मंगलवार, 13 नवंबर 2007

.....यात्रा ए हवाई २...

यात्रा ए हवाई अब तक
हवाई जाने का प्लान बनते ही हम खुश हो गये । हम दोनो बॉस्टन से और सुहास और विजय वॉशिंगटन से Los Angeles (एल ए ) पहुंचे । वहीं से हमे होनोलूलू के लिये उडान लेनी थी । Los Angeles (एल ए ) में विजय के भाई तथा भाभी के साथ हॉलीवुडमे यूनिवर्सल स्टुडिओ देखा जहां फिल्मों की शूटिंग की जाती है । अगले ही दिन हमें
होनोलूलू की फ्लाइट लेनी थी। और वहाँ से आगे फिर कवाई की । हवाइयन द्वीप समूह में वैसे तो छोटे बडे कोई १०७ द्वीप हैं पर केवल ६ ही बसे हुए है । हम कवाई में ही पूरा हप्ता रहने वाले थे । तो दूसरे दिन सुबह ९ बजे हमने एयर ट्रान की उडान ली और पहुंच गये होनोलूलू । वहाँसे फिर आलोहा एयर से आधे घंटे में कवाइ पहुंच गये । वहाँ पहुंच कर हमने एक कार किराये पर ली ।
अब आगे.....



हमें कार मिली थी सुबरू या सुबारू । कार मे बैठे बैठे हम बाहर के दृश्यों का आनंद लेते हुए आपस में बातें करते जा रहे थे । अरे देखो आम का पेड, और बोगनवेलिया । और ये क्या पेड हैं एक जेसे कतार में, हाँ वोही पीले फूलों वाले । सुहास ने बताया कि यहाँ मेकेडेमिया नटस् बहुत होते हैं, ये शायद वही पेड हैं । ये मेकेडेमिया नटस् देखने में बडे साइझ के चने जैसे लगते है पर तेल बीज होने की वजह से स्वाद में मूंगफली की तरह होते हैं । पर मूंगफली का स्वाद ज्यादा अच्छा होता है ।
मौसम तो हवाई का हमेशा खुशनुमा । न जादा गरम न ज्यादा ठंडा । बारिश आये भी तो दस मिनट और फिर बंद । औरे १०-१० मिनट को बारिश आती रहती है पर आपका घूमना फिरना उससे नही रुकता ।
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नजर जाय वहाँ तक हरियाली और नीलिमा (सागर की या आसमान की) । इसी को निहारते हुए, सुंदर दृश्य और सुहावने मौसम का मजा लेते हुए, हम अपने गंतव्य की और बढ़ चले । हमे जाना था हनलाई बे रिसॉर्ट । नक्शा देखते हुए रास्ते के बोर्डस् पर भी हमारी नजर थी, ताकि कहीं रास्ता चूक ना जायें। और रास्ता मिलही गया । Princeville Hotel का रास्ता और हनलाई बे रिसॉर्ट का रास्ता एक ही था और हम एक सुंदर रास्ते से गुजरते हुए पहुँच गये हनलाई बे रिसॉर्ट । इतने सुंदर सुंदर पौधे और फूल कि आंखें तृप्त हो गईं । और अभी तो ये मजा़ हम पूरे ६ दिन लूटने वाले थे ।
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सुंदर से स्वागत कक्ष में आकर हमने अपने अपार्टमेन्ट के बारे में पता किया और चाबी लेकर आ पहुंचे अपने ठिय्ये पर । हमारा अपार्टमेन्ट दूसरे मंजिल पर था, हमारे स्वागत के लिये तैयार । सोफा, डायनिंग टेबल खूबसूरत फलॉवर व्हेस में सुंदर फूल और दोनो बेडरूम्स में सफेद झक बिस्तर और प्रकृती के नजा़रे लेने के लिये एक एक खूबसूरत बालकनी । मन प्रसन्न हो गया ।
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इतना सब करते करते शाम हो चली थी चाय की चाह थी और उसका जुगाड़ भी हमारे पास था घर से लेके जो चले थे । और यहाँ था एक पूरा किचन सारी सुविधाओं के साथ । तो चाय पी और सामान लाने के लिये निकले, कार का ये फायदा तो था ही । घर वापस आये और थोडा टी वी देखा खाना खाया और सो गये ।
सुबह सुहास ने चाय बनाकर हमें जगाया और चाय के कप लेकर हम आ बैठे बालकनी में, क्या खूबसूरत हरे भरे पेड़ थे। बाहर का नजा़रा और हाथ में चाय बस जिदगी सफल हो गई । चाय पीते पीते हमने देखा कि एक बहुत ही खूबसूरत पक्षी सिर पर लाल टोपी लगाये हुए हमारे टेबल के आस पास चक्कर काट रहा था । कभी वो बालकनी की रेलिंग पर बैठता कभी टेबल पर, पर रुकता नही था यहां से उड वहाँ बैठ वहाँ से उड यहाँ बैठ यही कर रहा था । पर बिस्कुट खाने का लालच उसे ज्यादा दूर जाने नही दे रहा था ।
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हमने थोडेसे बिस्कुट तोड कर टेबल पर बिखेर दिये और थोडी देर को अंदर आगये ।
फिर क्या था देखते ही देखते पूरी टेबल साफ । और बाद में तो इन से अच्छी खासी दोस्ती हो गई । इतनी की हाथसे बिस्कुट का टुकडा़ लेने तक । और इनकी देखा देखी और भी एक दो पंछी आने लगे । और नीचे बागीचे में एक बडा ही सुंदर मुर्गा घूमता रहता था जो वक्त बेवक्त बांग दिया करता था ।
चाय नाश्ते से निबट कर हम गये हनलाई बे बीच पर ।शुरू में तो हमें रेत वाला बीच दिखा ही नही तो सोचा शायद यह कोरल वाला ही बीच है । तो हम उन कोरल्स पर चलते चले गये । कोरल्स को बीच बीच में समंदर का पानी इकट्ठा हो गया था और बिलकुल कांच की तरह साफ पानी इतना कि तैरती हुई मछलियाँ भी दिख रहीं थीं । आगे जाकर थोडी और खुली जगह थी तो सुरेश से तो रहा न गया उन्होने तो वहीं तैरना सुरू कर दिया वहाँ एक दो लोग और भी तैर रहे थे। मै और सुहास मछलियों को देख देख कर खुश हो रहे थे तभी हमें वहाँ एक साँप नजर आया पढ रखा था कि सारे समुद्री साँप जहरीले होते हैं और पट्टे वाले । था वह इतना सुंदर काले पीले पट्टों वाला चमकीला, कि हम दोनो तो डर के बावजू़द वहीं खडे रहे । धीरे धीरे वह एक छेद के अंदर चला गया । पर फिर हमने तैरने वालों को आगाह कर देना ही उचित समझा, ये तो बाद में जाके पता चला कि वो सांप नही बल्कि मुर्रे ईल नामक मछली थी जो दिखती साँप की तरह है ।
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सुरेश वैसे ही पानी से बाहर आ गये थे क्यूंकि कोरल से उनका पेट तथा बाजू छिल गये थे । इतने में हमने देखा कि आगे बाय़ीं तरफ बहुतसे लोग तैर रहे थे और कुछ नौकायें भी चल रही य़ीं तो हम भी वहाँ चले गये और वहाँ देखा एक खूबसूरत रेतीला बीच, रेत एकदम बारीक पाँव के नीचेसे रेशम की तरह फिसलती । और जब हम अंदर गये तो देखा एक एक हाथ लंबी मछलियाँ नीले और नारंगी रंग के डिझाइन में । वहाँ भाई बहन ने खूब तैराकी की । मैने भी समंदर का भरपूर मजा़ लूटा । विजय की घुटने की सर्जरी
हो चुकी है इसलिये वे भी मेरी तरह ही पानी में घूम घूम कर ही मजा़ ले रहे थे । बहुतसे लोग वहाँ सर्फिंग भी कर रहे थे । जब काफी थकान हो गई और भूक भी सताने लगी तब जाकर हमने अपने अपार्टमेन्ट का रुख किया ।
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लंच के बाद हमें जाना था लाइट हाउस और पक्षी अभयोद्यान, तो बस बैठे सुबरू में और चल पडे । ड्राइविंग का जिम्मा सुहास का था । तो कार मे बैठकर चले लाइट हाउस की और । यह जगह काफी पास थी कार पार्क करके हम बडी देर तक दूर से ही लाइट हाउस और पक्षियों को देखते रहे । वहीं पास के पेड पर अननास की तरह के फल लगे थे ।
हवाई के पेड पौधे काफी मिलेजुले किस्म के होते हैं कुछ एकदम ट्रॉपिकल और कुछ टेम्परेट । एक तरफ जास्वंदी, कृष्ण कमल, चंपा , बोगनबेल, नारियल तथा आम होते हैं तो दूसरी और मॅकेडेमिया और अवोकेडो जैसे पेड भी ।
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यहाँ के लोग ज्यादा तर आशिया के हैं । मूलत: चीन जापान, तथा ताहिती के, इन्हे पॉलिनेशियन मूल का कहा जाता है । अच्छे मिलनसार लोग होते हैं ।
फिर हमने लाइट हाउस को करीब से देखा । एक जगह समुंदर का पानी पहाडी के बीच में आकर खूब तेजीसे उछल रहा था वहाँ पानी एकदम दूधिया हो जाता था उसकी बहुतसी तसवीरें लीं
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फिर वहाँ पक्षियों के बारे में एक फिल्म देखी । जगह जगह पर पक्षियों के बारे में जानकारी भी दी हुई थी । हमने उड़ते पक्षियों को कॅमरे में कैद करने की कोशिश की । वापसी पर एक जगह झाडियों में एक मादा पक्षी को अंडे सेते हुए देखा पर फोटो नही ले पाये । समंदर की कुछ और तसवीरें लीं और फिर वापस । (क्रमश:)
उपरोक्त संदर्भ मे--व्हीडिओ देखे

व्हीडिओ1
व्हीडिओ2

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