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रविवार, 4 सितंबर 2016

गणेश चतुर्थी



द्वारे बंदनवार, सजाई रंगोली,
आईये गणपति
स्वागत है।

ढोल, ताशे, झांज, खूब बज रहे
आनंद अपार
आगमन से।

पांव धोके पीऊँ, आरती उतारूं
कुंकुम तिलक
सुंदर सोहे।

सजाया आसन, विराजे गणेश,
भक्तों का उत्साह
 कहूँ कैसे।

आचमन,स्नान को, जल ये पवित्र,
चंदन रोली अक्षत
भाल सोहे।

जवाफूल दूब करूं मै अर्पण,
मोदक इक्कीस
नैवेद्य के।

अथर्वशीर्ष का होता पारायण,
सुखकर्ता, दुखहर्ता,
करूँ आरती।

चरणों में, साष्टांग दंडवत,
सेवा में आपके,
सदा रहें।


दस दिन हमारे साथ रहें देव
भारत सदैव
उन्नति करे।

आशीष केवल, यही देते जाना
सर्व जन रहें
सदा सुखी।




चित्र गूगल से साभार।


रविवार, 8 सितंबर 2013

मंगल आगमन गजानन को



मंगल आगमन गजानन को
अब से प्रभु घर में विराजत है।
मणि से नैना और सूंड सरल,
मस्तक पर मुकुट सजावत है।

पाशांकुश, मोदक कर धरि के
फिर वरद हस्त से रिझावत है
गणपति सबके हिय भाये अति
दूब, जवा पुष्प से सजावत है।

आँखन से भक्त को जतन करे
फेरि सूंड के पीर हरावत है।
कानन से करे ऐसो वात
सब विघन को दूर उडावत है।

भगतन के हित व्है दयावान
टूटे दन्त से बैरी गिरावत है.
हमरे अपराध रहे कोटिन,
सब पेट में डारि भुलावत है.

सारि माया मोह के बटै डोरि
कोई बिघनराज जब ध्यावत है.
शरण गये त्यागि कबहु न प्रभु
गणराज सभी को अपनावत है ।