गुरुवार, 27 सितंबर 2012

बेहतर





वेदना संवेदना है
क्रोध है और कामना है
मोह है और भावना है
मद है कुछ अवमानना है
प्रेम है सद्भावना है
इनके चलते मै सिरफ
इन्सान हूँ यह मानना है ।

हाथ मेरे कर्मरत है
चल रहा जीवन का रथ ये
जो नियत है मेरा पथ है  
है नरम या फिर सखत है
मन कभी रत और विरत है
इनके चलते मै फकत
बस हूँ इक लम्हा ए वकत  ।

खुशियां भी हैं और गम भी
आंख य़े होती है नम भी
ताल, सुर हैं और सम भी
धूप और बारिश की छम भी
कभी ज्यादा कभी कम भी
इनके चलते मैं छहों ऋतुएं हूँ
हूँ ना एक कम भी ।

सब को खुशियां बांट दूं मै
पीर सबकी हर सकूँ मै
हार हूँ या जीत हूँ मै
इस जहां की रीत हूँ मै
मौन हूँ और गीत हूँ मै
हर जनम में हो सकूं मैं
पहले से कुछ अधिक बेहतर ।


चित्र गूगल से साभार


27 टिप्‍पणियां:

Anupama Tripathi ने कहा…

हर जनम में हो सकूं मैं
पहले से कुछ अधिक बेहतर ।

बहुत सुंदर प्रार्थना प्रभु से ...
सुंदर भाव ...सुंदर अभिव्यक्ति ....

Manu Tyagi ने कहा…

बढिया कविता

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

उत्कृष्ट रचना ....

रविकर ने कहा…

गुण अवगुण की खान तन, मन संवेदनशील ।

इसीलिए इंसान हूँ , दीदी मस्त दलील ।।

वन्दना ने कहा…

बहुत सुन्दर भाव

mridula pradhan ने कहा…

खुशियां भी हैं और गम भी
आंख य़े होती है नम भी
ताल, सुर हैं और सम भी
धूप और बारिश की छम भी.....kya sunder shabd sanyojan hai.....

रश्मि प्रभा... ने कहा…

यही ख्याल उत्कृष्ट है ...

रविकर ने कहा…

उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

सदा ने कहा…

सार्थकता लिए सशक्‍त लेखन

Suman ने कहा…

बहुत सुन्दर....

Dheerendra singh Bhadauriya ने कहा…

इस जहां की रीत हूँ मै
मौन हूँ और गीत हूँ मै
हर जनम में हो सकूं मैं
पहले से कुछ अधिक बेहतर,,,,

सुंदर भाव लिये बेहतरीन अभिव्यक्ति,,,,
RECENT POST : गीत,

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

आज 28- 09 12 को आपकी पोस्ट की चर्चा यहाँ भी है .....

.... आज की वार्ता में ... व्यस्तता नहीं , अर्थपूर्ण व्यस्तता आवश्यक है .... ब्लॉग 4 वार्ता ... संगीता स्वरूप.

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सब को खुशियां बांट दूं मै
पीर सबकी हर सकूँ मै
हार हूँ या जीत हूँ मै
इस जहां की रीत हूँ मै
मौन हूँ और गीत हूँ मै
हर जनम में हो सकूं मैं
पहले से कुछ अधिक बेहतर ।

बहुत प्रवाह युक्त रचना ... बेहतर बनने की ललक जगाती हुई ॥

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

हर दिन थोड़ा बेहतर..

Reena Maurya ने कहा…

सुन्दर भावनाएं व्यक्त करती
बहुत सुन्दर , उत्कृष्ट रचना...
:-)

Kumar Radharaman ने कहा…

इस कविता में शब्द मानो नृत्य कर रहे हैं।

Arvind Mishra ने कहा…

अभिलाषा

Asha Saxena ने कहा…

गहन और भावपूर्ण विचारों से परिपूर्ण रचना बहुत अच्छी है |
आशा

Vaanbhatt ने कहा…

हर जनम में हो सकूं मैं
पहले से कुछ अधिक बेहतर...हमारा कम्पटीशन खुद से ही है...किसी और से नहीं...

Rakesh Kumar ने कहा…

सुन्दर,प्रेरक और अनमोल प्रस्तुति है आपकी.
सरल सरल शब्दों में गहन गहन बातें बतलाती.
हार्दिक आभार,आशा जी.

Manu Tyagi ने कहा…

बेहतर से भी बेहतर यानि बेहतरीन , आज आपके सभी ब्लाग्स देखे
धन्यवाद

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत उम्दा!!

Abhishek Ojha ने कहा…

हर वक़्त पहले से बेहतर होते ही जाना है...

अल्पना वर्मा ने कहा…

मन कभी रत और विरत है इनके चलते मै फकत बस हूँ इक लम्हा ए वकत !

वाह!वाह! बहुत खूब.

अच्छी लगी कविता .

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…


सब को खुशियां बांट दूं मै
पीर सबकी हर सकूँ मै
हार हूँ या जीत हूँ मै
इस जहां की रीत हूँ मै
मौन हूँ और गीत हूँ मै
हर जनम में हो सकूं मैं
पहले से कुछ अधिक बेहतर ।यही कामना है इस दिल की भी ..बहुत बढ़िया लिखा है आपने

P.N. Subramanian ने कहा…

प्रेरणादायक सुन्दर अभिव्यक्ति. आपको नमन है.

Rakesh Kumar ने कहा…

आपकी हर कृति में सुन्दर दर्शन होता है.
सुन्दर भाव,अनुपम अभिव्यक्ति.
आभार,आशा जी.