शुक्रवार, 24 जनवरी 2014

कुछ और क्षणिकाएँ


एक पत्थर उछाल तो दिया है कस कर
कि करे सूराख उनके ऊँचे महलो में
और झरें उसमें से हमारे प्राप्य,
पर अगर नही कुछ हुआ तो समझ लेना
कि गिध्दों नें दबोच लिया है उसे,
ताकि वे फोड सकें, हमारे जतन से
सेये हुए अंडे, अपनी हवस के लिये।

बहुत चाहते हैं कि तुम्हें मिले सफलता
पहली ही बार में, व्यवस्थापन के नियम की तरह
अगर कर सको, हमेशा सही, हर बार, पहली ही बार
पर मत होना निराश अगर ऐसा न हो,
क्यूं कि असफलता ही सफलता की पहली सीढी है।

वे करेंगे हर कोशिश तुम्हें बदनाम करने की
पर जारी रहे ये संघर्ष, यह मन में रखते हुए
कि बदनाम वही किया जाता है जिसका कोई नाम हो।

स्वार्थों की होड लेकर,
सब से आगे दौड कर
लड रहे हैं वे सारे खास
सिर्फ आम आदमी के लिये।

14 टिप्‍पणियां:

संजय भास्‍कर ने कहा…

पर मत होना निराश अगर ऐसा न हो,
क्यूं कि असफलता ही सफलता की पहली सीढी है।
वेहतरीन ...वाह !!!
हर क्षणिका दमदार....!!

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

आम के लिये जुटे हुये ख़ास।

Kailash Sharma ने कहा…

स्वार्थों की होड लेकर,

सब से आगे दौड कर
लड रहे हैं वे सारे खास
सिर्फ आम आदमी के लिये।
...बिल्कुल सच...सभी क्षणिकाएं बहुत सुन्दर...

sushmaa kumarri ने कहा…

खुबसूरत ख्यालो से रची रचना...

राजीव कुमार झा ने कहा…

बहुत सुन्दर .
नई पोस्ट : स्वर्णयोनिः वृक्षः शमी

राजीव कुमार झा ने कहा…

बहुत सुन्दर .
नई पोस्ट : स्वर्णयोनिः वृक्षः शमी

ओंकारनाथ मिश्र ने कहा…

आपकी यह पंक्तियाँ उन 'ख़ास' के लिए बहुत ख़ास है जो हैं आम के लिए. उन्हें जल्दी सफलता हो औरपूर्ण उद्धार हो पहली बार.

Vaanbhatt ने कहा…

खूबसूरत क्षणिकायें...गणतन्त्र दिवस की शुभकामनायें और बधाईयां...जय हिन्द...

mridula pradhan ने कहा…

bahot achchi......

Suman ने कहा…

स्वार्थों की होड लेकर,
सब से आगे दौड कर
लड रहे हैं वे सारे खास
सिर्फ आम आदमी के लिये।

बिल्कुल सच बहुत सुन्दर...

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

बहुत सुंदर ...बस हौसला बना रहे .....

दिगम्बर नासवा ने कहा…

काहे का आम आदमी ... वो तो कब का खो गया इस दौड़ में पीछे हो गया ...

शिवनाथ कुमार ने कहा…

कड़वी सच्चाई
मगर लड़ना जरुरी है

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

क्यूं कि असफलता ही सफलता की पहली सीढी है।

bilkul sahi ....!!