शनिवार, 1 अगस्त 2009

माँ की खबर

चलना है चलते ही जाना है दस कोस
मां की खबर मिली है,
किसी किसी गांव से होकर
उस तक पहुँची है आज ।
भीमा कहता है, छोटे को
लेकर चली जा तू, मैं देख लूंगा बच्चों को
माँ की हालत कहीं ज्यादा न बिगड़ गई हो ।
चल रही है वह टूटी फूटी आधी अधूरी खबर के सहारे
गाँव, खेत, जंगल पार करती । सोचती है कब मिली थी आखरी ।
अचानक एक गांव में झुग्गियाँ नजर आती हैं उसके अपने लोगों की
यहीं होगा शायद भाई का झोंपडा ।
पूछती पूछती अचानक पहुँचती है एक उखडे पाल के पास
कुछ पहचान की निशानियाँ देख कलेजा धक से रह जाता है
फूट फूट के रो पडती है, कैसे चली गई री , मेरी बाट नही जोही ।
आँखों से आंसू की नदी बह निकलती है ।
पता चलता है पिछले बुध को ही चली गई माँ,
भाई भी पाल उखाड कर चला गया ।
हताश, बच्चे को छाती से चिपकाये
चलने लगती है सावरी, उलटी दिशा में पांव खींचते हुए ।

और मै सोचती हूँ कि जब मेरे माँ के जाने की खबर आई थी
तो दूरी से विवश मैं, न जा सकी न आँसू ही बहा सकी,
पैसे की गरमी से सूख जो गये थे ।

16 टिप्‍पणियां:

M VERMA ने कहा…

बहुत ज़ज्बाती रचना
मार्मिक भी

श्यामल सुमन ने कहा…

संवेदना से भरपूर रचना।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

शोभना चौरे ने कहा…

mere blog par aane ke liye dhnywad.
हताश, बच्चे को छाती से चिपकाये
चलने लगती है सावरी, उलटी दिशा में पांव खींचते हुए ।

और मै सोचती हूँ कि जब मेरे माँ के जाने की खबर आई थी
तो दूरी से विवश मैं न जा सकी न आँसू ही बहा सकी
पैसे की गरमी से सूख जो गये थे ।
maa ke jane ka dard ka ahsas sman hi hota hai .
bhut marmik ankho me nami de gai aapki rachna.

vikram7 ने कहा…

संवेदना युक्त मार्मिक रचना

Pankaj Upadhyay (पंकज उपाध्याय) ने कहा…

deadly ending di hai aapne...

तो दूरी से विवश मैं न जा सकी न आँसू ही बहा सकी
पैसे की गरमी से सूख जो गये थे ।

wahh

विवेक सिंह ने कहा…

मार्मिक रचना !

Vinay ने कहा…

हृदय में बहते रक्त सी कविता
------
विज्ञान । HASH OUT SCIENCE

बेनामी ने कहा…

sundar

daanish ने कहा…

अच्छी ,,,
एहसासमयी ,,,
भावुक रचना .
हर शब्द ...कहीं गहरे उतरता है

---मुफलिस---

sandhyagupta ने कहा…

Atyant sanvedansheel.Shubkamnayen.

निर्मला कपिला ने कहा…

बहुत मार्मिक रचना है मुझे अपनी बेती याद आ गयी जो विदेश मे है शयद कभी उसको भी ऐसे ही सोचना पडे आँख नम हो गयी आभार्

Unknown ने कहा…

khubsurat bhav

स्वप्न मञ्जूषा ने कहा…

hridaysparshi..
samvedansheel rachna..
padha, man ko chuu gayi aapki rachna..

vijay kumar sappatti ने कहा…

asha tai ;

amhaala shabd nahi bhette ,ya poem saathi ... main kya kahun , meri aankhe bheeg gayi hai ..tai ,hi kavita mala aaj pakka udaas karun geli ...

aabhar

vijay

pls read my new poem "झील" on my poem blog " http://poemsofvijay.blogspot.com

बेरोजगार ने कहा…

धन्यवाद आप लोगों का की मेरे विचार आप को पसंद आये. "गुरु बहन" आपका आभारी रहूँगा मैं की आप ने टिप्पणी से नवाजा मुझे.

Virag S ने कहा…

bahut sunder----------main ro diya ek baar ko ise padh kar-----ki kahin mera bhi yahi bhavishya na ho.