गुरुवार, 19 जुलाई 2012

रब की मर्जी




खुली खिडकी से आती रोशनी
तुम्हारे चेहरे को सहलाती है
सवेरा कितना प्यारा  ।

ये खुली हवा, ये आसमाँ ,
ये छन छन कर आती धूप,
माँ के  आंचल सी ।

कितना निश्छल, कोमल
विश्वास भरा, प्यारा प्यारा
तुम्हारा ये चेहेरा ।

आई है ये सुबह
कितनी जहमतों के बाद.
मेरे जीवन में ।

साथ पा कर
इक नई शुरुवात
तो कर दी है हमने ।

तो लगता है कि
सब अच्छा होगा ।
अब रब की मर्जी है ।


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