शुक्रवार, 15 अगस्त 2008

राखी

आज हिंदु केलेंडर के हिसाब से इस ब्लॉग को एक बर्ष पूरा हुआ । पहली कविता भी राखी पर ही थी और उस पर उन्मुक्त जी की टिप्पणी पाकर बहुत खुशी हुई थी । पूरे साल आप सब ब्लॉग मित्रों का जो स्नेह मिला है उससे बहुत ज्यादा खुशी मिली है मुझे । यही स्नेह बनाके रखें.


भैया तुम राखी पे आते,
कितने बीते सावन हम तुम फिर दोहराते । भैया...

यादों के वे मधुर मधुर स्वर
अपनी अपनी आवाजों में उनको गाते
फिरभी हम कोई बडे गवैया नही कहाते ।भैया...

वो बचपन का छोटा आंगन
आंगन की छोटी फुलवारी
फुलवारी में शायद कुछ कुछ हम तुम बोते ।भैया..


खेल खेल में हँसना रोना
गुस्सा करना और मनाना.
कितने कितने हंगामें तो दिन में होते । भैया...

वो थाली वो दीपक रोली
वो राखी कुछ चमकी वाली
बांधती मैं और तुम जवरन रुपए रख देते ।भैया...

ऱाखी पर अब मिल नही पाते
पर यादों के कितने सोते
इस मनमे अक्सर कल कल कल
बहते रहते । भैया....
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आज का विचार
मुसीबत के हर पहाड के सामने कोई न कोई
चमत्कार जरूर होता है बस प्रयत्न पूरे होना चाहिये ।
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स्वास्थ्य सुझाव
दुबले पतले लोगों को वजन बढाने और स्वस्थ रहने के लिये
१ कटोरी अंजीर , १ कटोरी खूबानी, १ कटोरी बादाम और आधी कटोरी मिश्री
टुकडे कर के एक डिब्बे में रख लें दिन में ३ बार खाय़ें ।
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