सोमवार, 5 नवंबर 2007

दीपावली अभिनन्दन



दिया जला, लौ कांपी
कुछ सहमी, घबराई
पवन के झकोरे से
थर थर थर्राई
पर एक क्षण, दूजे पल
इठली, मुसकाई
साथी के कानों में,
हौले से गुनगुनाई
जागो नैना खोलो
दीवाली आई।

सबको दीपावली की ढेर सारी शुभ कामनाएं ।


आजका विचार

अच्छा काम करने के लिये अच्छे माहौल की प्रतीक्षा जरूरी नही हम कहीं से भी शुरू कर सकते हैं ।


स्वास्थ्य सुझाव

गायका शुध्द घी आँखों में रात को लगा कर सोने से आँखों की ज्योती बढती है ।
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