शनिवार, 9 अगस्त 2008

पंद्रह अगस्त

पात हरे,पातों के बीच रंगबिरंगे
फूल खिले चटखीले, लहरायें ज्यूं तिरंगे
फूल कुछ सफेद और हैं कुछ नारंगी
जैसे धरती माँ की चुनरी हो तिरंगी

ये तो धरा की छवि, और आसमाँ है नीला
और नीले आसमाँ पे सूरज कुछ पीला
पीले सूरज को ढकने आये कुछ बादल
कुठ ऊदे, कुछ सफेद, कुछ काले काजल


जगह जगह झंडे पताकाएँ फहराते
बच्चे कुछ शरमीले, कुछ गीत गाते
भारत माता का ये अर्चन करते हैं
और वीरों का उसके वंदन करते हैं

याद किये जाते हैं वीरों को अपने
जिन्होंने कभी देखे और सच किये सपने
करते हैं प्रतिज्ञाएं कि बनेंगे वीरवर
जियेंगे वतन के वास्ते मरेंगे तो वतन पर

देख कर ये जश्ने आजादी आँख भर आई
अपना देश तो अब सुरक्षित है भाई
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