मंगलवार, 18 सितंबर 2012



आईये गणराज, वंदन
शुभ-सुफल हो आगमन ।।

द्वार पर है आम्रतोरण
रंगोली से सजा आंगन
रोली अक्षत औ नीरांजन
आपका करें अभिनन्दन ।। आईये

जगमगाता सारा प्रांगण
मखर अद्भुत सरस अनुपम
वस्त्र नव सब किये धारण
स्वागत में खडे भक्त-जन ।। आईये...

रोली, दुर्वा, फूल चन्दन
मोदक प्रिय मिष्ट-अन्न
हो रहा पूजन औ अर्चन
गा रहे आरती भक्त गण । आईये..

आपदा दूर हो गजानन
कार्य सारे हो बिन-विघन
सुबुद्धि पायें भटके जन
यही मनन है और चिंतन ।। आईये 

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