बुधवार, 4 अगस्त 2010

रोम का रोमांच -


रोम जाने के लिये हमे उतरना था पोर्ट सिविटाविचिया पर । सुबह सबह पोर्ट पर शिप की डॉकिंग हो गई थी फिर हमें पोर्ट पर उतरने के बाद शिप की तरफ से जो बस ठीक की गई थी हमे सेंट पीटर्स चौक में छोडने वाली थी । वहीं से हम सेंट पीटर्स बेसिलिका और सिस्टाइन चेपल देख सकते थे । क्रिस्चियन्स का सबसे बडा तीर्थ, इसी की वजह से सारे साल यहां टूरिजम जोरों पर रहता है ।  फिर वहां से हमे अपने आप घूमना था, चाहे हम हॉप ऑन हॉप ऑफ बस से घूमते जो कि 4 घंटे की टूर थी, या फिर टैक्सी से । हमने तय किया कि हम सेंटपीटर्स बेसिलिका देख कर फिर टैक्सी से घूमेंगे इस तरह घूमना हमारे कंट्रोल में रहेगा और समय रहते हम सेंट पीटर्स चौक पर आकर वापसी की बस ले सकेंगे ।
कहते हैं कि रोम रोम्यूलस ने ईसा पूर्व 735 के आस पास बसाया । रोम्यूलस और रूमस दो भाई थे जिन्हे भेडियों ने पाला था । बादमे रोम्यूलस ने अपने भाई को मार दिया । रोम्यूलस के नाम पर ही शहर का नाम रोम पडा । और एक किवदंती के अनुसार इन दो बच्चों में से एक लडकी थी रोमा जो बहुत चतुर और होशियार थी इसी के नाम पर रोम बसाया गया । पहले भारत की तरह ही ईताली ( इतालवी में ऐसे ही बोलते हैं ) भी कई राज्यों में बटा हुआ था और इनकी आपस में लडाईयां भी हुआ करती थी । रोम का विकास सबसे पहले रोमन राज्य के तौर पर हुआ इसके बाद ये बना रोमन रिपब्लिक  जो करीब 500 वर्ष रहा और आखिर में रोमन साम्राज्य, जिसे ऑगस्टस ने उत्कर्ष पर पहुँचाया । रोमन शासक जूलियस सीज़र, जिसे तानाशाह के रूप में जाना जाता है और जिसने रोमन साम्राज्य की नीव डाली और नीरो का नाम तो सबने ही सुना है । वही नीरो, जो फिडल बजाता रहा और रोम जलता रहा । खैर ये तो हुई इतिहास की बातें । रोम शुरू सेही क्रिस्चियन धर्म का केन्द्र रहा है और रोमन शासकों का प्रणेता भी ,  इसीसे योरोप में इसका नाम आदर से लिया जाता है । सतत के य़ुद्धोंसे और षडयंत्रों से आखिर इस साम्राज्य का पतन हुआ । अब तो ईताली एक गणराज्य है । लेकिन इसने अपना प्रभाव सारी दुनिया के इतिहास पर छोडा है । वेटिकन अपने आप में एक स्वतंत्र देश है जहां का राजा है पोप । उसी की सार्वभौम सत्ता यहां चलती है ।
हम बाहर आये बस में बैठे और बसने कोई डेढ घंटे बाद हमे सेंट पीटर्स चौक पर छोड दिया । वहां से हम चल कर पहुंचे बेसिलिका बाहर ही एक तंबू के नीचे पोप बैठे हुए थे और ढेर सारी जनता । जिस बात को लेकर क्रिस्चियन्स इतने उत्साहित थे और जन्म सफल मान रहे थे हमारे लिये वही बात बेसिलिका न देख पाने का सबब बन गई ।(विडियो 702-734-2)
 
जब हमे पता चल गया कि बेसिलिका देखने का तो अभी कोई चान्स नही है तो सोचा टैक्सी कर के रोम घूम आते हैं और फिर कोशिश करेंगे ।  हम लोग 5 थे और टैक्सी सिर्फ 4 लोग लेती है पर हम अभी सोच ही रहे थे कि क्या करें, कि एक 22-23 साल का लडका पूछने लगा कि टैक्सी चाहिये ?  हमने उससे कह हम लोग तो 5 जने हैं तो उसने फट से आगे बीच की एक और सीट गिरा दी और कहा दो आगे बैठ जाइये तीन पीछे ।  ड्राइवर का नाम था एन्ड्रे उसने हमे खूब घुमाया । हम तो सिर्फ कोलीसियम देखना चाहते थे, वह तो उसने दिखाया ही और भी बहुत घुमाया कॉन्टेस्टाइन की आर्च, रोमन फोरम, सेंट एन्जेलो का फोर्ट , टिबर नदी और शहर का एक चक्कर ।
सबसे पहले गये हम कोलीसियम । इसका पुराना नाम फ्लेवियन एम्फीथियेटर था । शायद यहां के राजा के नाम पर । बाद में इसके विशाल आकार प्रकार की वजह से लोग इसे कोलिसियम कहने लगे । यहां ग्लेडियेटर्स के ड्यूएट युद्ध खेले जाते थे यहां अतिथियों को उनके रुतबे के मुताबिक बैठाया जाता था । अक्सर ये युध्द किसी एक ग्लेडियेटर की मौत में निर्णित होते थे । इसे हम पुराने जमाने के स्टेडियम कह सकते हैं । यह इमारत बहुतही भव्य है । आप विडियो से पता लगा ही लेंगे ।  ये ग्लेडियेटर किसी ना किसी राजा या जमीदार के अधीन होते थे तथा इनके प्रशिक्षण पर बहुत ज्यादा समय और पैसा लगाया जाता था तो बाद में इनकी मौत को टालने के उपाय सोचे गये बेशक वह हार ही क्यूं ना जाये ।
कोलीसियम देखने के बाद हम रोम के रास्तों से चल कर गये रोमन फोरम देखने । ये पुराने रोमन राज्य के खंडहर हैं । यह जमीन पहले दल दल थी पर इसका भराव कर के यहां शहर बसाय गया । रोम नगर टिबर नदी पर स्थित है और ये नदी अभी भी सुंदरता बनाया हुए है । यहां आते आते हमने कॉन्टेस्टाइन की कमान देखी और उसके फोटो लिये ।  पुराने रोम के पतले रास्तों से हमारी टैक्सी जा रही थी ।
रोमन फोरम को ग्रीक नगरों की तरह बसाया गया यहां राजाओं के निवास, इनके बेसिलिका जो ग्रीक देवी देवताओं के मंदिरों के नामों पर बनाये गये जैसे वेस्टा का मंदिर  । हमने टिबर नदी की भी तस्वीरें लीं और देखा हमने जेनीको और फव्वारा जो बहुत सुंदर है । पुराने रोम का ट्रेस्टावेरा देखा जहां लेग शाम को तफरीह के लिये आते हैं । हमने गैरीबाल्डी का स्मारक देखा इसी के नाम का रास्ता भी है इन्होने ऱोम को फ्रेन्चों से आजाद कराया था । सब इतना पुराना है पर अच्छी तरह सुरक्षित किया हुआ है ।
विडियो (702-734-3)
 
मुझे याद है जब हम शुरू शुरू में 1980 में दिल्ली आये थे तो कुतुबमीनार से आगे वसंत कुन्ज के बन रहे मकान देखने जाते हुए बल्बन की कबर रास्ते पर से दिखती थी पर अब ढूंढने पर भी दिखाई नही देती ।
इसके बाद हमें हमारा टैक्सी ड्राइवर ले गया सेंट एन्जेलो का किला देखने। यहां जाते हुए टिबर नदी के पुल पर से गुजरना होता है ये नज़ारा बहुत ही सुंदर है । वैसे भी पानी चाहे समुद्र हो या नही किसी भी जगह की शोभा में चार चांद लगा देता है । ये किला या कासल राजा हेड्रियन ने अपने मुसोलियम के तौर पर बनवाया था पर बाद में इसे किले के तौर पर इस्ते माल किया गया ये बहुत ही भव्य गोलाकार आकार में बना हुआ है । ऐसा कहते हैं कि यहां से वेटिकन में जाने का एक गुप्त रास्ता है जिससे पोप जब चाहे यहां  जा सकते हैं । डैन ब्राउन की किताब एन्जेल्स एन्ड डीमन्स में इसका वर्णन है । (विडियो 735-765-1& 2)
 
यहां से हम वापिस वेटिकन गये (सेंट पीटर्स बेसिलिका ) पर वहां पर अभी भी बहुत भीड थी । हम लाइन में लगने जा रहे थे इतने में एक आदमी हमें ढूंढता हुआ आया और कहा ये कैमेरा आप का है ?

देखा तो सुहास का कैमेरा था । मुझे उस टैक्सी ट्राइवर ने दिया है । मै उसी टैक्सी में बैठा हूँ जिसे आपने छोडा । सुहास को तो पता ही नही था कि वो कैमेरा टैक्सी में भूल आई है पर उस लडके की दाद देनी पडेगी कि टैक्सी घुमाकर लाया कैमेरा वापिस करने । कहां तो हमने सुन रखा था कि ईताली में चोर और जेब कतरे बहुत हैं बडी सावधानी से रहना है वगैरा और कहां हमारा ये अनुभव, बिल्कुल उलट । वहां एक पादरी अचानक हमें मिल गये तो हमने पूछा कि हमें साढे चार बजे शिप पर पहुंचना है तो क्या हम अंदर का टूर करके वापिस आ सकते हैं उस समय दो बजे थे और लाइन बहुत लंबी थी । पादरी जी ने बताया कि अगर आपको शिप पर साढे चार बजे पहुंचना है तो आप क्यू में न लगें क्यूंकि एक बार आप अंदर चले गये तो वापिस पूरा देखे बगैर नही आ सकते । तो हमने अपना कार्यक्रम बदल दिया और बेसिलिका के बाहर बाहर से ही तस्वीरें लीं । हम चाहें अंदर ना जा पाये हों पर राजू और रुचिका अंदर गये भी और उन्होने शूटिंग भी की थी तो थोडा जायजा आप भी लें । इसमे बेसिलिका के अन्द बनी माइकल एन्जेलो की तस्वीरें हैं जो बाइबल की कहानियों से प्रेरित हैं जैसे आदम और हव्वा की कहानी, नोहाकी कहानी, स्वर्ग और नरक की कहानी (विडियो 4121-510 बेसिलिका क्लिप ) ।

सिस्टीन चैपल में मेरी का यीशू को गोद में लिया हुआ एक पुतला है जो बहुत ही प्रसिध्द है इसमें यीशू को क्रूस से उतारने के बाद मेरी उन्हें गोद में लेकर बैठी हैं । यीशू की लस्त काया और मेरी के चेहरे के भाव देखते ही बनते हैं ।(विडियो 0310 – 0823)
 
आस पास घूमे  और वेटिकन के लाल कपडे पहने हुए सोल्जर्स की तसवीरें उतारीं । फिर एक जगह बैठ कर खानापीना किया वहीं पास में एक औरत आकर बैठ गई तो हमने अपना खाना सेंडविच केला एपल वगैरे उसके साथ बांटे । भूखी होगी, उसने बगैर कोई प्रतिवाद किये चुपचाप ले लिया और फटाफट खत्म भी कर लिया । शायद हम कोई पिछले जनम का कर्ज उतार रहे होंगे ।  फिर हम चल कर वहीं पहुँच गये जहां हमें बस लेनी थी ये एक रेस्तराँ था और क्यूरिओ शॉप भी । यहां बेसिलिका का प्रसिध्द चित्र जहां आदमी और ईश्वर हाथ मिलाने की कोशिश में है, था, और मेरी का वह पुतला भी जिसमे वे ईशू को क्रूस से उतारने के बाद गोद में लिये बैठी हैं । ईशू की लस्त पडी काया उस वक्त की उनकी स्थिती को एकदम जीवंतता से बता रही है । हम ने वहां टॉयलेट का प्रयोग किया । लोगों की इस प्राकृतिक जरूरत को भी ये लोग खूब एन-कैश करते हैं । खैर बस समय पर आई और वापसी पर भी हमने रास्ते में बिखरी सुंदरता आनंद उठाया । अपने शिप पर आये कार्ड दिखा कर अंदर आये और अपने कमरे में । चाय की तलब लगी थी तो गये डेक 12 और चाय पी, थोडी कुकीज खाईं और अंतरात्मा को तृप्त किया । रात को कोई डांस कॉम्पीटीशन था तो सोचा एक चक्कर लगा कर देख आयेंगे । वही किया । मध्यरात्री के बाद या कभी कभी दिन में भी तंबोला भी होता था यहां । बहुत सोचा था जयश्री ने और मैने कि एक बार खेलेंगे जरूर पर हो ही नही पाया । बल्कि एक्यूप्रेशर के फ्री टिकिटस थे जो पांच बजे से पहले जमा करने थे उसमें भी हम लेट हो गये खैर कोई बात नही वैसे भी मुफ्त की चीजें अपने को कब मिलीं हैं । कल हमे जाना था नेपल्स हां वहीं जिसके पास ही है पॉम्पई शहर जो कभी ज्वालामुखी फटने से खत्म हो गया था । हम सबने अंग्रेजी में Destruction of Pompei  की कहानी तो पढी ही होगी । (क्रमशः)

13 टिप्‍पणियां:

ललित शर्मा ने कहा…

बखान तो किया जाता है रोम की सभ्यता का,
लेकिन ग्लैडिएटर्स की लड़ाईयों के रुप में इनकी बर्बरता सामने आ ही जाती है जिसका मूक गवाह कोलिसियम है।
बहुत बढिया यात्रा चल रही है-आपके साथ-साथ हमारी भी

आभार

ललित शर्मा ने कहा…

वीडियों के एचटीएमएल कोड में जाकर चौड़ाई 390 एवं उंचाई 290 कर लें तो पोस्ट पर पूरा वीडियो दिखाई देगा।

डा. अरुणा कपूर. ने कहा…

आशा ताई!...आपने विस्तृत और मनोरंजक जानकारी इस लेख में दी है!... रोम के फोटोग्राफ्स सभी बहुत सुंदर है!.... हमारी भी मानो आपके साथ सैर हो ही गई!

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' ने कहा…

आशा जी,
बहुत ही सुन्दर शब्दों के साथ पेश की गई लाइव यात्रा...
हर किसी को पसंद आने वाली है.

मनोज कुमार ने कहा…

इस संस्मरण के ज़रिए बहुत अच्छी जानकारी मिली।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

इसी बहाने रोम दर्शन भी हो गये।

महफूज़ अली ने कहा…

संस्मरण रुपी यह पोस्ट बहुत अच्छी लगी.... सारे वीडियोज बहुत अच्छे लगे...

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत ही सुन्दर शब्दों के साथ पेश की गई यात्रा...

अभिषेक ओझा ने कहा…

विस्तृत जानकारी और भ्रमण हो गया रोम का तो. लग रहा है कि कुछ बचा ही नहीं अब तो युरप में.

boletobindas ने कहा…

चलिए आपके साथ घूम लिया हमने भी। पर कुछ जगह को देख कर लगा की अपनी दिल्ली भी कम नहीं है..बस जरा सा चमका लें हम अपने को....नीयत सुधार लें हम...तो कम नहीं ....

औऱ हां रोम के मशहूर ठग मिले की नहीं....बनारस के ठग की तरह ही रोम के ठग भी दुनिया में काफी मशहूर है...

JHAROKHA ने कहा…

aadarniy mam,
aapke blog ko hamasha padhti aai hun kabhi koi majburi -vash chhuut gaya ho to alag baat hai.itani jaankariyan aapke blog se jo mujhe milti hai vo mujhe apne bachchon ke padhane ke kaam aa rahi hai.ye aapki hi den hai .iske liye aapko sadar pranaam.
poonam

अल्पना वर्मा ने कहा…
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अल्पना वर्मा ने कहा…

इस पोस्ट में बहुत कुछ देखने और जानने को मिला..विडियो देखना किश्तों किश्तों में आज पूरा किया है.
एक सम्मोहन सा बंध गया विडियो देखते देखते ..
-इताली में आप को ईमानदार युवक भी मिला जिसने आप का केमेरा वापस किया..सुखद लगा जानकर .हमने भी यूँ तो किस्से कहानियों में इटली में ठगी और चोरी की बातें पढ़ी सुनी हैं.
-यात्रा संस्मरण बहुत अच्छा लगा.