नमस्ते गिरि नन्दिनि,
महिषासुर मर्दिनि
शुंभ निशुंभ क्रंदिनि,
मधु,कैटभ गंजिनि।
दक्ष-यज्ञ ध्वंसिनि,
कर्पूर गौरं तोषिणि
समस्त भव-भय हारिणि
संसार सागर तारिणि
शक्ति भक्ति स्वरूपिणि,
भक्त संकट वारिणि,
समस्त जग तव पुत्रवत्
हे मातु सुख प्रदायिनि।
तव चरणं शरणं जगत,
हे मातु अभय दायिनि,
शक्ति, देश रक्षा हेतु
दे मातु स्वानंदिनि।
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