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बुधवार, 30 मार्च 2016

आजकल










आजकल देख कर मुस्कुराने लगे हैं,
धीरे धीरे करीब दिल के आने लगे हैं।

बातों बातों में बातें निकली कुछ ऐसे,
लोग उसके के फसाने बनाने लगे हैं।

मुझे उनके इतने करीब जानकर अब,
दोस्त भी मेरे नजदीक आने लगे हैं।

किसी बात की पक्की खबर न हो तो
बात का ही बतंगड बनाने लगे हैं।

हमें आपसे इक लगावट तो है पर,
लोग इसको मुहब्बत बताने लगे हैं।

माहौल ये अब मर्जी का ही है,
उदासी के बादल जो जाने लगे हैं।

गुरुवार, 18 नवंबर 2010

दास्ताने इश्क



जब जब जहां में जिंदगी के काफिले चलते रहे
दास्ताने इश्क के भी सिलसिले चलते रहे ।
मुस्कुरा कर हमको देखा उसने तो बस इक नजर,
दिल में उमंगों के खुशी के बुलबुले चलते रहे ।
हमने थामा हाथ उनका, खामोशी थी दरमियां
धीरे से जो हां कहा तो, मनचले जलते रहे ।
दोस्तों की महफिलों का बैठा मै सरताज बन,
उनके मेरे नाम संग संग यूं मिले मिलते रहे ।
आदमी-ए-आम का भी इश्क से है वास्ता
चाहे रोटी को तलाशे, चल पडे, चलते रहे ।
इश्क करना है तो यारों, कर लें इस धरती से हम
इसके अपने इश्क बाद-ए-मौत भी पलते रहे ।
अपनी ताकत को न हम पहचाने तो किस का कसूर,
हुक्मरानों के बनाये फासले चलते रहे ।
आदमी हैं, और कुछ बनने की कोशिश क्यूं  करें,
आदमीयत ही निभायें, सिलसिले चलते रहें ।




बुधवार, 6 अक्टूबर 2010

भौरों के कदरदान


फूलों से ही भौरों की पहचान  है
वरना इनके कहां कदरदान हैं ?
आदमी को चाहिये इन्सानियत़
उसके बिना क्या आदमी का मान है ?
हमने किस पत्थर से क्या मांगा भला,
मन की जो भी जान ले, भगवान है ।
नन्हे-मुन्नों पे न डालो बोझ तुम
इनका बचपन आजकल मेहमान है ।
तेरे मेरे बीच का ये फासला
मिट गया गर, एक दिल दो जान है ।
जो न मिट जाये वतन की राह में
वो क्या सच्चा वीर है, जवान है ?
तुम से जो बन पाये, तुम उतना करो
औरों की सोचो न , वे अनजान हैं ।
आस का होता क्या कोई अंत है,
कम न निकले, दिल के जो अरमान हैं ।
जैसे गुजरी है ये अब तक जिंदगी
आगे भी गुजरे ?  तू तो बस नादान है ।