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शनिवार, 14 अगस्त 2010
पालमा दे मालोरका
पालमा, मालोरका बैलेरिक द्वीपों की राजधानी है । अब ये स्पेन का ही एक राज्य है । इसका इतिहास तो धातुयुग तक जाता है जब आदिवासी लोग यहां पर रहते थे पर रोमन लोगों ने ही इसे पालमा नाम दिया । इसके बाद बेझेन्टियन लोगों का आधिपत्य रहा होगा क्यूंकि कुछ अवशेष यही बताते हैं । मध्ययुग में यहां कोई 300 साल तक अरब लोगों का आधिपत्य रहा जब सारे योरोप में ऑटोमन साम्राज्य की तूती बोल रही थी । अरबों ने इसे नाम दिया था मदीना मायूरका जो बादमें बिगड कर माजोरका और मालोरका हो गया । मदीना को तो एकदम ही बदल कर पालमा कर दिया गया । यहां के पुरानी इमारतों में अरब संस्कृती का प्रभाव स्पष्ट है । 1229 के आस पास रोमनों ने इस पर अपना अधिकार कर लिया । कई विभिन्न देशों के शासकों के बाद यह अब स्पेन का हिस्सा है । टूरिज्म यहां का बडा व्यवसाय है ।
तो हम सुबह करीब दस बजे शिप से एक सुंदर से खूब लंबे पुल से होकर बाहर आये । यहां पुल पर से गुजरते हुए हमने कई बडे बडे जहाज देखे । (विडियो 866-933-3 )
सुहास ने कहा वह तो नही घूमेगी उसे तो मॉल जाना है । यहां के मोती बहुत प्रसिध्द हैं । कई रंगों के शेडस् में मिलते हैं जैसै गुलाबी, नीले, ऊदे और काले भी । जयश्री और प्रकाश भी सुहास के साथ मॉल घूमने चले गये, पर मुझे तो देखना था और खरीदना कुछ नही था । तो मैं सुरेश और विजय ने हॉप ऑन हॉप ऑफ बस के 13-13 यूरो के टिकिट लिये और पालमा का चक्कर बस में बैठे बैठ ही लगा लिया ।
हमें यहाँ भी इयर फोन दिये गये थे और 3 नंबर चैनल से हमें अंग्रेजी में कमेंट्री सुनाई दे रही थी । पालमा का ला-सेयू चर्च बहुत प्रसिध्द है यह भी एक मस्जिद की जगह ही बनाया गया है । यहां भी वास्तुओं पर एन्तोनियो गाउदी साहब का प्रभाव स्पष्ट है । पुराने शहर के रास्ते संकरे हैं । हम हालाँकि अलमुदीना का राजसी महल नही देख पाये क्यूंकि हमारे रूट में वह शामिल नही था पर नाम से ही पता चलता है कि ये अरबों का किला रहा था जिसे बढा कर महल बना दिया गया । इस महल को जेम्स II नें बनवाया । बेलवर का किला जो गोलाकार में है वह भी मुस्लिम इमारत के अवशेष पर ही बना है। और भी बहुत सी इमारतें थीं जैसे म्यूजियम और कथीड्रल जो हमने देखें । समंदर के किनारे किनारे पाम के पेडों के साथ साथ हमारी बस चल रही थी । बंदर गाह सेल बोट्स सब बहुत ही अच्छा लग रहा था । (विडियो 866-932-2)
करीब एक घंटे बाद हम वापिस आये पर सुहास प्रकास और जयश्री का कहीं पता नही था । हम तीनों के पास अपने अपने एंट्री कार्ड थे ही तो हम तो वापिस शिप पर आ गये । बहुत से लोगों की अगली क्रूज आज पालमा से शुरू हो रही थी ( ये भी स्पेन में ही है ) तो उनका स्वागत शिप से बाहर हो रहा था हमारा यह आखरी पडाव और आखरी दिन था कल हमें बार्सीलोना उतरना था पर हमने भी बैठ कर कॉफी पी कुकीज खायीं और फिर शिप के अंदर गये कमरे मे गये रेस्ट किया तब भी इन लोगों का कोई पता नही था । फिर हम चाय पीने ऊपर गये चाय पी तब जाकर कहीं ये लोग आये । पूछा कि क्या क्या खरीदा, जवाब था कुछ भी नही । फिर सुहास मै और जयश्री इनफॉर्मेशन डेस्क पर गये पूछने के लिये कि सुहास को जो ज्वेलरी पर स्पेनिश टैक्स के पैसे वापिस लेने थे वे कहां से मिलेंगे तो रसीद देख कर वहां बैठी लडकी बोली कि आपको तो वापिस कुछ नही मिलेगा क्यूंकि ये तो सिर्फ 100 यूरो से ऊपर के खरीदारी पर ही लागू है । लो जी कल्लो बात, पहले नही बता सकते थे । खैर भुनभुनाते हुए वापिस आये । आज हम फिर एक बार सारे शिप का चक्कर लगाने वाले थे सो लगाया डेक पर घूमे । आप भी घूम लें सुबह से लेकर रात तक की दिन चर्या दिख जायेगी। विडियो कल क्रूझ तो खत्म पर हमें एक दिन बार्सीलोना रुक कर आगे व्हाया लंडन वाशिंगटन डी सी जाना था पर ब्रिटिश एयरवेज की फ्लाइटस् जा रही थीं यही तसल्ली थी ।(विडियो 866-932-1)
रात भर सफर कर के कल हमारा जहाज बार्सीलोना में डॉक होगा । आज ही सारा सामान पैक करके हमें सूट केसेस 11 बजे से पहले केबिन के बाहर रखनी थी । तो वह काम भी करना था । पर इन 6-7 दिनों में हमने भरपूर आनंद उठाया था । घूमने फिरने का शिप के जीवन का । आराम से रहो खाना पीना सब कुछ टाइम से बिना पत्ता हिलाये मिल रहा है । वहाँ डेक पर जा कर हमने गोल्फ और दूसरे गेम्स भी ट्राय किये ।
सच में कभी सोचा न था कि दुनिया में इतनी जगह घूम कर इतने देश घूम पायेंगे । ऐसी कोई ललक भी नही थी कि यहां जाना है वहाँ जाना है पर वो कहते हैं ना कि बिन मांगे मोती मिले............
सुबह सुबह कोई साढे छै बजे हमारा शिप बार्सीलोना पहुँच गया पर हमें 9 बजे बाहर जाने की परमिशन मिल गई थी । एनातोली तो 10 बजे आने वाले थे । खैर सामान वामान लेकर हम बाहर निकले । दस मिनिट में ही एनातोली हमे लेने आ पहुँचे । उनके घर गये तो कात्लीना और डेनियल भी वहीं थे पर हमारे कमरे हमें दे दिये गये हमें बहुत ही संकोच हो रहा था । डेनियल की तबीयत खराब चल रही थी । पर कात्लीना बच्चे के साथ एनातोली के कमरे में रही और एनातोली लिविंग रूम मे सोफे पर ।हमने रात का खाना बनाया और एक बार बीच पर घूम लिये वहां रेत में सीपियाँ ढूंढीं, रेत का किला बनाया । (विडियो 933-958-3)
अगले दिन 4 बजे उठना था फ्लाइट 8 बजे की थी । तो एनातोली जी ने हमे एयर पोर्ट पर छोडा ही नही बल्कि क्लॉक रूम में रखवाया हुआ हमारा लगेज भी दिलवाया और फिर हमें चेक-इन काउँटर पर छोड कर वे वापिस गये । उन्हें कार भी वापिस करनी थी ।
लंडन के फ्लाइट में वेज खाना ही नही था फिर एयर होस्टेस बडी अच्छी थी उसने बिझिनेस क्लास वालों का खाना हमें ला दिया बहुत बढिया पास्ता था । तो वही सारी ऊठा-पटक कर के फायनली 31 मई को हम वॉशिंगटन डी सी पहुँच ही गये । सुहास की पडोसन हेलेन और उसका दामाद दो गाडियाँ लेकर हमे लेने आ ही गये थे । सुहास का हेलन के साथ ये अच्छा अरेन्जमेन्ट है । तो लौट कर आ गये सुहास के घर जहां से हमें अपने अपने घर पहुँचना था । पर इन दो तीन दिनों में हमने अपने ट्रिप को खूब याद किया और खुश हुए । आपको हमारे साथ घूमना पसंद आया ? सुहास की अगले 15-20 दिनों में घुटने की सर्जरी होनी है । हम सबने उसे सर्जरी अच्छे से होने के लिये शुभ कामनाएँ दीं ।
(समाप्त)
रविवार, 11 जुलाई 2010
जीवन चलने का नाम..बार्सीलोना..1
हमारी उ़डान थी साडे आठ बजे तो हम ५ बजे ही तैयार होकर निकले हवाई अड्डा काफी दूर था । सामान चेक इन करन के बाद हम बीट्रीस का वेट कर रहे थे वह एयर पोर्ट आकर बचा हुआ सारा सामान हमसे लेने वाली थी कैटल मग्ज और खाने की चीजें जो हमने उसे सोंपी । हमारे सिकयूरिटी चेक में जाने तक वह हमारे साथ ही रही । फिर हम लाइन में लगे सिक्यूरिटी चेक करवाया और फिर वही ढेर सारे एस्केलेटर्स और ट्रेन वगैरा लेकर हम अपने गेट पर पहुँचे ।वहाँ बैठ कर कॉफी पी । उडान समय पर थी । और बार्सीलोना भी हम समय पर पहुँचे । हम बाहर आये ही थे कि हमे एनातोली भी दिख गये । ये हाल ही में मार्च में भारत आये थे तब हमारे पास रहे थे इसीसे पहचानने में आसानी हुई । उनके साथ हम सामान लेकर पार्किंग लॉट पहुँचे । गाडी काफी बडी थी पर थी पुरानी । गाडी अभी पार्किंग लॉट से निकली भी नही थी कि गाडी का टायर पंक्चर हो गया । फिर प्रकाश और एनाटोले ने मिलकर टायर चेन्ज किया तब जाकर हमारी सवारी चली । एनातोली का घर सेगूर-दि-कलाफेल में है जो कि एयर पोर्ट से ४० किलोमीटर की दूरी पर है । वहां जाने में हमे एक घंटा लगा । घर जाकर सामान अपने अपने कमरे में रखा और चल पडे खाना खाने । खाना एक इतालवी रेस्तरॉँ में खाया । बहुत अच्छा खाना था । दाम भी अच्छे थे, ८३ यूरो ।
घर आने के पहले हम ग्रोसरी स्टोर गये और -४० ४५ यूरो की ग्रोसरी खरीद ली ताकि खाना घर में बनाया जा सके यहां हमे चार दिन रहना था । खाने के बाद हम थोडी देर बीच पर गये बीच एनातोली के घर के पास ही था बल्कि उसके बालकनी से दिखता था । समंदर का नीला पानी, रेत और हवा एक खूबसूरत माहौल बनाती है जिसका हमने जी भर के आनंद उठाया । गाडी किराये की थी और टायर पंक्चर था तो एनातोली उसको ठीक कराने ले गये पर टायर रिपेयर के काबिल भी नही था इसका मतलब कंपनी ने हमे घटिया गाडी दी । पर क्या करें गाडी के बिना घूमते कैसे । यह तय किया कि ये गाडी तीन दिन के लिये ली है तो वापिस कर देंगे और फिर नई अच्छे कंडीशन वाली गाडी ले आयेंगे ।
शाम को चार बजे एनातोली हमें तारागोना के रोमन-रुइन्स देखने ले गये । बहुत चक्कर काटने के बाद भी हमे पार्किंग नही मिली एक पार्किंग लॉट में जगह मिली भी पर हमारी गाडी बडी थी और वहां फिट नही आ रही थी वहां से वापिस जाने मे एनातोली को काफी मशक्कत करनी पडी । बल्कि एक साइड से गाडी ठुक भी गई । बहर हाल थोडा सा रुक कर हमने तसवीरें तो ले ही लीं । (विडियो ) 205to223_1
रात को आकर फिर हमने खाना बनाया, खाया, गप्पे मारी थोडी वाइन पी और सो गये । हम तो वेज ही बना रहे थे पर एनातोली सब कुछ एन्जॉय कर रहे थे । दूसरे दिन हमे यहां का प्रसिध्द चर्च Segrada familia (the holy family ) देखने जाना था । ९ बजे चल पडेंगे एनातोली ने कहा था । और हम जल्दी जल्दी नहा धो कर तैयार हो गये । ब्रेकफास्ट किया और निकल पडे । जिस रास्ते से हम बार्सीलोना जा रहे थे बहुत ही खूबसूरत पहाडी घुमावदार रास्ता था एक तरफ से खाई थी कुछ देर बाद फिर समंदर आ गया । एक जगह एक सीमेट प्लांट दिखा कर एनातोली ने सुहास से कहा,” यही है वह सीमेंट प्लांट जिसे देखने तुम सुदूर अमेरिका से आई हो” । इस पर सब लोग खूब हँसे और फिर सीमेंट प्लांट एक दूसरे की खिंचाई करने का जरिया ही बन गया । “अरे अपना सीमेंट प्लांट कहां गया सुहास तो उसी के लिये आई है ना ।“ आप तो खूबसूरत दर्शनीय रास्ते का आनंद लीजिये । (विडियो ) 205to223_2
हम बार्सीलोना पहुँच कर एक जगह रुके यहाँ पास में एनातोली के दोस्त का घर था फिर वहां से हमने उनकी दोस्त कैतलीना और उसके प्यारे से बेटे डेनियल को लिया और हम चल पडे देखने केथीड्रल- सेग्रादा फेमिलिया यानि चर्च ऑफ होली फेमिली । ये होली फेमिली है जोजफ,मेरी और क्राइस्ट ।(विडियो ) 224_225to271_1
यह चर्च स्पेन के मशहूर आर्किटेक्ट एन्तोनियो गाउदी ने डिझाइन किया । यह कोई डेढसौ सालों से बन रहा है फिर भी अधूरा है और बन ही रहा है । कहते हैं गाउदी साहब से जब लोग पूछते किये कब पूरा होगा तो वे हंस कर कहते ,”क्या मुझे ही खत्म करना जरूरी है, मै नही तो कोई और करेगा । काम होना चाहिये और चलते रहना चाहिये ।“ यह बिल्कुल अलग किस्म की बनावट का है और क्राइस्ट के जीवन से जुडी घटनाएं इसमे मूर्ती रूप में साकार है । अनुमान लगाया जाता है कि शायद २०२६ में यह पूरा बनकर तैयार हो जायेगा । यह एक बार स्पेन के गृह युध्द में जल गया था, पर फिर से गाउदी के प्लान (जो बचा लिये गये थे ) के मुताबिक ही बनाया गया । सुहास को हालांकि ये चर्च बिल्कुल अच्छा नही लगा । कैसा अजीब सा आर्किटेक्चर है एकदम पुराना मिट्टी से बना सा लगता है ।
हम जैसे ही चर्च के पास पहुँचे हमने गाडी मे से से ही तस्वीरें लेना शुरू कर दिया और पास जाकर तो बहुत सारी लीं । दो कार्ड भी खरीदे मानसी, साक्षी के लिये एक और श्रेया (मेरी पोतियाँ ) के लिये एक सुहास ने भी अपने नाती पोतों के लिये कार्ड खरीदे और जयश्री ने भी ।
हमने घूम घूम कर सब ओर से इस चर्च की तस्वीरें और विडियो लिये । आप भी देखिये ये अनूठा चर्च । अंदर जाने के लिये बडा लंबा क्यू था और टिकिट भी । हम तो string बजट पर चल रहे थे । (क्रमशः)
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