह करेंगे
राष्ट्र प्रिय है और राष्ट्र ध्वज है प्यारा

रविवार, 30 नवंबर 2008

सिंह हो तो


सिंह हो तो उठो गर्जना करो
और सियार हो, तो कुछ कहना नही है ।
दुष्मन के वार पर पलट वार तो करो
गर कायर हो, तो कुछ करना नही है ।

अपनी संख्या पर गर नाज़ है तुम्हें
उस नाज़ जैसा कुछ तो कर गुजरो
वरना तो कीडे भी जन्मते हैं करोडों
मरना है जो कीडों सा, कुछ कहना नही है ।

जिनके बाजू मे है ताकत और हिम्मत
एक बार जोश से उनकी जयकार तो करो
भरलो स्वयं में उनका ये जज्बा जोश का
कमजोर ही रहना है, तो कुछ कहना नही है ।

घर और पाठशाला बने केंद्र नीति का
राष्ट्र प्रेम से बच्चों को कर दो ओत प्रोत
हर बच्चा बनें एक आदर्श सैनिक भी
सिखाओ ये पाठ कभी डरना नही है ।

समय पडे तो खुद ललकारो दुश्मन को
एक दिन तो हम सबको मरना यहीं है
डिस्को नही, हमको है तांडव की जरूरत
वरना हम जैसों की फिर सजा यही है ।

आज का विचार
मान सम्मान किसी के देने से नही मिलते अपनी अपनी योग्यता के अनुसार मिलते हैं ।

स्वास्थ्य सुझाव

नियमीत व्यायाम करें,
बलशाली बनें ।

शनिवार, 22 नवंबर 2008

श्रध्दांजली


जैसे ही दिल्ली पहुँचे खबर मिली कि अण्णा की तबियत बहुत ज्यादा खराब है .
तुरत फुरत टिकिट कटवाकर जबलपूर गये । नलियाँ लगाकर बिस्तर पर लेटे भाई
को देखा तो दिल कचोट सा गया । पर उन्होंने सब को पहचान लिया ।
इतनी तकलीफ के बावजूद उनका पहेलियीँ बुझाने का स्वभाव वैसा ही था । शाम को
हम दोबारा मिलने अस्पताल गये तो मुझे और मिलिंद को देखकर एक सरगम गुनगुनाये
और कहा बताओ कौनसा राग है .। मैने कहा,” क्या अण्णा तुम भी किसे पूछ रहे हो “ तो
थोडा हँस कर चुप हो गये । उसी दिन उनके एक दोस्त मिलने आये और मजाक करने
लगे,” काले साब समोसा ले आऊँ” तो कहा ,”अरे तुम ले तो आओगे पर ये लोग मुझे खाने
नही देंगे, चुपके से ले आना बाद में” । उसके बाद तो ताकत जैसे हर दिन कम ही होती गई ।
और बोलना भी कम कम होकर सिर्फ दर्द के बारे में बात करने तक ही सीमित हो गया और
१९ नवंबर को सुबह साढेपांच बजे उन्हे इस पीडा से मुक्ति मिल गई । अण्णा और मै साथ साथ बडे हुए थे । खेलना लडाई झगडा क़ॉलेज जाना सब एक साथ आँखों के सामने से सरक गया । दूसरे दिन जबलपूर के अखबार में उनके लिये श्रध्दांजली छपी वही यहाँ दे रही हूं । और कुछ तो लिखा नही जा रहा ।

इसे दो बार क्लिक कर के पढें ।

रविवार, 2 नवंबर 2008

कभी तो चले आओ


कभी तो चले आओ मेहमान बन कर
और पूछो मेरा नाम अनजान बनकर ।

हमें हक्का बक्का कर दो तुम इतना
हम ना समझ पाये अचरज हो कितना
देखें कभी तुम को या फैले घर को
या चीजें सम्हालें परेशान बनकर । कभी तो......

कहें बैठने को या पानी पिलायें
चाय को पूछें या पंखा चलायें
न सूझे जो कुछ तो शरबत ले आयें
या खुद ही खडे हों गुलदान बनकर । कभी तो..

तुम्हारे ही चेहरे को पढते रहें हम
देखो जो तुम, तो नजरें चुरायें
या फिर ये सोचें झुका कर के पलकें
कि क्यूँ आये हो दिल का अरमान बनकर । कभी तो ...

तुम कुछ जो पूछो तो हम कैसे समझे
खयालों में जब हों अपने ही उलझे
तुम ही हमें फिर बता देना हँस के
कि क्या काम था और आये हो क्यूं कर । कभी तो.....

आज का विचार

याद रहे कि आप बहुत खास है और आपकी भूमिका आपके अलावा और कोई नही निभा सकता ।

स्वास्थ्य सुझाव

रक्त में लोह की मात्रा बढाने के लिये खायें
३ बादाम
३ खूबानी
३ खजूर
३ अंजीर
१५ मुनक्का
सबको मिला कर रोज नाश्ते में खायें ।
२ महीनें करें ।

रविवार, 26 अक्टूबर 2008

दीवाली


देखो धरती आज ले रही होड गगन से
जगमग जगमग लाख दिये लगते उडुगण से
त्याग मलिनता, लोग सजधज के आ रहे हैं
घर आँगन चमकते, दीप जगमगा रहें है ।

पकवानों के थाल, और फल फूल नारियल
पर इन सब में खील, बताशे ही हैं अव्वल
लक्ष्मी जी के नमन और पूजन के हेतु
गृहिणी, बालक सब सामग्री सजा रहे हैं ।

कब पूजा हो और फूलझडियाँ कब छूटें
खाने को कुछ मिले तो फिर पटाखे फूटें
बच्चे मनमे सोच सोच छटपटा रहे हैं
अभिभावक उनको आँखों से मना रहे हैं ।

पूजा कर लें फिर छुटाना खूब पटाखे
प्रसाद लेना और थोडा कुछ खा पी कर के
फिर हम सब भी तो होंगे साथ तुम्हारे
खुशियाँ ओर आनंद मनायेंगे मिल सारे ।

मेल जोल और हँसी खुशी की किरणें लाती
चेहरे पर उत्साह औ मनमें उमंग लाती
सब त्यौहारों की ये रानी बडी निराली
आती है हर वर्ष लक्ष्मी के साथ दिवाली ।

आज का विचार
मेरे अंदर ऊर्जा का प्रचंड स्त्रोत है और सामने असीम संभावनाएँ
और चारों और हजारों मौके, मुझे केवल इसे सार्थक बनाना है ।

स्वास्थ्य सुझाव
हिचकी रोकने के लिये नीबू की फाँक को चूसें ।

बुधवार, 22 अक्टूबर 2008

चाँद के पार चलो

आज इस गाने की बहुत याद आ रही है
चलो दिलदार चलो
चाँद के पार चलो
हम है तैयार चलो हो ओ ओ ओ
सच में ३०-३५ साल पुराना ये गाना आज सच होने जा रहा है । कोई दिलदार तो अभी नही जा सकता उसमे, पर तैयारी तो है ही । बधाई सबको चंद्रयान के सफल उडान की ।

गुरुवार, 16 अक्टूबर 2008

शरद की दूधिया चांदनी



शरद की दूधिया चांदनी
और उसमें नहाये से तुम
नीम की फुनगी पे चांद
और मेरे कितने पास तुम
दिल में जज्बातों की हलचल
बिलकुल अनजान उससे तुम
मेरी आँखों का सुख चैन
और सुकून भी दिल का तुम
कहूँ आज कैसे ये तुम से
कि दिल का अरमान भी तुम
तुम ही समझ लेना इसको
अब ये दिल जाने या तुम

आज का विचार
चाँद की असलीयत जान कर भी वह उतना ही खूबसूरत लगता है
जितना पहले लगता था ।

स्वास्थ्य सुझाव
शरद पूर्णिमा को चांद की रोशनी में दूध या खीर ठंडी कर के पीना
स्वास्थ्य वर्धक है । दूध को औटा कर या खीर बना कर बाहर छत पर
या बालकनी में चांद निकलने के बाद रख दें ताकि चांद की किरणें
पतीली के अंदर पडें, ३-४ घंटे कमसे कम उसे रख कर चांदनी में
ही ठंडा करें फिर आधी रात को पीयें । इसके साथ गाने की महफिल
भी जमाई जा सकती है । हमारे घर में यह किया जाता था तो मैं
भी करती हूँ । और वाकई दूध का स्वाद बढ जाता है ।