गुरुवार, 17 सितंबर 2009

घुमक्कडी 7—मोनो रेल और वाइल्ड लाइफ वर्ल्ड



Welcome to my tour of Sydney..वाइल्ड लाइफ वर्ल्ड, मोनो रेल (विडिओ देखें)Vdo Wel

मेरा बहुत मन था तोरंगा चिडिया घर देखने का जहां ऑस्ट्रेलिया के खास पक्षी शुतुरमुर्ग (इसमे से ऑस्ट्रिच तो अब यहां से लुप्त हो गये हैं पर एमू और कॉसावरी हैं) और मोनोट्रीम्स यानी अंडे देने वाले मेमल्स देखने को मिलते, पर टिकिट की कीमत देखी तो 49.50 डॉलर प्रतिव्यक्ति, इससे तो हमारा सारा बजट ही गडबडा जाता । हमें हमारी बस में दो लोकल लेडीज़ भी मिल गईं जिनसे इस बारे में हमने काफी पूछताछ की । उन्होने बडे जोर देकर कहा कि अगर ऑस्ट्रेलिया आकर झू नही देखा तो फिर क्या किया । उन्होने ये भी बताया कि और पक्षियों के लिये आप बर्ड वॉचिंग ट्रेल पर जा सकते हो । घर आकर इस पर बडा सोच विचार हुआ सिडनी के पेम्फ्लेट दुबारा छाने गये तो पता चला कि वाइल्ड लाइफ वर्ल्ड देख सकते हैं वहां हमें कांगारू, एमू (शुतुरमुर्ग ) तथा ऑस्ट्रेलिया के और भी खास प्राणी देखने को मिल जायेंगे ।
तो सर्कूलर-क्वे तो जाना ही था वहीं पास ले ही मोनो रेल मिलती और वाइल्ड लाइफ वर्ल्ड का भी पता चल जाता । तो यही तय कर के सोये कि वहां जाकर तय करेंगे । मोनो रेल तो जाना ही जाना है
यहां भी हमारी नींद जल्दी खुल जाती थी और हम रात को 8-9 बजे तक मुश्किल से जागते । सुबह 3 3-1/2 प्रकाश और सुहास उठ जाते और पहली चाय बना कर रखते । तो सब लोग चार बजे तक जग गये और चाय भी पी ली । फिर थोडी गप शप के बाद सब लोग अपने अपने कामों में लग गये जयश्री के पास सैन्डविचेज़ बनाने का चार्ज होता था मैं सब्जी दाल बनाकर रख देती । रोटियां थीं ही बनी बनाई तो रात के खाने तक का जुगाड हो जाता । तो सब वैसे ही किया और फिर 9 बजे तक हम लोग निकल लिये । आज भी ट्रेन नही चलने वाली थी तो मुफ्त बस की सेवा का लाभ उठाया । पहुंच गये विनयार्ड । फिर पैंया पैंया चल कर गये सरक्युलर क्वे । वहां जा कर पता चला मोनो रेल यहां से नही चलती वह तो टाउन हॉल के पास से मिलेगी । फिर चल पडी हमारी पलटन, पर सिडनी देखने का मज़ा आ गया । एक से एक बिल्डिंग्ज, तसवीरें लेते हुए जी नही भर रहा था । तो चलते गये और रुक रुक कर तस्वीरें भी लेते गये और आखिर कार मोनो रेल के स्टेशन भी पहुंचे । vdo1(विडिओ देखें)

स्टेशन के साथ ही खूब सारी दुकानें थीं खिलौनों की कपडों की तो सबने अपने अपने नाती पोतों-पोतियों के लिये कंगारू खरीदे और कपडे भी। सुहास नें और भी कुछ खरीदारी की ।vdo2 (विडिओ देखें)

स्टेशन पर पता चला कि एक बार टिकिट ले कर आप इस रेल में जितनी मर्जी चक्कर लगा कर सिडनी (डाउन-टाउन) देख सकते हो पर एक बार उतर गये तो फिर दुबारा टिकिट लेना होगा ।vdo3 (विडिओ देखें)

तो तय किया कि दो चक्कर तो लगाना ही है फिर बोर हो गये तो उतर जायेंगे । डार्लिंग हार्बर पर आखरी में उतरेंगे वहीं से लिविंग वर्ल्ड जाना है । तो टिकिट लेकर स्टेशन के अंदर पहुँचे और ट्रेन भी तुरंत आ गई पर भीड थी और हमें तो जरूरत थी 6 खाली सीटों की तो दो ट्रेन छोडने के बाद तीसरी ट्रेन के आखरी डिब्बे में हमारे मन मुताबिक जगह मिल गई । ये स्टेशन था सिटि सेन्टर ।vdo4 (विडिओ देखें)

ट्रेन चली और हम सिडनी शहर को ऊँचाई से देख रहे थे । बडी बडी ऊँची बिल्डिंग्ज़ के ऊंचे मालों को हम सामने से देख रहे थे और सिडनी टॉवर भी बहुत साफ नजर आया । एक चक्कर लगा कर पता चल गया कि रेल कोई 6-7 स्टेशन घुमाती है । विक्टोरिया, पैडीज़ मार्केट, चायना टाउन, हार्बर साइड, वर्ल्ड स्वेअर और डार्लिंग पार्क जहां हमें उतरना था । बीच में एक स्टेशन पर एक परिवार चढा साथ में दो प्यारे से बच्चे भी थे उनमें से एक तो काफी बातूनी था और सुहास के साथ उसकी अच्छी दोस्ती हो गई थी । (विडियो) vdo5 (विडिओ देखें)

हमे तो एक और चक्कर लगाना था तो बैठे रहे और एक बार फिर से घूम कर फिर डार्लिंग पार्क उतरे । यह काफी सुंदर जगह है समुद्र के किनारे, समुद्र या नदी किसी शहर या गांव की शोभा वैसे ही दुगनी कर देते हैं और वह साफ सुथरी हो तो क्या कहने । इस प्राकृतिक सौंदर्य के अलावा मानव निर्मित भी बहुत कुछ है यहाँ । वॉटर वर्ल्ड, वाइल्ड लाइफ, रेस्तराँ, म्यूजियम्स, बच्चों की ट्रेन, पार्क और चलने के लिये समुंदर के किनारे किनारे वॉक ट्रैक ।
तो यह सब देखते हुए पहुँचे वाइल्ड लाइफ वर्ल्ड । यह और वॉटर वर्ल्ड पास पास ही हैं । टिकिट का पता किया तो यहां झू से थोडा कम यानि 34 डॉलर का था टिकिट । सुहास ने कहा कि जयश्री और तुम देख आओ हम यहां बाहर घूमते हे वैसे भी मैं इतना चल नही पाउंगी और फिर पास के रेस्टॉरेन्ट में मिलेंगे तुम दोनो से ।
मेरा तो बिना कुछ देखे जाने का बिल्कुल मन नही था तो मै तो फट् से राजी हो गई । और इस तरह मै और जयश्री टिकिट के लाइन में लग गये । बहुत बुरा लग रहा था खुदगर्जी पर । किन्तु कोई भी ना देखे इससे तो अच्छा था हम देखें थोडा शूट करें और सबको दिखायें ।
टिकिट लिया और अंदर । पहले तो तरह तरह की तित्तलियां थीं (मोनार्क तितलियां भी ) उन्हें देखा और आगे बढ गये वैसे भी यहां भीड बढाने के लिये काफी मर्द थे । फिर देखा दुनिया का सबसे बडा कॉकरोच और एक काली भयंकर मकडी बडी जहरीली । बहुत सारी मधुमख्खियां , vdo6 (विडिओ देखें)

दीमक वगैरा वगैरा पर एक जगह रुकना पडा, वहाँ थे स्टिक इनसेक्ट्स, हरे रंग के ये टिड्डे की तरह के कीडे पेड की डालियों से ऐसे लटके हुए थे मानो पत्तियां हों आप भी देखें (विडियो) । vdo7 (विडिओ देखें)

फिर नॉक्टर्नल यानि रात में घूमने फिरने वाले जानवर । यहां चमगादड, खास तरह के चूहे , उल्लू ग्लाइडर और भी कुछ कुछ जीव थे । मैने डार्क सेटिंग पर कुछ शूटिंग करने की कोशिश तो की है आप बतायें कि कुछ दिखा भी ।
फिर देखे तरह तरह के सांप अजगर भी और एक लाल कॉलर लगाये छिपकली ये इसका इस्तेमाल अपने शिकार को डराने के लिये करती है वरना उसको कुत्ते के कानों की तरह लटका कर रखती है नही रखता है । और थी एक दो मुँही छिपकली, इसे छिपकली कहना इसका इन्सल्ट ही होगा । मुँह तो असल में एक ही होता हे पर पूंछ भी सर की तरह ही दिखती है । यह भी शिकार पकडने की सहूलियत के लिये ही है, आप भी देखें अजूबा । जब यह चलती है तभी सिर पैर का पता चलता है । बडे बडे मगरमच्छ भी देखे ।
अगले सेक्शन के लिये एक टनल में से गये और फिर एकदम रोशनी में और वहां देखे कांगारू इनके पेट पर एक थैली होती है मार्सूपियम जिसमें मादा छोटे छोटे बच्चों को रखती हैं। आतंम-निर्भर होने तक यहीं इनका लालन पालन होता है । इनके पिछले पैर और पूंछ काफी मजबूत होती है और ये छलांगे लगा कर चलते हैं । इसी तरह के होते है वालाबी भी पर ये पहाडी इलाके में रहते हैं और ऊबड खाबड जगहों में भी बखूबी छलांगे लगाते हैं । vdo8 (विडिओ देखें)

फिर पहुंचे रंग-बिरंगे तोते देखने जिनको किंग पैरट कहते हैं किसी का सिर नीला तो किसी का लाल पर हरा रंग सबका । कुछ तो इतने ढीठ ते कि हाथों पर चढ कर खाना ले लेते थे । यहाँ और बी तरह तरह के पक्षी ते जो आप विडियो में देख सकते हैं । यहां से बाहर एक बार फिर दिखे कंगारू । फिर आये कॉसावरी यानि शुतुरमुर्ग, सबसे बडा पक्षी । बहुत तेज भाग सकता है, देखने में बडा सुंदर पर अकडू लगता है ।vdo9 (विडिओ देखें)

वोम्बाट भी देखे जो छोटे से सुअर की तरह दिखते हैं देखने में मोटे ताजे पर काफी तेज भाग सकते हैं ।
अंत में आये क्वाला जी ये भी कंगारू के जात भाई हैं पर दिखते हें छोटे से भालू की तरह हम पहुंचे तो महाशय पेड पर चढे हुए थे और वहीं से करतब दिखा रहे थे । देख दाख कर बाहर निकले तो सबका लंच हो चुका था तो लंच किया गरम चॉकलेट दूध पिया और सबको कहानियां सुनाईं वाइल्ड लाइफ वर्ल्ड की । इसके पहले कंगारू के स्टेचू के साथ फोटो भी खिंचवाई । (विडियो) फिर वापिस वायनार्ड और बस से वायतारा और घर ।

(क्रमश:)

8 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

बढ़िया यात्रा संस्मरण आभार . आपकी पोस्ट के माध्यम से बहुत कुछ जानने का अवसर मिला . आभार.

Arun ने कहा…

Just install Add-Hindi widget button on your blog. Then u can easily submit your pages to all top Hindi Social bookmarking and networking sites.

Hindi bookmarking and social networking sites gives more visitors and great traffic to your blog.

Click here for Install Add-Hindi widget

Pankaj Oudhia ने कहा…

हमेशा की तरह रोचक वर्णन। आप कभी छत्तीसगढ आयेंगी तो आपको ऐसी ही जैव-विविधता के दर्शन करायेंगे, बिना टिकट के।

Abhishek Ojha ने कहा…

इतना डिटेल तो मैं जिस जगह पर घूम के आता हूँ वहां का भी याद नहीं रहता :)

शोभना चौरे ने कहा…

ashaji
bahut aannd aya aapke sath ghumakar .
bahut hi mehnat se aap post taiyar karti hai |bdhai
abhar

Gyan Dutt Pandey ने कहा…

वाह, वाह, आपने देखा भी खूब और दिखाया भी खूब। हम तो यह सब वैसे देख न पायेंगे पर आपके माध्यम से देख जान गये। देखने और पढ़ने की जुगल बन्दी तो और भी शानदार रही।
धन्यवाद।

मुकेश कुमार तिवारी ने कहा…

आशा जी,

सिडनी की सैर की आपके संस्मरण के साथ। हांलाकि वीडियो अभी नही देखे हैं, रात देखूंगा। बड़ा ही रोचक वर्णन जो चित्र खींच देता है पढ़ते-पढ़ते।

सादर,


मुकेश कुमार तिवारी

निर्मला कपिला ने कहा…

bahut badiyaa saMsmaraN hai kich din se computer me problen aa rahee hai is liye vedio bhee acchee tatah naheen dekh paaI thheek hote he dobara aati hoon shubhakaamanaayen