कितने
सपने बांध ले चली आंचल में
एक नया
संसार ले चली आंचल में ।
बाबुल
की सब सीख और माँ की ममता
भाई बहन
का प्यार ले चली आंचल में ।
साझे कमरे
का प्यार और कुछ लडाई भी
उन यादों
को सम्हार ले चली आंचल में ।
सहेलियों
की छेड छाड ठिठोली भी
कुछ उनकी
मनुहार ले चली आंचल में ।
अपने प्रिय
लेखक और कवियों की यादे
एक पुस्तक
संसार ले चली आंचल में ।
अब विनती
है, प्रिय, तुम मेरा देना साथ
इतना तो
अधिकार हूं लाई आंचल में ।
मै इस
घर को अपने प्यार से भर दूंगी
भर लूंगी
प्यार दुलार मै अपने आंचल में ।
जब होगी
कभी अपनी एक नन्ही बेटी
दूंगी
उसे संसार मैं अपने आंचल में ।
चित्र गूगल से साभार ।
चित्र गूगल से साभार ।
