शनिवार, 19 जनवरी 2008

कभी नही सोचा था

कभी नही सोचा था
आँख से निकलेंगे आँसू ऐसे
गर्म पानी का कोई सोता हो जैसे
रुकने का नाम ही नही लेते हैं
बस बहते ही जाते हैं

कभी नही सोचा था
तुम दोगे मुझे इतना दर्द
ये रिश्ता हो जायेगा इतना सर्द
जिसमें थी कभी ऐसी गर्माहट
बिन देखे पहचानते ते आहट

कभी नही सोचा था
मै पड जाउंगी इतनी अकेली
तुम ही तो थे मेरे सखा सहेली
अब जो मुँह तुमने फेर लिया है
मुझे तनहाई ने घेर लिया है

कभी नही सोचा था
प्यार की बली चढेगी
विवाह की वेदी पर
आँखें बनेंगी बस
आँसुओं का घर
कभी नही सोचा था


आजका विचार

वैयक्तिकता को जो भी कुचले वह तानाशाह ही है ।

स्वास्थ्य सुझाव

झांईदार और मुहाँसे वाली त्वचा पर आलू के स्लाइस पर छाछ लगा कर हफ्ते में तीन बार मले ।
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