बुधवार, 19 अगस्त 2009

घुमक्कडी-१


पिछले तीन चार सालों से सुहास की बदौलत हमारा कहीं न कहीं घूमना अक्सर तय रहता है। सुहास ही दिसंबर से सब प्लान कर लेतीं हैं। होटल या अपार्टमेन्ट,टिकिटस् सब तैयार होता है । और तो और बच्चों से बात करके हमारा कॉन्ट्रिब्यूशन भी वह उनसे ले चुकी होतीं हैं । हमारे लिये सिर्फ घूमना और उसका आनंद उठाना ही रह जाता है जो बहुत ही आसान है ।
हर साल की तरह हमारा छह लोगों का घूमने का प्रोग्राम 1जुलै को शुरू हो गया है । मैं, सुरेश,प्रकाश,जयश्री सुहास और विजय सब के सब साठ से ऊपर । इस बार प्रोग्राम न्यूजिलैन्ड तथा ऑस्ट्रेलिया का है पर शुरू तो सुहास तथा कुसुम ताई के घर कुछ दिन बिताने के बाद ही हुआ इस बार 4 जुलै को हम कुसुम ताई के यहाँ थे ब्लैक्सबर्ग में वहाँ पर आतिशबाजी देखना बहुत ही आसान था घर के पिछवाडे में ही पडौसियों के साथ फोल्डिंग कुर्सियाँ चादर वगैरा लगा कर आराम से देख पाये आप भी आनंद लें (विडिओ देखें)

। 6 तारीख को प्रकाश और जयश्री भी सुहास के साथ आये हमने दाल बाटी और भुनी सब्जियों का कार्यक्रम बनाया, भारतीय लोगों की यही खासियत है कि उनके कार्यक्रमों में खानापीना हमेशा सेन्ट्रल रहता है । और हाँ जैसे कि हम सब के इकठ्ठा होने पर तय है, सत्यनारायण जी की पूजा और कथा भी हुई ।
हमारा प्रोग्राम यू एस में कोलंबस का भी था । हमारे भांजे भतीजियों में इस साल उल्का का निमंत्रण था । उल्का कोलम्बस (ओहायो ) मे रहती है और हॉन्डा में इन्डस्ट्रियल इंजीनियर है । तो आजकल उसके यहाँ हैं । उसके पतिदेव जिम विल्सन घर बनाते हैं और एंटीक चीजों के बहुत शौकीन हैं । अपने घर में बहुत सी चीजें उन्होने ही बनाई हैं । मसलन डेक, स्क्रीन रूम, बेसमेन्ट आदि । आज उल्का का जन्म दिन है । हम सब को संकट चौथ का उपवास है इसीलिये शाम को उडीपी में जाने का प्रोग्राम है । उल्का के दो प्यारे से बच्चे हैं अलेक्झेंडर और तारा । दिन में सब ने उपवास में चलने वाली साबूदाने की खिचडी खाई । खाना पीना होने के बाद दोपहर में जब हम मूवी देख रहे थे और उल्का अपने कमरे में चली गई तो उसकी दस साल की बेटी तारा किचन में खटर पटर कर रही थी । पता चला माँ के लिये केक बनाया जा रहा है । पूछा कुछ मदद चाहिये, तो बोली नही मै कर लूंगी मुझे आता है । छोटी सी बच्ची का माँ के लिये प्यार देख कर बहुत अच्छा लगा, और ताज्जुब हुआ उसका आत्मविश्वास देख कर । शाम को उडीपी में जा कर सब लोगों ने दक्षिण भारतीय खाने का मज़ा लिया । घर आने के बाद तारा का बनाया केक उल्का ने काटा और सबने केक खाया (विडिओ देखें)

दूसरे दिन उल्काने जापानी खाना बनाया नूडल्स तथा किमपाप । किमपाप एक सुशी की तरह का ही व्यंजन है इसमे जापानी स्टिकी राइस में काले तिल मिलाकर उसे खूब नरम कर लेते हैं और फिर उसे एक छोटी सी चटाई पर समुद्री काई नीचे रख कर उसपर फैला देते हैं और उसके अंदर मछली या फिर गाजर, ककडी या उबले अंडे भर कर रोल बनाते हैं और इस रोल के छोटे छोटे स्लाइस बनाकर पेश किया जाता है तथा सोय सॉस के साथ खाते हैं । (विडिओ देखें)

शाम को हमने उल्का के लिये तीन चार सब्जियां बन। दी और उसने उन्हे छोटे छोटे डिब्बों में पैक कर के फ्रीज़ कर दिया कि जब उसका मन हो वह खा सके क्यूं कि उसके पति जिम तो अमेरिकन खाना ही खाते हैं और बच्चे भी । तारा को कभी कभी भारतीय खाना पसंद है ।
इसके पहले जिम ने हमें अपना एंटीक कलेक्शन दिखाया जो उन्होनें जापान से लाया था । जापानी बक्से, लेखन का दराजों वाला टेबल और किमोनो के बक्से तथा एक खूबसूरत स्क्रीन । हर चीज का इतिहास तथा समय की भी जानकारी दी । (विडिओ देखें)

कल हमें वापिस जाना है मार्टिन्सबर्ग, तो शाम को पिज्झा का डिनर था ।
दूसरे दिन सुबह निकले और छह –सात घंटे की ड्राइव के बाद पहुंचे मार्टिन्स बर्ग । कल शाम खिचडी खाई । आज सुबह नान और आलू टमाटर का साग तथा शाम को पावभाजी का प्रोग्राम था । दो दिन में तैयारी करके हमें अपने ऑस्ट्रेलिया-न्यूज़ीलेन्ड टूर पर निकलना है वॉशिंगटन से लॉस एन्जेलिस
और फिर ऑकलेन्ड । कल निकलना है । फ्लाइट 2 : 56 पर है । आज फाइनल पैकिंग करना है । रातको सैंडविचेज़ भी बनाकर रखना है ताकि सुबह सिर्फ खाने का काम बाकी रहे ।
(क्रमश:)

12 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

बस ऐसे ही घूमें. आनन्द लें. और हमें सुनाते घुमाते चलें.!!

निर्मला कपिला ने कहा…

आपकी नज़रों से हम भी दुनिया घूमने का आनन्द ले रहे हैं बहुत सुन्दर पोस्ट है बधाई और शुभकामनायें

रंजू भाटिया ने कहा…

वाह सही है यह तो ..आप हमें अपने लिखे से यूँ ही घुमाते रहे

mehek ने कहा…

khup chan varnan,ghar baslya firti jhali;):),yatre sathi khup sarya shubhecha.

Mumukshh Ki Rachanain ने कहा…

बस ऐसे ही घूमें. आनन्द लें. और हमें विडियो क्लिप यूँ ही दिखाते रहे.

बधाई जानकारियों के लिए.

Randhir Singh Suman ने कहा…

nice

जितेन्द़ भगत ने कहा…

घूमने के नाम पर और खाने के नाम पर मेरे मुँह में पानी आ जाता है और आज तो यहॉं दोनों ही चीजें मौजूद हैं:)

Vinay ने कहा…

आपका यात्रा वृतांत सुनकर हम भी आनंदित हो रहे हैं।
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मानव मस्तिष्क पढ़ना संभव

शोभना चौरे ने कहा…

ashaji
bhut acha lag rha hai aapke sath ghumna .mujhe aapki sadgi aur shjta
bhut prbhavit karti hai .
abhar

akshaya gawarikar ने कहा…

Thanks for visiting urdumadeeasy.blogspot.com ,
its my effert to compile whetever little i know and a better way of passing time.keep visiting.

Pankaj Upadhyay (पंकज उपाध्याय) ने कहा…

to aapkee ghumayee chal rahee hain aur aap jo bhi khano ke naam le rahi hain na, sabse muh mein paani aa raha hai :)

dal baati waaah..muh bhar aaya :) ab ye na samjhiyega besharm hoon :)

अजित वडनेरकर ने कहा…

ताई,ये पहली किस्त अभी अभी पूरी की है...आपके साथ ज़रा और घूम लूं फिर टिप्पणी करता हूं।
मेरे लैपटाप पर वीडियो चल ही नहीं रहा है..