सोमवार, 26 मार्च 2012

६ त्रिदल

सिंदूरी आसमान
तुम्हारी चुनरी
फैली हो जैसे

नीला सागर
भूरी रेत
आंखें और दिल ।

सलेटी काला,
रात का साया
गहराता दुख ।

तारे टिमटिम
कोई तो किरण
रोशनी की ।

लंबी रात
बिना बात
खिंचता मौन ।

सुहानी हवा
भोर के पंछी
आस जगाते ।

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