रविवार, 1 जुलाई 2012

वयस का भार




चेहरे की झुर्रियों में अनुभव का सार है,
पर क्यूं ये लग रहा है, वयस हम पे भार है ।

डगमगाते हैं कदम, मन चाहे हो मजबूत ,
भावों की ओढनी क्यूं अब तार तार है ।

कोई पूछे तो, दें सकेंगे, सलाह हम भी कुछ,
पर किसको है जरूरत, सब समझदार हैं ।

समय बदल रहा है कुछ तेज़ कदम से,
बहते रहे इसी में, ये समय की धार है ।

भारभूत रीति रिवाजों को छोड दें,
जरूरी तो नही इसमे, हमारी ही हार है ।

प्रेम से सबसे मिलें, न मन में हो शिकवा,
हर किसी की सोच, और उसका विचार है ।

अपनी हंसी खुशी को चहूँ दिशि बिखेर दें,
लगने लगेगा कि फिरसे मौसम-ए-बहार है ।

तब ये समय भी गाते और हंसते जायेगा,
और ना लगेगा ये कि वयस हम पे भार है ।

बुधवार, 20 जून 2012

चलते चलो रे ४ (सॉल्ट लेक और मॉरमॉन टेबरनेकल (टेम्पल)



सुबह नही धो कर तैयार हुए और कॉम्प्लिमेन्ट्री कॉन्टिनेन्टल ब्रेकफास्ट कर के वापसी के प्रवास पर चल दिये । वही रास्ता, पर, एक अलग नजरिये से देखा उल्टा जो जा रहे थे । एक जगह बर्गरकिंग में रुक कर कॉफी और ओनियन रिंग्ज का समाचार पूछा । रास्ते में फोटो शूट और
गप-शप चल ही रही थी । जब ४ घंटे बाद आयडाहो पहुँचे तो फिर से अरीमो गांव में रुके । कार मे गैस भरवाई और  फिर से क्रॉस कट फ्राइज खाईं । फिर रुके यूटा के एन्टिलोप नामक गांव में जहां हमें सॉल्ट लेक देखना था । यह स़ॉल्टलेक सिटि से कोई ३० मील दूर है ।
सॉल्टलेक को अमेरिका का डेड-सी भी कहते हैं । यहां का पानी सामान्य समंदर के पानी से पांच गुना ज्यादा खारा है । पानी का घनत्व इतना ज्यादा है कि कुछ डूबता ही नही । यहां पहले एक स्टोर में गये और कुछ बायसन खरीदे (खिलौने) । फिर लेक पर गये पानी में पांव भिगोये पानी चखा और मुंह बनाया । पानी पे शायद चल भी लेते क्राइस्ट की तरह पर कोशिश ही नही की ।
इस लेक का परिसर कोई ७५ X २८ मील है ।
हमने देखा कि पंछी मजे से पानी पर बैठे थे, कुछ तो उन्हे मिल ही रहा था खाने को । वैसे यहां ब्राइन श्रिंप और ब्राइन अल्गी के अलावा कुछ होता नही है ।   वहां एक महिला बोटिंग करने आई थी, उन्होने बताया कि यहां पास में एक द्वीप है, एक रशियन आदमी ने वहां कुछ बायसन और कुछ हाइना (लकडबग्घे) बसाये थे पर उससे ये काम सम्हला नही । वह तो छोड छाड के भाग गया पर अब वहां बाइसन कम हो रहे हैं और लकडबग्घे ज्यादा ।vdo1(विडियो) 


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 वे बता रहीं थी कि द्वीप से वे कभी भी यहां मेनलैंड पर आ सकते हैं और यहां के लोगों और जानवरों के लिये खतरा बन सकते हैं । 
सॉल्टलेक सिटि से वापिस क्लिफ-क्लब आते हुए गलत रास्ते पर चले गये पर एक अमेरिकन महिला ने हमारे साथ साथ अपनी गाडी चला कर हमें सही रास्ते पहुंचाया । ईश्वर उसका भला करे । वापस आये तो थके पडे थे, खाना खाया और निद्रादेवी के आधीन ।
आज १७ तारीख है और हमें जाना है मोरमोन टैबरनेकल देखने । अमेरिका का ये सबसे बडा मोरमोन टेंपल है । अब रिपब्लिकन प्रेसिडेन्शियल कैंन्डिडेट  श्री. मिट रॉमनी के मंदिर जाना तो बनता था न ।
वहां पहुंचे तो मंदिर (दिखता तो ये चर्च जैसा ही है पर कहते टेंपल या टेबरनेकल हैं ) का परिसर बहुत सुंदर था । सुंदर बगीचे में खूब फूल खिले हुए थे और एक हलकी सी मनभावनी महक हवा में फैल रही थी । पर ये क्या, इस चर्च या मंदिर में सिर्फ मोरमोन्स को ही प्रवेश था । हम तो हम,  क्रिस्चियन्स को भी अंदर जाना वर्जित था ।  नये नये दीक्षित मोरमोन्स भी नही जा सकते हैं अंदर । एक साल तक उनको देखा परखा जाता है फिर ही उन्हें प्रवेश की अनुमति मिलती है । यह कुछ अजीब सा लगा । वहां की दो भद्र महिलाओं नें हम पर तरस खा कर हमें एक बडा सा एल्बम दिखाया जिसमें अंदर की तस्वीरें थीं ।  तस्वीरों से तो लग रहा था अंदर बडा सुंदर होगा पर  ना देख पाने का मलाल तो रह ही गया ।
पता चला कि यहां एक ऑरगन वादन का कार्यक्रम है १२ बजे, तो तय किया कि ये तो देखेंगे । बहुत सुंदर से ऑडिटोरियम में  था यह कार्यक्रम । इस खूबसूरत ऑडिटोरियम में स्टेज पर छोटे बडे कोई १०० ऑरगन पाइप्स वाला ऑरगन था, यह ज्यादा का भी हो सकता है । थोडी देर के इंतजार के बाद कार्यक्रम शुरु हुआ ।  खूबसूरत म्यूझिक के साथ ऑरगन के पीछे से रंगों का अद्भुत खेल चल रहा था । कभी हरा तो कभी गुलाबी, कभी नीला कभी बैंगनी,कभी पीला कभी नारंगी, आँख और कान दोनो तृप्त हो गये । vdo3 (विडियो) 


vdo4(विडियो) (Courtesy Youtube.com)


य़ह खूबसूरत प्रोग्राम देख कर वापिस पार्किंग-लॉट में आये तो देखा कार की खिडकी खुली है । धक रह गये सब के सब ! पर गाडी ठीक थी और प्रकाश के १५० डॉलर जो एक लिफाफे में रख कर वे गाडी के डैश बोर्ड पर ही भूल गये थे वे भी इनटैक्ट थे । जो खिडकी खुली छूटी थी वह ड्राइवर सीट की थी, तो हम सब तो गालियां खाने से बच गये । सुहास भी एक खिसियानी हंसी हंस कर गाडी में बैठ गई । फिर हम टैंपल स्केवर  ट्रेन स्टॉप पर गये और एक चक्कर ट्रेन में बैठ कर स़ॉल्टलेक सिटि के एक हिस्से का लगाये टेंम्पल स्क्वेअर से वेस्ट व्हेली तक और  वापिस । फिर तो कार से अपने क्लिफ क्लब पर । हमे परसों कोलंबस जाना था  हमारी उडान १९ को सुबह की थी तो सोचा कि कल यानि १८ को ही लंच के  बाद हम क्लिफ क्लब छोड कर सॉल्टलेक सिटि के एयरपोर्ट वाले होटेल ( Residence inn) में चैक-इन कर लेंगे । वहां से एयरपोर्ट शटल का पता कर के गाडी भी आज ही वापिस कर देंगे ता कि कल सुबह कोई झंझट ना रहे । वैसा ही किया, रात को आराम से सोये और दूसरे दिन सुबह शटल से एयरपोर्ट और फिर प्लैन पकड कर हम वापिस कोलंबस । उल्का के यहां एक दिन और रहे और २१ को सुबह चल कर मार्टिन्स बर्ग वापिस । प्रकाश और जयश्री एटलांटा में ही उतर कर अपनी बेटी (माधुरि)के घर चले गये । हम लोग और दो दिन मारटिन्सबर्ग रह और २३ को एन्डरसन वापिस आये । यह ट्रिप हमारे और ट्रिप्स के मुकाबले छोटी थी (थोडी गडबडी भी हुई, दिल्ली में चोरी ....)पर मज़ा बहुत आया ।
आप को कैसी लगी हमारी ये यात्रा ?

(समाप्त)

मंगलवार, 12 जून 2012

चलते चलो रे -३ (यलोस्टेन नेशनल पार्क- मैमथ हॉट स्प्रिंग्ज़, मड वॉल्केनो इत्यादि)





आज १५ तारीख है । कल की थकान थी तो उठने की कोई जल्दी नही की पर फिर भी तैयार होकर सुबह ९ बजे निकल पडे । आज विजय भी हमारे साथ थे । उसके पहले कॉम्लिमेन्ट्री कॉन्टिनेन्टल ब्रेकफास्ट किया । लंच के लिये एक डेलि से सैंडविचेज़ बंधवा लिये और गेट पर पास दिखा कर चल पडे पार्क की सैर पर । आज हमें दूसरा लूप लेना था । कुछ देर तक कल वाला रास्ता लेकर आगे गये और टी जंक्शन पर कल के विपरीत रास्ता लेकर आगे चल पडे ।  पहले हमने देखा गिब्बन फॉल्स । यह एक मझोले आकार का प्रपात है पर है बडा सुंदर पानी काफी वेग से गिरता है । गिरती धारा ऐसी प्रगाढ  प्रपात की बहुत सी तस्वीरें खींची । इसके बाद फिर से गरम पानी के गाइजर दिखे  । एक बडा सा इलाका है नाम है नॉरिस बेसिन । यह इस पार्क का सबसे गरम इलाका है । 
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इनमें से कुछ को फ्यूमाहोल्स भी कहते हैं क्यूं कि इनमें से सिर्फ भाप ही निकलती रहती है । प्रेशर इतना नही होता कि पानी का फव्वारा बने । कल के मुकाबले इस रास्ते पर बायसन ज्यादा दिखे । जगह जगह लिखा था बाइसन बडे विराट और खतरनाक जानवर होते हैं इन्हें अकेला ही छोडें । कार का हॉर्न ना बजायें ना ही हेड लाइटस जला कर इन्हें चौकायें ।  हम पहले जाने वाले थे मेमथ हॉट स्प्रिंग्ज । अब सारे रास्ते लंबे लंबे थे कुछ भी पास नही था । इस बार हम यलोस्टोन नदी के किनारे किनारे जा रहे थे ।यह पूरा लूप जो कि  अंग्रेजी ८ के आकार का है कोई ९० मील का है । रास्ता सारा पहाडी और ये बडे बडे पहाड हैं वाकई रॉकी माउन्टेन ।
सब से पहले रुके मैमथ हॉट स्प्रिंगज़ पर । एक पूरी पहाडी या पहाड उबलते सल्फ्यूरिक एसिड के प्रभाव से गल सा गया है । (विडियो) vdo2

रंग में एकदम चूने सा सफेद और कहीं कहीं एसिड बहने से पीला सा और जंग के रंग का। यहां सुंदर रंगीन सीढीनुमा टेरेसेस सी बन गई हैं । ये टेरेसेज फॉल्ट में से गरम पानी के बहते रहने से बनी है जो  घुले हुए केल्शियम बायकार्बोनेट को ऊपर ले आता है और फिर कार्बनडायऑक्साइड हवा में निकल जाती है तथा केल्शियम कारबोनेट यह सफेद रंग की तहें बनाता जाता है । यह भूभाग  अपने आकार-प्रकार को बदलता रहता है क्यूं कि लगभग पांच साल में गरम पानी के झरने बंद हो जाते हैं पर दूसरे झरने निकल आते हैं । कुछ रंग बेक्टिरिया की वजह से होते हैं । कमाल है उबलते पानी में जीवन !   यह अपने आप में एक अदभुत दृष्य है । यहां पूरे इलाके में बोर्ड-वॉक बना हुआ है और इसी पे चलना होता है । सारी जमीन गर्म और एसिडिक (तेजाबी) है कहीं से भी फव्वारा फूट कर आपको जला सकता है । यह बोर्ड वॉक भी काफी लंबा है पर पूरा ऊपर जाने से ज्यादा फायदा नही होता क्यूंकि ऊपर सब कुछ सुप्त है । तेजाब बहता नीचे ही दिखाई देता है । इतने तेजाबी माहौल में भी बैंगनी रंग के कुछ फूल खिले दिखाई दिये । कुछ पाइन के वृक्ष भी । हम लोग निचली टैरेसेस तक गये जहां पीला सा तेजाबी पानी बह रहा था । मैमथ स्प्रिंग से नीचे आने के बाद पास में ही एक बडा कोन के आकार सा दिखाई दिया, कुछ कुछ देवी के मंदिरों में जो दीपमालिका होती है उसकी तरह का।  इसे लिबर्टी कैप कहते हैं क्यूं कि यह रिवाल्यूशनरी युद्ध के सिपाहियों की टोपी की तरह का है । अब इसमे से कोई पानी नही बहता । आप भी देखिये  ।
यहीं पास में ही रूज़वेल्ट इनफॉर्मेशन सेंटर था वहां पिकनिक बेन्चेज़ भी थे तो हमने वहीं बैठ कर लंच किया । हम अपने साथ लड्डू बना कर लाये थे, वो लेकर ही चले थे ताकि लंच के बाद स्वीट डिश भी हो जाये । उससे मज़ा दुगना हो गया । वहां हमें बहुत से एल्क हिरण दिखे । हमें तो मौका मिल गया बस, खूब तस्वीरें लीं ।
फिर आगे निकले कैनियॉन विलेज के लिये वहीं से आगे हम ग्रैंड केनियॉन ऑफ यलोस्टेन देख पाते । पर आगे जाकर रास्ता बंद था तो उतना ही लंबा वापिस आना पडा कोई ४० मील । इससे बडी खीझ हुई पर एक फायदा हुआ ग्रिझली बेअर यानि भालू देखने को मिल गये । एक बार को तो लगा कि वापिस चलते हैं होटल  पर फिर हमने मड-वॉल्केनो का रस्ता ले लिया और बहुत अच्छा किया वरना यह प्रकृति  की प्रयोग शाला कैसे देख पाते ।vdo3 (विडियो)

 
यहां हमने पहले देखे सल्फर कैल्ड्रॉन्स यानि बडे बडे कढाईनुमा बेसिन्स जहां पानी मिट्टी सल्फर का एक अजीब मिश्रण उबलता रहता है । हाइड्रोजन सल्फाइड और सल्फर डाय ऑक्साइड की मिली जुली गंध यहां वातावरण में फैली रहती है । ऐसे छोटे बडे अलग अलग आकार के कई केल्ड्रॉन्स यहां है । हरेक का आकार अलग और रंग अलग कोई हरा सा तो कोई मटमैला तो कोई पीली झांक लिये । कोई गोल कोई चौकोर और कोई टेढा मेढा । प्रकृति की केमिस्ट्री लैब हो जैसे ।
हायड्रोजन सल्फाइड को माइक्रोबज् गंधक के तेजाब में बदलते रहते है । और गंधक के अलग अलग योगिक इन घोलों को अलग अलग रंग देते हैं । हमने तो अपने जीवन में पहली बार देखा ये सब और ये सब सिर्फ यहीं देखने को मिलता है ।
छोटे मोटे भूकंप यलोस्टोन की धरती को झकझोरते रहते हैं और तापमान १०० डिग्री सेंटिग्रेड तक पहुंच जाता है । इन विविध कैल्ड्रॉन्स के अलग अलग नाम भी हैं ।

मड वॉल्केनो – पहले इसका आकार एक ऊँचे कोन की तरह था और इससे उछलने वाला तेजाबी कीचड कोई तीस फीट ऊंचे और ३० फीट चौडे इलाके में फैल जाता था । किसी ज्वालामुखीय विस्फोट से यह अब एक बडे गढ्ढे की तरह हो गया है । इसमें से आयरन के सल्फाइड्स से युक्त मिट्टी और कीचड निकलता रहता है । यहां तो गंध के मारे खडे रहना मुश्किल हो रहा था । (विडियो)vdo4

इसके बाद हम फिशिंग ब्रिज़ की तरफ चल पडे क्यूं कि हमें वापिस इसी रस्ते से जाना था ।यहीं पर एक स्टोर था जहां से हमने कुछ गिफ्टस् खरीदे ये स्टोर्स ज्यादा तर महंगे होते हैं पर कुछ तो लेना ही था बच्चों के लिये ।
हम यलोस्टोन नदी के किनारे किनारे चले जा रहे थे ।  कुछ देर बाद हमे यलोस्टोन लेक दिखाई दिया यह  इस ऊंचाई पर अमेरिका का सबसे बडा सरोवर है ।  यह कोई २० मील लंबा और १४ मील चौडा है । बहुत ही सुंदर दृष्य था । एक जगह तो पूरी ऊपरी सतह बर्फ बन गई थी । सुंदर बर्फीले पहाड और यह कांच जैसा सरोवर बहुत आनंद आया आप लोग भी देखें (विडियो)  ।vdo5
 
वापसी पर रास्ते में एक २५-३० बायसन्स का झुंड सामने से आते हुए मिला । हमारे आगे और भी एक दो कारें थीं । थोडा डर तो लग रहा था पर चुप चाप बैठे रह कार के अंदर । बायसन भी बिचारे कोई १० मिनट में अपने रास्ते चले गये । थोडी दूर आगे जाने के बाद एक जगह ४-५ हिरण एक लाइन में एक के पीछे एक जाते दिखे, परिवार था शायद । नर आगे आगे चल रहा था, बाकी उसके पीछे एक कतार में ।  
बीच में एक हिरण रास्ता क्रॉस कर के कार के आगे से तेजी से निकल गया, बेचारा बहुत डर गया था चलती कार से ।
शाम को ७ बजे वापिस पहुंचे । मैकडॉनल्ड में खाना खाया और वापिस रूम पर कल तो हमें वापिस जाना था ।
 (क्रमशः)

सोमवार, 4 जून 2012

चलते चलो रे २ -सफर चार राज्यों का और पहुंचना यलोस्टोन (वायोमिंग)



सुबह साढेपांच बजे उठ कर तैयार हुए । नाश्ता सीरीअल का ही कर लिया ताकि ज्यादा समय ना लगे । आठ बजे तक निकलने का सोच लिया था ताकि समय से गंतव्य पर पहुंच जायें । यह कोई ६ घंटों की ड्राइविंग निकली हालांकि बताय़ा गया था कि ४-५ घंटे की है ।  हमारे रिसॉर्ट से कॉटनवुड केनिय़न रोड लेकर आगे २०९ नॉर्थ लिया फिर लिया २१५  नॉर्थ सॉल्ट लेक सिटि से लिया ८० वेस्ट और फिर १५ नॉर्थ जो कि इंटर स्टेट रोड है । यह सोचा था कि एक रात और एक दिन यलोस्टोन पार्क में रह कर, आते हुए सॉल्ट लेक पर रुकते हुए आयेंगे । सॉल्ट लेक समंदर से भी ज्यादा नमकीन ताल(?) है

.यह रास्ता चार राज्यों से होता हुआ जाता है । यूटा, आयडाहो, मॉन्टाना और वायोमिंग ।  यूटा काफी अलग सा लगा रेगिस्तानी सा हरियाली काफी कम है .यहां । अब तक देखी सुंदर अमरीका से निराला । पहाडी तो है पर हरा भरा नही । यूटा के बाद लगा आयडाहो । हमने यहां के वेलकम सेंटर से कुछ ब्रॉशर उठा लिये थे । इसमें आयडाहो फॉल का चित्र देख कर मन ललचा उठा देखने को । पर सोचा जो तय है वही पहले करेंगे । यहां खेत दिखे हरे भरे । यहां आलू की खेती बहुत की जाती है । यहां के आलू अमरीका भर में बिकते हैं । आप अगर अमरीका में रहते हों तो आयडाहो पोटेटोज का बैग जरूर खरीदा होगा । ये आलू ज्यादा तर बेक्ड आलू बनाने के लिये इस्तेमाल किये जाते हैं ।


गैस (पेट्रोल) लेना था तो एक गैस स्टेशन पर रुके । जगह का नाम था अरीमो । गैस भी लिया और कॉफी पीने अंदर चले गये । गैस स्टेशन पर ये सुविधा होती ही है । भूख लगी थी देखा तो एक अलग तरह के फ्रेंच फ्राइज रखी थीं, उनका नाम था क्रॉस-कट-फ्राइज । कुछ कुछ जाली वाले चिप्स जैसी पर मोटी प्रेंच फ्राइज़ की तरह । बहुत ही टेस्टी थीं,  सीझनिंग तो कमाल की थी । तो ६ लोगों के लिये अलग अलग सर्विंग ले लिये । हमने उनसे पूछा भी कि क्या सीझनिंग है पर काउंटर वाली ल़डकी को कुछ पता नही था । ऐसे ही मौज मस्ती में सुहास का ड्राइविंग का स्ट्रेस कम करते हुए हमारा सफर चल रहा था ।



यहां हमने सिंचाई की गजब सिस्टिम देखी । अपने आप सारे खेत को मजे से पानी जा रहा था । आप भी देखिये । यूटा के बाद मोन्टाना लगा यहां पहुंचते पहुंचते पूरे ६ घंटे लग गये थे । हमारा होटेल मोन्टाना में ही था नाम था
ग्रे वूल्फ इन यानि भूरे भेडियों का बसेरा । चैक इन करने गये तो वहां स्वागत टेबल पर जो बंदा था वह मार्टिन्सबर्ग का ही निकला वहां समर जॉब करने आया था । वह भी वहां टीचर था एक स्कूल में । सुहास की और उसकी तो बातें ही खतम ना हों फिर उसीने कहा कि आप जल्दी से फ्रेश हो कर निकलें तो अभी भी पार्क का एक हिस्सा देख सकते हैं । होटल अच्छा था कमरे बडे और साफ थे और सुंदर भी । हमेशा की तरह हम तीनों महिलाएं एक कमरे में और वे तीनो पुरुष दूसरे में ऐसा बंटवारा था । चाय के पैकेट रखे मिल गये तो चाय पी और रवाना हुए । विजय बहुत थक गये थे तो कमरे में ही आराम के लिये रुक गये .

पहले फॉरेस्ट डिपार्टमेन्ट में जाकर पास बनवाया । १० डॉलर में एक गाडी का पास ( वह भी हर नेशनल पार्क के लिये वेलिड और जीवन भर के लिये ) पर ये सुविधा सिर्फ सीनियर सिटिझन्स के लिये थी । हम गाडी लेकर जैसे कि स्वागत डेस्क पर बताया था पार्क के पश्चिमी भाग के लिये चल पडे । सुंदर रास्ता, बीच बीच में दिखते विशाल काय बायसन और सुंदर स्वच्छ मेडिसन नदी और हरियाली भी । मन प्रसन्न हो गया । (विडियो)
यह यलोस्टोन नेशनल पार्क शुरू होता है मॉन्टाना (राज्य) में पर इसका बहुत बडा हिस्सा वायोमिंग (राज्य) में है । यह इलाका ज्वालामुखी का इलाका है । इसके बारे में कहते हैं कि इसका भूत, भविष्य और वर्तमान सब ज्वालामुखीय है और कभी भी विस्फोट हो सकते हैं पर फिर भी विरोधाभास देखिये कि अंदर क्रोध से उबलती धरती बाहर से शांत सुंदर, हरीभरी और जीव-जंतुओं को पालती दिखती है ।


आगे चल कर बहुत से छोटे बडे गर्म पानी के फव्वारे देखे । इन्हे गाइज़र कहते हैं । एक छोटा सा परंतु गोलाकार फव्वारा था जो सतत चल रहा था इसका नाम था बिस्किट बेसिन । पानी इनमें इतना अधिक गरम होता है कि बाहर निकलते ही भाप बन जाता है, बहुत से फव्वारों से सिर्फ भाप ही दिखाई दे रही थी । एक जगह एल्क नामक हिरन देखे और देखा कोयोडि जो कि लकडबघ्घे की तरह होता है पर आकार में लोमडी की तरह । विडिया)


पर हमें तो तलाश थी ओल्ड फेथफुल की जो यहां का सबसे बडा गर्म पानी का फव्वारा है और एक एक घंटे के अंतराल से जागृत होकर जोर से फूटता है । तो वहां पहुंचे । बैठ गये, मना रहे थे कि जल्दी ही चालू हो जाये पर सिर्फ भाप ही भाप थी । पर सब बैठ कर धैर्य से प्रतीक्षा कर रहे थे तो हम भी बैठे रहे ।  कोई पौने घंटे बाद जोर जोर से भाप निकलनी शुरु हुई लगा कि बस अब देखेंगे वो अद्भुत नज़ारा पर कहां भाप ही भाप बस । थोडी सी निराशा हुई । इतने में एक बार पानी जोर से उछला पर फिर भाप । ऐसा पांच, छै बार हुआ । करते करते फिर पानी का ऐसा जोरदार फव्वारा छूटा कि आंखे तृप्त हो गईं। नज़ारा देखते ही बनता था । पूरा घंटा लगा दिया बंदे ने प्रतीक्षा करवाने में। मनुष्य के मन में जैसे क्रोध दबा रहता है और मौका मिलते ही फूट पडता है कुछ वैसे ही लग रहा था ये । गरमा गरम पानी कोई ३० फीट ऊंचाई तक ऊपर जा रहा था । देर तक हम विडियो खींचते रहे । आप भी देखिये ।


फॉल देख कर फिर मैकडॉनल्ड में लंच किया रात के लिये फ्रोजन डिनर खरीदा और वापिस, पर प्रकाश की रेड वाइन कैसे भूलते, ना भूले जी ।  कल बचा हुआ पार्क देखना था जो कि बडा हिस्सा था और दूरी भी बहुत ज्यादा थी । तो यही सोचा कि कल रात भी यहीं रुक जाते हैं ताकि वापसी की जल्दी ना हो और यह तो अच्छे से देख लें । मै तो रात को उठती नही पर जो लोग उठते हैं उन्हें काफी परेशानी हुई क्यूं कि किसी कारण वश पूरी रात (१ बजे से ५ बजे तक )बिजली ही नही थी, अमरीका में पॉवर कट पहली बार देखा ।

 (क्रमशः) 

गुरुवार, 31 मई 2012

चलते चलो रे १ (स्नो-बर्ड माउन्टेन क्लिफ क्लब)








इस बार अमेरिका आकर हमारा प्रोग्राम बना सॉल्ट लेक सिटी ओर यलोस्टोन नेशनल पार्क देखने का । हमारा प्रोग्राम हर वर्ष की तरह सुहास ने ही प्लान किया तो हम व्हाया ब्लेक्सबर्ग (वर्जीनिया ) उनके घर मार्टिन्सबर्ग पङुँचे । इस बार हमारे टिकिट कोलंबस (ओहायो ) से थे क्यूं कि वहां से टिकिट १२५ डॉलर सस्ता पड रहा था । १२५ गुणा ६  यानि ७५० डॉलर का फर्क । तो हम कार से पहले उल्का के यहां कोलंबस गये और उसकी मेहमान नवाजी का लुत्फ उठा कर १२ तारीख को सुबह ८ बजे सॉल्टलेक सिटि के लिये उडान भरी जो व्हाया मेम्फिस थी । वहां उडान बदल कर कोई १० बज कर ३० मिनिट पर (माउन्टेन टाइम ) सॉल्ट लेक सिटि पहुँचे । आज हमारे शादी की ४७ वी वर्षगांठ थी सबने बधाइयां दी ।
यहां हमें कार लेनी थी तो हमने एयर- पोर्ट पर ही हर्ट्झ नामक कंपनी से गाडी ली । बडी सी गाडी थी शेवी ट्रव्हर्स नामक अमेरिकन गाडी जो सुहास ने या विजय ने कभी चलाई नही थी । उनके पास हॉन्डा की सी वी आर है । पर थोडे से टीथिंग ट्रबल के बाद हम चल पडे हमारे रिसॉर्ट जो स्नो बर्ड नामक जगह में स्थित है । हम ने एयरपोर्ट से ८० ईस्ट लिया फिर लिया १५ साउथ और फिर २०९ वेस्ट । यह पहाडी रास्ता कॉटनवुड केनियॉन रोड कहलाता है । एक तरफ ऊँचे ऊँचे पहाड और दूसरी तरफ गहरी खाई यानि कैनियन । रिसॉर्ट का नाम था क्लिफ क्लब रिसॉर्ट । यह एक स्कीइंग रिसॉर्ट है । जहां अमेरिकन लोग स्कीइंग के लिये जाते हैं यहां कोई ८०० इंच (!!!!!) बर्फ गिरती है पर इस साल बहुत कम यानि केवल(?) ४०० इंच  ही बर्फ गिरी है । बीच में हमने के बर्गर किंग में रुक कर लंच कर लिया ।  हमें रूट २०९ लेकर आगे जाना था तो चल पडे । आगे रास्ते में बडे बडे पहाड दिखे एकदम पथरीले । । अमेरिका के और जगहों के मुकाबले यह इलाका थोडा ड्रेब लगा यानि हरियाली कम । सॉल्टलेक सिटि नाम ऐसे ही थोडे है । और हमारे रिसॉर्ट की उँचाई थी ८००० फीट और स्कीइंग स्लोप थे  कोई ११,००० फीट पर । हम रिसॉर्ट पर पहुंच कर खुश हो गये । चारों तरफ बर्फ वाले पहाड। इनका नाम है वॉसाट माउन्टेन यह रॉकी माउन्टेन्स रेन्ज का हिस्सा है । हमारे कमरे ८वी मंजिल पर हैं कमरा नं ८०८ और ८१०, बीच का दरवाजा भी है जो हमने खोल लिया तो अपारटमेन्ट ही बन गया । दोनों कमरों के साथ क बालकनी भी है, ऊँचाई से सब कुछ बहुत सुंदर दिख रहा है ।  पहुंचते पहुंचते कोई साढेतीन चार बज गये थे ।  तो आज घूमने का कोई कार्यक्रम नही बनाया। आते समय बर्गर किंग के पास एक स्मिथ नामक ग्रॉसरी स्टोर से ब्रेड आलू व प्याज ले लिये थे । रोटियां भी ( तोर्तिया) । शाम को आलू प्याज का रस्सा बनाया और खाना खा कर बात चीत की । (विडियो देखें)


रात को सोये ही थे कि राजू का फोन आ गया । कहा कि वसंत कुंज के हमारे घर में चोरी की कोशिश हुई है । मेरा तो मन ही उखड गया अभी घूमना शुरू ही हुआ था कि ये कैसी खबर आ गई । फिर पडौसियों से बात की । मेरा भतीजा जो ए आय आय एम एस में है उससे बात की तो पता चला कि एक खिडकी तोड कर चोर अंदर तो दाखिल हुए पर पडोसियों के चोकन्नेपन से कुछ कर नही पाये । हमारे एक बिलकुल नये पडौसी हैं, आर्मी मे है, उनकी जागरूकता से ही ये संभव हो पाया । भतीजे ने पुलिस रिपोर्ट की और मुआयने के बाद आनन फानन में खिडकी की ग्रिल फिर लगवा दी । मै तो स ट्रिप के तुरंत बाद वापिस जाने का सोच रही थी पर राजूने कहा कि सब ठीक है तो क्यूं जाओगी गर्मी में । मै जाउंगा जुलाय में और देख आऊंगा । मन में खुट खुट तो  अब भी है पर................................।
खैर दूसरे दिन हम गये स्कीइंग देखने । होटल के दर्शनी गेट के स्वागत कक्ष से ये स्कीइंग वाली  हिल  अच्छे से दिखती है तो हमने वहीं से पहले काफी फोटो खींचे । प्रकाश सुरेश और सुहास १२, १२ डॉलर के टिकिट लेकर एयर ट्राम से हिल के ऊपर चले गये । इस में एक साथ कोई ७५ आदमी बैठ सकते हैं । उन्होने ऊपर जाते हुए स्कीअर्स से बातें की  और ऊपर से बहुत सुंदर तस्वीरें खींची । यहां के  स्किइंग ट्रैक में घुमाव भी थे जिस पर स्किंइंग काफी मुश्किल होता है । एक आदमी तो लडखडा ही गया फर दो तीन कुलांचे मारने के बाद फिर उठ कर खडा हुआ और स्कीइंग चालू । एक भद्र महिला अपने सात और नौ साल के बच्चों के संग स्कीइंग करने आई थी । और दोनो बच्चे क्या माहिर थे । इस वक्त पहाड पर कोई पांच फीट मोटी तह रही होगी बर्फ की ।

जयश्री और मै फिर स्वागत कक्ष से निकले और ट्राम स्टेशन तक आये यहीं आगे जाकर एक गेट था जहां से स्कीअर्स नीचे आ रहे थे हमने नीचे आते हुए उनकी काफी तस्वीरें लीं । फिर वहां घूमते रहे । इस इलाके को स्नो-बर्ड सेंटर कहते हैं ।(विडियो देखें)


काफी चित्र खींचने के बाद हम वापिस अपने रिस़ॉर्ट आ गये । वापसी का रास्ता चढाई का था तो मै धीरे धीरे चल रही थी, मुझे यूं  चढते देख एक टूरिस्ट मुस्कुराया और बोला, यू कैन डू इट, मैने भी मुसकुरा कर जवाब दिया, यस आय कैन ।  थोडी देर बाद सुहास और दोनो भाई भी वापिस आ गये । उनसे ऊपर की सारी रोमांचक कहानियां सुनी और ऊपर कमरे में आये । आकर लंच किया और शाम को ग्रोसरी लेने गये । कल हमें जाना है यलोस्टोन नेशनल पार्क ।

(क्रमशः)

शनिवार, 26 मई 2012

जाने कैसी बात हुई


जाने कैसी बात हुई
उनसे मुलाकात हुई
आँख खुली तो चांदनी भरी
पूनम वाली रात हुई ।

सोचा था न कभी जीवन में
ऐसा भी क्षण आयेगा,
नियमबध्द मेरे जीवन में
जैसे वारदात हुई .।

कांटे, किरचें, कंकड वाली
डगरों से था भरा जीवन
वो क्या मिले, पांव के नीचे
मखमल की सौगात हुई ।

दिन भर की थकान से जैसे
था ये तन मन चूर हुआ
तेज धूप में चलते चलते
बिन बादल बरसात हुई .।

वो क्या आये मन वीणा के
तार सुरों को छेड उठे,
मधुर मधुर सुर गूंजने लगे
महफिल वाली रात हुई ।

काश ये समय मेरे लिये
बस अब यूँ ही ठहर जाये,
मौत भी आज अगर आये
तो कामयाब ये हयात हुई ।

रविवार, 13 मई 2012

पुत्र दिवस


सफर से पूरा थक कर
कल रात घर पे आकर
लेटा जो बिस्तर पर
दबे पांव कमरे में
दाखिल हुई थीं तुम माँ ।

मेरी आँखों से
चश्मा हटा कर
किताब रख मेज पर
ओढना ओढा कर
बालों में हाथ फेर
निहारती रही थीं तुम माँ।

उस स्पर्श ने ना जाने
कितने नये पुराने
जगा दिये अफसाने
जो तेरे मेरे साझे
सदा रहे हैं माँ ।

रात कहानी सुनाना,
फिर लोरी गाना,
पीठ थपथपा कर मेरी
सदा उछाह बढाना
तेरे कारण ही आगे
बढता रहा हूँ माँ ।

चोट जो लगी मुझ को
मरहम उस पे लगाना
मेरे दर्द में आँसू
मेरे साथ बहाना
सदा मेरी खुशियों में
हौले से मुस्कुराना
तुम्हारे सिवा कौन
करता रहा था माँ ।

मातृदिवस तो आज मना रहे हैं सभी
तुमने तो हर दिन पुत्र दिवस ही मनाया
हैं ना माँ ?

ब्र्लॉगर बंधु भगिनियों को सादर नमस्कार ।
कुछ दिनों तक सफर में हूँ कोशिश करूंगी कि ब्लॉग पढती रहूँ ।
पर आप मेरी मजबूरी समझ ही लेंगे और टिप्पणी में देर हुई तो क्षमा भी कर देंगे ।