मंगलवार, 28 फ़रवरी 2012

मौसम



हवा में नमी है थोडी और हलकी सी गरमाहट
शिशिर विदाई ले रहा, और वसंत की है आहट ।

कहीं खिल रहे हैं पलाश और फूल उठे हैं कहीं सेमल,
नये नये फूलों की खुशबू भीनी भीनी और कोमल ।

कोयल की कूक कभी कभी अब गूंजती है अमराई में,
रंग छलकने ही वाले हैं राधा की अंगनाई में ।

मन रंगीला तन रंगीला कैसी ये तरुणाई है
इसके चलते वृध्दों नें भी जोश की बीन बजाई है ।

धरती की धानी चुनरिया सज गई पीले बूटों से
सरसों के लहराते खेत ये, सोना बिखरा हो जैसे ।

हवा बसंती चली बजाती, रुनझुन कानो में पायल,
कौन है ऐसा जो न हुआ हो इस मधुवंशी का कायल ।

यह मौसम थोडे दिन का है, इसको हम भरपूर जिये
फिर न गरमियों से तंग होंगे इन यादों में जो खोयें ।
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