शनिवार, 26 मई 2012

जाने कैसी बात हुई


जाने कैसी बात हुई
उनसे मुलाकात हुई
आँख खुली तो चांदनी भरी
पूनम वाली रात हुई ।

सोचा था न कभी जीवन में
ऐसा भी क्षण आयेगा,
नियमबध्द मेरे जीवन में
जैसे वारदात हुई .।

कांटे, किरचें, कंकड वाली
डगरों से था भरा जीवन
वो क्या मिले, पांव के नीचे
मखमल की सौगात हुई ।

दिन भर की थकान से जैसे
था ये तन मन चूर हुआ
तेज धूप में चलते चलते
बिन बादल बरसात हुई .।

वो क्या आये मन वीणा के
तार सुरों को छेड उठे,
मधुर मधुर सुर गूंजने लगे
महफिल वाली रात हुई ।

काश ये समय मेरे लिये
बस अब यूँ ही ठहर जाये,
मौत भी आज अगर आये
तो कामयाब ये हयात हुई ।

रविवार, 13 मई 2012

पुत्र दिवस


सफर से पूरा थक कर
कल रात घर पे आकर
लेटा जो बिस्तर पर
दबे पांव कमरे में
दाखिल हुई थीं तुम माँ ।

मेरी आँखों से
चश्मा हटा कर
किताब रख मेज पर
ओढना ओढा कर
बालों में हाथ फेर
निहारती रही थीं तुम माँ।

उस स्पर्श ने ना जाने
कितने नये पुराने
जगा दिये अफसाने
जो तेरे मेरे साझे
सदा रहे हैं माँ ।

रात कहानी सुनाना,
फिर लोरी गाना,
पीठ थपथपा कर मेरी
सदा उछाह बढाना
तेरे कारण ही आगे
बढता रहा हूँ माँ ।

चोट जो लगी मुझ को
मरहम उस पे लगाना
मेरे दर्द में आँसू
मेरे साथ बहाना
सदा मेरी खुशियों में
हौले से मुस्कुराना
तुम्हारे सिवा कौन
करता रहा था माँ ।

मातृदिवस तो आज मना रहे हैं सभी
तुमने तो हर दिन पुत्र दिवस ही मनाया
हैं ना माँ ?

ब्र्लॉगर बंधु भगिनियों को सादर नमस्कार ।
कुछ दिनों तक सफर में हूँ कोशिश करूंगी कि ब्लॉग पढती रहूँ ।
पर आप मेरी मजबूरी समझ ही लेंगे और टिप्पणी में देर हुई तो क्षमा भी कर देंगे ।

मंगलवार, 24 अप्रैल 2012

कुछ और त्रिदल



आधी रात
लगायें घात
चोर और प्रेमी ।

हवा और मन
बिना तन
लगायें दौड ।

किसी के आंसू,
किसी का पसीना,
दोनों पानी ।

नेता और गुंडे
दोनो मुस्टंडे
दोनो लूटें ।

सब बेईमां
बेच के ईमां
दफनाते जमीर ।

जनता बेचारी
झूठ से हारी
करे समझौता

जैसी जनता
वैसा नेता
कितना सच ।

शुक्रवार, 13 अप्रैल 2012

बेटियाँ


गर्मी में खुशबू वाली, हवा सी, ये बेटियाँ,
सर्दी की धूप गुनगुनी जैसी ये बेटियाँ ।

घर में सुरों की तान सी बहती ये बेटियाँ,
हर रोज़ एक कहानी कहती ये बेटियां ।

जीवन के रंग भी और मिठास बेटियाँ,
हर दिन रचती कोई इतिहास बेटियाँ ।

हर घर का रूप, रंग, और लावण्य बेटियाँ,
कोशिश हमारी हो कि हों सम्मान बेटियाँ ।

ममता की मूरती तो होंगी ही बेटियाँ,
बनें अपनी और हमारी ताकत भी बेटियाँ ।

हों देवी शारदा की उपासक भी बेटियाँ,
करें नाम अपना रोशन दुनिया में बेटियाँ ।

बेटों को हम सिखायें मान करना बहन का,
बेटों से कम कहीं नही, होती हैं बेटियाँ।

नज़ाकत तो मिली है सौगात में इन्हे,
बनें खुद ही अपनी रक्षक हमारी ये बेटियाँ

अपनी हो या पराई हर नारी है इन्सान,
बेटी तेरी या मेरी, इक सी है बेटियाँ ।

तब ही प्रगत और सभ्य देश, ये कहायेगा,
निशंक और निडर जब चल पायें बेटियाँ ।

बेटियों को गर्भ में ही मारने वालों,
दुनिया ही मिट जायेगी जो होंगी न बेटियाँ ।

शनिवार, 31 मार्च 2012

राम जन्म

अयोध्या आज हुई है धन्य
दशरथ घर गूंजे मंगल गान,
उपजे पुत्र चार कुल दीपक
अतीत का शाप बना वरदान ।

हर्षित तीनों ही मातायें
सुतमुख देख तृप्त मन-काम
राम, लक्ष्मण, भरत शत्रुघन
आज अवध आनंद को धाम ।

कौशल्या, चकित और विस्मित
प्रगट भये करुणा निधान,
धन्य हुई है कोख आज लगि,
सतजन्म पुण्य का ये वरदान ।

पुत्र जन्म उत्सव नगरी में
जन जन हरषे, मन अभिमान
कौशल्या घर प्रभू प्रगट भये
बालक अति सुंदर अभिराम ।

चर्चा करे नगर नर नारी
नंदन, मनमोहक घन-शाम
देखत मन आनंद से डोलत
तन-मन पुलक, अश्रु अविराम ।

मुदित भये महल भीतर सब
नगर भयो आनंद को धाम
सूरज भी रुक गये दो पहर
क्या ऐसा घटगया अनाम ।

सोमवार, 26 मार्च 2012

६ त्रिदल

सिंदूरी आसमान
तुम्हारी चुनरी
फैली हो जैसे

नीला सागर
भूरी रेत
आंखें और दिल ।

सलेटी काला,
रात का साया
गहराता दुख ।

तारे टिमटिम
कोई तो किरण
रोशनी की ।

लंबी रात
बिना बात
खिंचता मौन ।

सुहानी हवा
भोर के पंछी
आस जगाते ।

शुक्रवार, 16 मार्च 2012

ख्याली पुलाव

नेता जो बेईमान कम होते
लोगों के वे देवता होते ।

छोडते जो पचास प्रतिशत भी
प्रगति में आज हम कहां होते ।

जो लोगों के लिये पुलिस होती,
लोग भी फिक्रमंद ना होते ।

आतंकी पैदा भी तब नही होते
गलत करने से पहले घबराते ।

पढाते शिक्षक जो क्लास में दिल से,
तो कोचिंग क्लास भी कहां चलते ।

पैदावार आती जो सब बजारों में
चीजों के ऊँचे दाम, कयूं होते ।

गोदामों में गेहूं फिर नही सडता
अपने भंडारक ही जो सही होते

सब को जो काम काज मिल जाता
इतने उत्पात तब नही होते ।

न्याय की प्रक्रिया गर आसाँ होती,
इतने अन्याय जग में, क्या होते ?

घूस से काम हम न करवाते
तब तो फिर घूसखोर ना होते ।

ख्याली पुलाव पकाओ मत आशा
इतने सपने, कब, किसके, सच होते ।