सोमवार, 7 जनवरी 2008

तकलीफें

तकलीफें तो सदा रहेंगी
तकलीफें जीवन का हिस्सा
आँसू और हँसी से लिख्खा
जाता हर जीवन का किस्सा

दिन के बाद रात आती है
वैसे सुख और दुख आता है
गहराता अंधियारा जितना
ऊषाकाल पास आता है

एक सिक्के के ये दो पहलू
गिरे कभी चित और कभी पट
अनुपात बराबर ही रहता है
जितनी भी हम करलें खटपट

तकलीफें हम को निखारती
अग्नि-तप्त ज्यूँ चमके सोना
ये तो बेहतरी का मौका
तकलीफों पर फिर क्य़ू रोना

खुशियों की ही तरह कष्ट को
सहज भाव से हम स्वीकारें
दोनो के ऊपर उठनें की
कोशिश में जीवन को सँवारे


आज का विचार
संदेह सच्ची मित्रता का विष है ।

स्वास्थ्य सुझाव

बाल झड रहे हों तो तुलसी के पत्ते सुखा कर उसका पाउडर बना लें
और जहाँ से बाल झड रहे हों उस जगह मलें।
एक टिप्पणी भेजें