सोमवार, 22 अक्तूबर 2007

आगे चुकता करें




हाल ही में मैने एक मूवी देखी, नाम था Pay it Forward , बहुत ही पसंद आई । आप में से भी बहुत लोगों ने देखी हो शायद । कहानी मै यहाँ नही बता रही । उसकी जो थीम थी वह कुछ इस प्रकार थी । क्या ये दुनिया आपको अच्छी लगती है , अगर नही तो आप इसको अच्छी बनाने लिये क्या कर सकते हैं । और इसको कार्यान्वित करने के लिये आपका प्लान क्या है ? स्कूल की ७वी कक्षा में एक छोटासा लडका एक प्लान कक्षा के सामने रखता है । इसके अनुसार वह तीन लोगों की मदद करेगा ताकि उनकी जिंदगी कुछ आसान हो । और बदले में वे तीनों लोग ओर तीन तीन लोगों की मदद करेंगे जिससे उनकी जिंदगी की समस्याएं सुलझे और यह क्रम इसी तरह चलता रहा तो दुनिया अच्छी हो जायेगी ।
बचपन में हम सबको बताया गया था कि जो आपकी मदद कर रहा है उसका ऋण चुकाने का मौका आपको मिल जाये तो आप किस्मत वाले हैं पर अक्सर ऐसा होता नही है । इसलिये आप को जब भी मौका मिले किसी असहाय की मदद अवश्य करें । पर ये तो और भी अच्छा है कि यह कडी शुरू ही आपसे हो । यह मदद कुछ भी हो सकती है मसलन, भूखे को खाना खिलाना, किसी को गाडी या स्कूटर पे लिफ्ट देना, किसी को पिटनेसे बचाना, किसी की स्कूल की फीस भरना, घायल को अस्पताल पहुँचाना आदि । और इसकी बारंबारता (Frequency) आप पर निर्भर है । रोज़, हफ्ते में, या फिर महीने में या सालमें । लेकिन जो भी आप तय करें उसे निभायें । मदद छोटी भी हो सकती है और बडी भी सब आपकी क्षमता पर निर्भर है ।
बहुत बार ऐसा भी हो सकता है कि आप कामयाब न हों जिसकी मदद आप करना चाहते हैं वह आपकी मदद ना ले या आप ठीक से कर ना पायें या आप करें पर कामयाब न हों, पर सही कदम उठाना जरूरी है और इसे उठाने से आप के अंदर एक संतोष भर उठेगा । और जरूरतमंद तो कई हैं । एक ढूंढो तो हजा़र मिलते हैं । हालाँकि जरूरी है कि इसकी जरूरत असली हो और यह आपके,“ आगे चुकता करने” के प्लान को आगे बढाये । और तीन बार कामयाबी हासिल करना बहुत कठिन नही होगा । एखाद बार हो सकता है कि जिसकी आपने मदद की वह धोखेबाज़ निकले पर वह आपकी नही उसकी परेशानी है और कोशिश करने में और करते रहने में क्या हर्ज है ?
और हम ये आसानी से कर सकते हैं । इसके लिये चाहिये होगा सिर्फ दृढ निश्चय और आत्मविश्वास ।

7 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत जरुरी और सुन्दर संदेश देती मूवी और आपकी पोस्ट. बहुत बधाई इस ढ़ंग से इसे प्रस्तुत करने के लिये.

Gyandutt Pandey ने कहा…

जीवन तो यज्ञ है। इसमें अपनी आहुति देने पर ही फल लेना चाहिये। जो अपना कण्ट्रीब्यूशन न कर केवल लेता जाता है - वह चोर है।
इसे लोग समझ लें तो विश्व स्वर्ग हो जाये!

मीनाक्षी ने कहा…

सत्य वचन... चाहे तो हम बहुत कुछ कर सकते है बस पहला कदम उठाने की देर है..

अनिल रघुराज ने कहा…

देने में जो सुख है वह लेने में नहीं है। लेना आपको संकुचित करता है, जबकि देना आपको विस्तृत करता है। अच्छी प्रेरणास्पद मूवी देखी आपने और उससे भी अच्छी बात है कि आपने उसके संदेश को हम लोगों से शेयर किया। धन्यवाद...

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

आप सबका अनेकानेक धन्यवाद मेरा उत्साह बढाने के लिये । ऐसे ही कृपा बनाया रखिये ।

आलोक ने कहा…

पे इट फ़ॉर्वर्ड मैंने भी देखी थी, कई साल पहले। वैसे मेरा अनुभव है कि फ़्रांसीसी फ़िल्में सोचने के दायरे को काफ़ी बढ़ाती और बदलती हैं, हिंदी व हॉलीवुडीय फ़िल्मों में हमें लगभग पता ही होता है कि आगे क्या होने वाला है। बस चक्कर यह है कि उन फ़िल्मों के नाम नहीं याद रहते, पर याद आए तो आपको बताऊँगा।

कारवॉं ने कहा…

कथा प्रेरणादायक है दीपावलीवाली कविता भी अच्‍छी लगी