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शुक्रवार, 28 अगस्त 2015
शुक्रवार, 8 अगस्त 2014
राखी
चंदा की धुंधली टिमटिम
राखियों की चमकार
बहनों का ढेर सारा प्यार
अहा आई राखी।
अक्षत, रोली, मिठाई,
नारियल, राखी सजाई
दीप अक्षुण्णता का
बहन के मन की खुशी का
ले आई राखी।
मन में मंगल कामना,
चहुँ-ओर सद्भावना
जा पहुँचे सीमा पर
प्रहरी भाई जहां पर
ये स्नेहिल राखी।
आप सब ब्लॉगर भाई बहनों को राखी की शुभ कामनाएँ।
गुरुवार, 2 अगस्त 2012
माँ को राखी
जरूरत है कि आज (भारत) माँ को राखी बांधी
जाये ।
वचन देने के लिये कि यह राखी उसकी रक्षा के लिये है, जो
दर असल हमारी ही रक्षा है ।
मां जिसके गोद में कांधों पर खेल कर हम बडे हुए ।
मां जिसने हमें पाल पोस कर बडा किया, पढने लिखने की सुविधा दी ।
पांवों पर खडे होने का सहारा दिया ।
वही मां आज कैसे दुर्दिन देखने को मजबूर है ।
कैसी लूट खसोट हो रही है उसके साधनों की ।
कैसे उसके बहुतसे बच्चे वंचित हैं सुविधाओं से ।
वह दुखी है, विवश है ।
वह हमारी और तक रही है ।
हम जो सबल हैं हम जो कुछ कर सकते हैं ।
पर हम तो अपने लिये ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं बटोर रहे हैं ।
हमें फुरसत कहां कि माँ को देखें, उसके वंचित संतानों को देखें ।
यह बाजार वाद यह पूंजी वाद हमें भावनाहीन, चेतना-शून्य करता जा रहा है
।
जरा ठहरें, सोचें कि हमें ये कहां ले जायेगा ?
हमारे संतानों को हम कैसे इन्सान बनायेंगे ?
इन्सान या हैवान या फिर संवेदनाशून्य रोबोटस् ।
बाज़ार का खाना, बाज़ार का पानी और आया के संस्कार और क्या बनायेगा
इनको ।
दादा दादी नाना नानी तो हमें गंवारा नही घर में ।
जरूरत है कि मां को फिर से संवारा जाये, उसका बल बना जाये ।
रिश्तों को संजोया जाये ।
यह वचन दिया जाये मां को कि उसकी रक्षा ही हमारा आद्य कर्तव्य है,
और यह हम प्राण पण से निभायेंगे ।
यह राखी इसी वचन का प्रतीक है ।
शुक्रवार, 15 अगस्त 2008
राखी
आज हिंदु केलेंडर के हिसाब से इस ब्लॉग को एक बर्ष पूरा हुआ । पहली कविता भी राखी पर ही थी और उस पर उन्मुक्त जी की टिप्पणी पाकर बहुत खुशी हुई थी । पूरे साल आप सब ब्लॉग मित्रों का जो स्नेह मिला है उससे बहुत ज्यादा खुशी मिली है मुझे । यही स्नेह बनाके रखें.
भैया तुम राखी पे आते,
कितने बीते सावन हम तुम फिर दोहराते । भैया...
यादों के वे मधुर मधुर स्वर
अपनी अपनी आवाजों में उनको गाते
फिरभी हम कोई बडे गवैया नही कहाते ।भैया...
वो बचपन का छोटा आंगन
आंगन की छोटी फुलवारी
फुलवारी में शायद कुछ कुछ हम तुम बोते ।भैया..

खेल खेल में हँसना रोना
गुस्सा करना और मनाना.
कितने कितने हंगामें तो दिन में होते । भैया...
वो थाली वो दीपक रोली
वो राखी कुछ चमकी वाली
बांधती मैं और तुम जवरन रुपए रख देते ।भैया...
ऱाखी पर अब मिल नही पाते
पर यादों के कितने सोते
इस मनमे अक्सर कल कल कल
बहते रहते । भैया....
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आज का विचार
मुसीबत के हर पहाड के सामने कोई न कोई
चमत्कार जरूर होता है बस प्रयत्न पूरे होना चाहिये ।
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स्वास्थ्य सुझाव
दुबले पतले लोगों को वजन बढाने और स्वस्थ रहने के लिये
१ कटोरी अंजीर , १ कटोरी खूबानी, १ कटोरी बादाम और आधी कटोरी मिश्री
टुकडे कर के एक डिब्बे में रख लें दिन में ३ बार खाय़ें ।
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भैया तुम राखी पे आते,
कितने बीते सावन हम तुम फिर दोहराते । भैया...
यादों के वे मधुर मधुर स्वर
अपनी अपनी आवाजों में उनको गाते
फिरभी हम कोई बडे गवैया नही कहाते ।भैया...
वो बचपन का छोटा आंगन
आंगन की छोटी फुलवारी
फुलवारी में शायद कुछ कुछ हम तुम बोते ।भैया..

खेल खेल में हँसना रोना
गुस्सा करना और मनाना.
कितने कितने हंगामें तो दिन में होते । भैया...
वो थाली वो दीपक रोली
वो राखी कुछ चमकी वाली
बांधती मैं और तुम जवरन रुपए रख देते ।भैया...
ऱाखी पर अब मिल नही पाते
पर यादों के कितने सोते
इस मनमे अक्सर कल कल कल
बहते रहते । भैया....
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आज का विचार
मुसीबत के हर पहाड के सामने कोई न कोई
चमत्कार जरूर होता है बस प्रयत्न पूरे होना चाहिये ।
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स्वास्थ्य सुझाव
दुबले पतले लोगों को वजन बढाने और स्वस्थ रहने के लिये
१ कटोरी अंजीर , १ कटोरी खूबानी, १ कटोरी बादाम और आधी कटोरी मिश्री
टुकडे कर के एक डिब्बे में रख लें दिन में ३ बार खाय़ें ।
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