सोमवार, 29 अक्तूबर 2007

....विश्वास




न तुम मेरे झोंपडे को राख करो,
न मैं तुम्हारे महल बे-चिराग करूं ।
न तुम मेरे मुंह से निवाला छीनो,
न मैं तेरे बच्चों को रहन रख लूं ।
न तुम मेरे बहनों की चूडियाँ तोडो
न मैं तुम्हारे घर पे आसमाँ तोडूं ।
न तुम हम जैसों पे कहर बरपाओ
न मैं तुम्हारे सुख चैन को हराम करूं ।
न तुम सुनों मौका-परस्त की बातें
न मैं ही उसके इरादों को अंजाम करूं ।
आ गया वक्त समझ लें हम इनकी चालों को
तुम मेरा ख्याल करो, मैं तुम्हारा ख्याल करूं ।
न तुम दो साथ सियासत करने वालों का
न मैं इनकी बातों का एतबार करूं ।
तुम जीओगे और हम को भी जीने दोगे
क्या मैं अब इस बात का विश्वास करूं ।


आज का विचार
कोई कमजोर इन्सान किसी को माफ नही कर सकता
क्यूंकि माफ करना तो एक ताकतवर इन्सान का गुण है ।

स्वास्थ्य सुझाव
आधे कप लौकी के रस में आधा चम्मच अद्रक का रस मिलाकर
इसे 6 ब्राम्ही के पत्ते और बारा तुलसी के पत्तों के साथ पीने से
भूलने की बीमारी (अलझाइमर्स) में लाभ पहुँचता है ।
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