मंगलवार, 28 सितंबर 2010

इतिहास


इतिहास अपने को दोहराता है ।
हर सदी में फिर वही होता है ।
वही झूट, वही फरेब, वे ही अत्याचारी और भ्रष्ट लोग ।
और सामान्य जनों की बेहाली ।
अत्याचारियों का राज,
और अच्छे विचारवंत लोगों की कमजोरी ।
इस सब में बिकता, लुटता देश ।
इतिहास किसी को माफ नही करता ।
यदि हमने सबक नही सीखा तो फिर फिर
अपने को दोहराता है इतिहास ।



31 टिप्‍पणियां:

dhiru singh { धीरेन्द्र वीर सिंह } ने कहा…

बिल्कुल सही कहा आपने

संजय भास्‍कर ने कहा…

बिल्कुल सही

संजय भास्‍कर ने कहा…

वाह! ऐसी कवितों से जीने की उर्जा मिलती है.

संजय भास्‍कर ने कहा…

मेरी हौसला अफज़ाई के लिए आप सभी का बहुत-बहुत शुक्रिया.

ZEAL ने कहा…

यदि हमने सबक नही सीखा तो फिर फिर
अपने को दोहराता है इतिहास ।

bitter truth

.

Udan Tashtari ने कहा…

अपने को दोहराता है इतिहास ।

-सही कहा आपने!

P.N. Subramanian ने कहा…

हम तो उसकी प्रतीक्षा में हैं. सुन्दर रचना.

Arvind Mishra ने कहा…

क्या कल वह दुहरायेगा ?

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' ने कहा…

इतिहास किसी को माफ नही करता ।
यदि हमने सबक नही सीखा तो फिर फिर
अपने को दोहराता है इतिहास...
अच्छी रचना है...

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

इतिहास जब अपनी गलतियाँ दोहरा लेता है, हम तो फिर भी इन्सान हैं।

महेन्‍द्र वर्मा ने कहा…

यदि हमने सबक नहीं सीखा
तो फिर फिर अपने को दोहराता है इतिहास

वास्तविकता पर आधारित सुंदर कविता...बधाई

Abhishek Ojha ने कहा…

सबक ना सीखें तो ... सही कहा आपने.

डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) ने कहा…

बिल्कुल सही कहा आपने

शरद कोकास ने कहा…

इतिहास का सबसे बडा सबक यही है कि कोई इतिहास से सबक नही लेता ।

शिवम् मिश्रा ने कहा…


बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई !

आशा है कि अपने सार्थक लेखन से,आप इसी तरह, ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है-पधारें

दिगम्बर नासवा ने कहा…

हम तो कभी भी नही सीखे इतिहास से .... और आज भी वही होने वाला है ....
१००० साल की गुलामी इतनी आसानी से नही जाती ...

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

आदरणीया आशा जोगलेकर जी
और
आदरणीय श्री जोगलेकर जी
प्रणाम !

हर सदी में फिर वही होता है
अजी , हर सदी में हुआ , न हुआ …
इस सदी में तो हो रहा है !

इंसां को पग पग पर ख़तरा ,
हैं हैवां महफ़ूज़ मगर …

किया भी क्या जाए ???

शुभकामनाओं सहित
- राजेन्द्र स्वर्णकार

Mumukshh Ki Rachanain ने कहा…

वही झूट, वही फरेब, वे ही अत्याचारी और भ्रष्ट लोग ।
और सामान्य जनों की बेहाली ।
अत्याचारियों का राज,
और अच्छे विचारवंत लोगों की कमजोरी ।

सत्य वचन. अपनी भी अनुभूति कुछ-कुछ ऐसी ही है आज के इस युग में .....

चन्द्र मोहन गुप्त

ashokbajajcg.com ने कहा…

बहुत ही सुन्दर पोस्ट .बधाई !

Suman ने कहा…

asha tai sach kahati hai aap itihas kisiko maaf nahi karta hai..........

एक बेहद साधारण पाठक ने कहा…

कृपया यहाँ पढ़ें
वो कहते नहीं तो क्या हुआ......

ज्योति सिंह ने कहा…

yah to sach hai bilkul gujra wapas nahi hota .sundar rachna .

Pushpendra Singh "Pushp" ने कहा…

sundar rachna
badhai

निर्मला कपिला ने कहा…

बिलकुल सही कहा आपने। सुन्दर सन्देश। कृ्प्या मेरा ये ब्लाग भी देखें।
http://www.veeranchalgatha.blogspot.com/

rashmi ravija ने कहा…

बिलकुल सही कहा,आपने..हमने सबक नहीं लिया तो फिर इतहास दुहराता है ...अपनेआपको

रंजू भाटिया ने कहा…

सही सच्चे लफ्ज़ .इतिहास किसी को माफ़ नहीं करता

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

jee haan .... itihas to sawyam ko dohrata hi hai....

पूनम श्रीवास्तव ने कहा…

aadarniy mam,

aapki yah post vakai me bahut bahut pasand aai.aapne bilkul sahi haqikat ko bayaan kiya hai.sari hi panktiyan mugdh kar gai.
हमने किस पत्थर से क्या मांगा भला,
मन की जो भी जान ले, भगवान है ।
नन्हे-मुन्नों पे न डालो बोझ तुम
इनका बचपन आजकल मेहमान है ।
behtreen
poonam

davbindu ने कहा…

यदि हमने सबक नहीं सीखा
तो फिर फिर अपने को दोहराता है इतिहास.....

बहोत खुब....

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति ने कहा…

staya vachan... aur sundar rachna..

Asha Lata Saxena ने कहा…

बहुत सही लिखा है |
आशा