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गुरुवार, 7 अप्रैल 2011
दुनिया झुकती है
ये कौनसा सूरज निकला है
ये किरण कहां से फूटी है
जो सालों में नही हुई
हो रही वो बात अनूठी है ।
“झुकाने वाला चाहिये”
आज फिर सच होते देखा
सैलाब ये जनता का हमने
फिर आज उमडते देखा ।
आंदोलन किसको कहते हैं
जनता की ताकत क्या होती
ये आज पता लग जायेगा
मगरूर सी इस सरकार को भी ।
जड से है हिला दिया इसको
ये डर के मारे ही चुप है
चलते चुनाव में क्या होगा
यही तो इसकी धुक धुक है ।
इसकी ही क्यूं उन सारों की
है अब खडी हुई खटिया
राजनीति के नाम पे ही
जनता को जिनने सदा दुहा ।
अण्णा तुम बापू बन आये
और बन आये तुम जयप्रकाश
मिटाने भ्रष्टाचार का तम
और फैलाने सच का प्रकाश ।
अब देश का बदलेगा स्वभाव
इसका चरित्र भी बदलेगा
जब हम सब साथ खडे होंगे
और युवा देश उठ गरजेगा ।
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