शुक्रवार, 16 मार्च 2012

ख्याली पुलाव

नेता जो बेईमान कम होते
लोगों के वे देवता होते ।

छोडते जो पचास प्रतिशत भी
प्रगति में आज हम कहां होते ।

जो लोगों के लिये पुलिस होती,
लोग भी फिक्रमंद ना होते ।

आतंकी पैदा भी तब नही होते
गलत करने से पहले घबराते ।

पढाते शिक्षक जो क्लास में दिल से,
तो कोचिंग क्लास भी कहां चलते ।

पैदावार आती जो सब बजारों में
चीजों के ऊँचे दाम, कयूं होते ।

गोदामों में गेहूं फिर नही सडता
अपने भंडारक ही जो सही होते

सब को जो काम काज मिल जाता
इतने उत्पात तब नही होते ।

न्याय की प्रक्रिया गर आसाँ होती,
इतने अन्याय जग में, क्या होते ?

घूस से काम हम न करवाते
तब तो फिर घूसखोर ना होते ।

ख्याली पुलाव पकाओ मत आशा
इतने सपने, कब, किसके, सच होते ।
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