बुधवार, 24 अक्तूबर 2007

.....रात और सुबह....



लेकर अनूठी बारात, चली तारों भरी रात
चांदसा दूल्हा, साँवली दुलहन
मंद मंद सुगंधी पवन
नया जोडा, दूधिया चांदनी,
शर्मीली दुलहन, रात मन मोहनी
साथ साथ ले हाथों में हाथ
दूल्हा दुल्हन बिछायें बिसात
सुबह तक चले फिर खेल
जबतक न बैठे हार जीत का मेल
मेरी हुई जीत या तुम हारे
दोनो सोचते रहे बिचारे
थक कर सो गई रात
चांद भी लुढका देने साथ
सुबह जब आई
कर दी सारी सफाई


आजका विचार

आप कभी भी उतने ज्यादा दुखी या खुश नही होते जितना आप सोचते हैं।


स्वास्थ्य सुझाव

तुलसी के काढे से तनाव दूर होता है ।
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