सोमवार, 3 सितंबर 2012

मै हूँ ना




फैले संध्या रंग क्षितिज पर
सिंदूरी, गुलाबी गहरे
इन रंगों का साथ क्षणों का
छायेंगे धीरे धीरे अंधेरे

ऊदी और सलेटी बादल
परदे से, ढक लेंगे नज़ारे
सांवली रजनी के चुनरी में
टंक जायेंगे झिल मिल तारे

दिन की चहल पहल कोलाहल
शाम की वो रंगीन फिज़ाये
झट से रीत बीत जायेंगी
गहन रात के वारे न्यारे

अजीब सी सिहरन लगती है
देह सिमटने सी लगती है
आशंकाओं की परछाई
दीवारों पर घिर आती हैं

ह्रदय उछल कर मुंह को आता
हाथ पांव नम हो जाते हैं
अज्ञात हवाओं के झोकों से
 बर्फीली ठंडक आती है ।

इन सब में चुपचाप खडी मैं
दीवार से सहारा लेकर
छत गिरने के इंतजार में
निश्चल, विवश और भय कातर ।

इतने में इक किरण कहीं से
पडती है मेरी आँखों पर
कहती है, मै हूँ ना मन में,
फिर तुमको बोलो किसका डर ।

इसी रोशनी को मन में रख
जीवन में आगे जाना है
और अंत में भी हम सब को
इसी उजाले में जाना है ।


18 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

आँखों से बहता विश्वास..

Suman ने कहा…

एक हसीन सुबह कर रही होगी इंतजार
क्यों चिंता के कोहरे में ढकी, आशा प्रभात ?
बहुत सार्थक चिंतन है ताई ...

Suman ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
mridula pradhan ने कहा…

prernadayee.....

दिगम्बर नासवा ने कहा…

इसी रोशनी को मन में रख
जीवन में आगे जाना है
और अंत में भी हम सब को
इसी उजाले में जाना है ..

सच है ... रौशनी रहे जीवन के आस पार तो अन्तः रोशन हो जाता है जीवन ...

रश्मि प्रभा... ने कहा…

इन सब में चुपचाप खडी मैं
दीवार से सहारा लेकर
छत गिरने के इंतजार में
निश्चल, विवश और भय कातर ।

इतने में इक किरण कहीं से
पडती है मेरी आँखों पर
कहती है, मै हूँ ना मन में,
फिर तुमको बोलो किसका डर ।

इसी रोशनी को मन में रख
जीवन में आगे जाना है
और अंत में भी हम सब को
इसी उजाले में जाना है । .... प्रेरणा देते भाव

रविकर फैजाबादी ने कहा…

उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवार के चर्चा मंच पर ।।

kshama ने कहा…

Andhere to bade tezeese chha rahe hain!

Reena Maurya ने कहा…

बहुत बेहतरीन और प्रेरणादायी
रचना...
:-)

dheerendra ने कहा…

अहसास और विस्वास से भरी प्रेरक प्रस्तुति,,,

RECENT POST,तुम जो मुस्करा दो,

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

इसी रोशनी को मन में रख
जीवन में आगे जाना है
और अंत में भी हम सब को
इसी उजाले में जाना है ।

जीवन को प्रेरित करने वाली सुंदर रचना

वाणी गीत ने कहा…

छोटी सी बूँद भी आशा की बड़ी बड़ी सीख दे जाती है !

सुशील ने कहा…

बहुत खूबसूरत पंक्तियां :

किरण एक होती है काफी
बेड़ा हो जाता है पार
अगर समझ में है आ जाती !

Abhishek Ojha ने कहा…

सुन्दर !

ZEAL ने कहा…

wonderful creation..

हरकीरत ' हीर' ने कहा…


इतने में इक किरण कहीं से
पडती है मेरी आँखों पर
कहती है, मै हूँ ना मन में,
फिर तुमको बोलो किसका डर ....

मन के हारे हार है मन के जीते जीत को चरितार्थ करती पंक्तियाँ .....!!

mahendra verma ने कहा…

इसी रोशनी को मन में रख
जीवन में आगे जाना है
और अंत में भी हम सब को
इसी उजाले में जाना है ।

प्रेरणा देती हुई सुंदर कविता।

Rakesh Kumar ने कहा…

इतने में इक किरण कहीं से
पडती है मेरी आँखों पर
कहती है, मै हूँ ना मन में,
फिर तुमको बोलो किसका डर ।

बहुत सुन्दर भावमय प्रेरक प्रस्तुति.
शब्दों और भावों का अनूठा चित्रण
निराशा को दूर कर,आशा का संचार करती

प्रस्तुति के लिए हार्दिक आभार,आशा जी.