मंगलवार, 28 फ़रवरी 2012

मौसम



हवा में नमी है थोडी और हलकी सी गरमाहट
शिशिर विदाई ले रहा, और वसंत की है आहट ।

कहीं खिल रहे हैं पलाश और फूल उठे हैं कहीं सेमल,
नये नये फूलों की खुशबू भीनी भीनी और कोमल ।

कोयल की कूक कभी कभी अब गूंजती है अमराई में,
रंग छलकने ही वाले हैं राधा की अंगनाई में ।

मन रंगीला तन रंगीला कैसी ये तरुणाई है
इसके चलते वृध्दों नें भी जोश की बीन बजाई है ।

धरती की धानी चुनरिया सज गई पीले बूटों से
सरसों के लहराते खेत ये, सोना बिखरा हो जैसे ।

हवा बसंती चली बजाती, रुनझुन कानो में पायल,
कौन है ऐसा जो न हुआ हो इस मधुवंशी का कायल ।

यह मौसम थोडे दिन का है, इसको हम भरपूर जिये
फिर न गरमियों से तंग होंगे इन यादों में जो खोयें ।

26 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

आगत मौसम का विशिष्ट स्वागत..

रविकर ने कहा…

शिशिर जाय सिहराय के, आया कन्त बसन्त ।

मस्ती में आकूत सब, सेवक स्वामी सन्त ।


सेवक स्वामी सन्त, हुई मादक अमराई ।
बाढ़ी चाह अनंत, जड़ो-चेतन बौराई ।

फगुनाहट हट घोर, शोर चौतरफा फैला।
देते बांह मरोर, बना बुढवा भी छैला ।।


दिनेश की टिप्पणी - आपका लिंक

http://dineshkidillagi.blogspot.in

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

वाकई ये दिन तो बहुत ही अच्छे हैं. और आपकी कविता भी.

परी देश की शह्जादी ने कहा…

सुन्दर रचना..

संजय @ मो सम कौन ? ने कहा…

खुशगवार मौसम वाली खुशगवार कविता।

sangita ने कहा…

मौसम के स्वागत का निराला अंदाज है आपका ।शानदार ।

संगीता पुरी ने कहा…

यह मौसम थोडे दिन का है, इसको हम भरपूर जिये
फिर न गरमियों से तंग होंगे इन यादों में जो खोयें ।
वा‍ह ..

mridula pradhan ने कहा…

mousam par likhi nazuk si kavita....bahut achchi lagi.

रश्मि प्रभा... ने कहा…

कोयल की कूक कभी कभी अब गूंजती है अमराई में,
रंग छलकने ही वाले हैं राधा की अंगनाई में ।
subhag drishya

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

बहुत सुंदर शाब्दिक श्रृंगार लिए रचना .....

मिश्री की डली ज़िंदगी हो चली ने कहा…

bahut sundar

दिगम्बर नासवा ने कहा…

कोयल की कूक कभी कभी अब गूंजती है अमराई में,
रंग छलकने ही वाले हैं राधा की अंगनाई में ...

फागुन आने की दस्तक दे रही है आपकी लाजवाब रचना ... आनंद आ गया ...

Suman ने कहा…

हवा बसंती चली बजाती, रुनझुन कानो में पायल,
कौन है ऐसा जो न हुआ हो इस मधुवंशी का कायल ।
सब इस वंशी के कायल है ...

आज की रचना बहुत सुंदर लगी !

Vaanbhatt ने कहा…

फाल्गुन के आगत का सुन्दर चित्रण...होली की अग्रिम शुभकामनाएं...

dheerendra ने कहा…

धरती की धानी चुनरिया सज गई पीले बूटों से
सरसों के लहराते खेत ये, सोना बिखरा हो जैसे. बहुत बेहतरीन प्रस्तुति,इस सुंदर रचना के लिए बधाई,...

NEW POST ...काव्यान्जलि ...होली में...

सतीश सक्सेना ने कहा…

बड़ा प्यारा लगा यह वसंत स्वागत गीत....
आभार आपका !

Ashok Bajaj ने कहा…

सुन्दर कविता .

Rakesh Kumar ने कहा…

सुन्दर सुन्दर चह चहाती सी रचना.
प्रसन्न हो गया है मन पढकर.

अनुपम प्रस्तुति के लिए आभार जी.

sandeep sharma ने कहा…

बेहद खूबसूरत रचना है... कई दिनों बाद आपके ब्लॉग पर आया.. पहले जैसा ही वातावरण मिला यहां... पढकर मजा आया...

उपेन्द्र नाथ ने कहा…

मौसम को सच प्रकृति से भला बेहतर कौन जी सकता है. .... सुंदर प्रस्तुति.
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क्या सिलेंडर भी एक्सपायर होते है ?

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

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♥ होली ऐसी खेलिए, प्रेम पाए विस्तार ! ♥
♥ मरुथल मन में बह उठे… मृदु शीतल जल-धार !! ♥



आपको सपरिवार
होली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं !
- राजेन्द्र स्वर्णकार
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Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

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सुंदर रचना के लिए भी आभार !

सतीश सक्सेना ने कहा…

@मन रंगीला तन रंगीला कैसी ये तरुणाई है
इसके चलते वृध्दों नें भी जोश की बीन बजाई है ।

बढ़िया अभिव्यक्ति ....
रंगोत्सव पर आपको शुभकामनायें !

ज्योति सिंह ने कहा…

मन रंगीला तन रंगीला कैसी ये तरुणाई है
इसके चलते वृध्दों नें भी जोश की बीन बजाई है ।

धरती की धानी चुनरिया सज गई पीले बूटों से
सरसों के लहराते खेत ये, सोना बिखरा हो जैसे ।

हवा बसंती चली बजाती, रुनझुन कानो में पायल,
कौन है ऐसा जो न हुआ हो इस मधुवंशी का कायल ।

यह मौसम थोडे दिन का है, इसको हम भरपूर जिये
फिर न गरमियों से तंग होंगे इन यादों में जो खोयें ।
bahut hi pyari kavita hai aapki ,mahila divas ke saath holi parv ki bhi badhai le /

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

प्रकृति के सुन्दर दृष्य जीवन में सुख-सौंदर्य और माधुर्य भरते रहें !

Rajput ने कहा…

शिशिर विदाई ले रहा, और वसंत की है आहट ...
बहुत सुंदर .