सोमवार, 20 फ़रवरी 2012

आज मै तुमसे मिलूंगी



आज मै तुमसे मिलूंगी प्यार की ऊंचाइयों पर
भावों की नापूंगी मै गहराइयां
और छू लूंगी वे सारे रंग छाये आसमां पर ।

झरने जैसी बहती मेरे हंसी की वह खिलखिलाहट
मेरे होने की अजब परछाइयाँ
बांध लूंगी मै तुम्हे फिर आज बाहों के बिना पर ।

रात से गहरे हैं मेरे बादलों से उडते गेसू
इनमें ही बसती हैं कुछ पुरवाइयां
खुशबूओं से तर हुआ है आज मेरा मन, मनेतर ।

सुबह की लाली है छायी आज मेरी भंगिमा मे
रोशनी की मन में कुछ शहनाइयाँ
आज छेडूंगी अनोखी रागिनी के, मै, मधुर स्वर ।

ये उजासों के खजाने, करेंगे संपन्न हमको
हम मिटा देंगे, जो थीं तनहाइयां
और फिर उडने लगेंगे पंछी अपने आसमाँ पर ।
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