सोमवार, 10 अगस्त 2009

इतिहास की बातों को

ऊँचा कद देख किसी का, न तुम जलो
अपनी अपनी औकात है, मान के चलो ।
इतिहास की बातों को इतिहास में रखो
वर्तमान में ही करके कुछ, दिखायें चलो ।
बीती सो बात गई, अब उस पे क्या रोना
एक राह नयी मिल के सब बना लें चलो ।
कहने वाले तो कुछ कह के रहेंगे
तुम उनकी बात को, अनसुना कर चलो ।
सरकार को निकम्मा कह कह के थक गये
अब अपनी गिरेबान ज़रा झाँक कर चलो ।
जबाँ चलाने के लिये लगता नही ज़ोर
मेहनत के लिये हो गर तैयार, तो चलो ।
एक ठान ली है जब, तो उसी राह पर बढो
बाधायें तो आयेंगी, पर पार कर चलो ।
ऐसे दिन की फिर सुहानी ही होगी रात
आयेगी सुख की नींद ये बात मान लो ।
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