बुधवार, 28 जुलाई 2010

लूका और पीसा के आश्चर्य़


सुबह सुबह हमारा शिप लूका के लिये लिवोर्नो नामक पोर्ट पर डॉक हो गये था ।यहां से हमें बस से आगे जाना था । हमारी बस नंबर थी 16 । लूका और पीसा इटाली के पुराने टस्कैनी प्रदेश के बडे शहर थे और हैं । पुराने जमाने में ये एक स्वतंत्र राज्य था । इसे सबसे पहले एट्रूस्कन्स-आदिवासीयों ने बसाया और बाद में ये रोमन कॉलोनी बन गया था । यहां अब भी रोमन फोरम की तरह अवशेष दिखते हैं । लगभग 11 वी शती में ये रोम के अधीन तो था पर लगभग स्वतंत्र राज्य था । इनकी पडोसी राज्य फ्लोरेन्स तथा पीसा के साथ लडाइयां होती रहती थीं और इसीलिये नगर के चारों और एक दीवार बनाई गई थी ।  इसके अवशेष हमने भी देखे । शिप से हम बस में बैठ कर सिटी सेंटर आये । वहाँ से फिर हमारी गाइड और लोगों को लेकर घूमी और हम लोगों ने उसे कहा कि हम अपने तरीके से घूम कर आपको वापिस इसी जगह मिलते हैं । पहले तो हमें 500 यूरो का नौट तुडवाना था तो हम में से तीन लोग गये बैंक । मै सेंट मेरी का चर्च देख आई फोटो भी खींचे । वापिस बैंक के बाहर खडी हो गई । (विडियो)646_668_2

फिर सुहास ने बाहर आकर कहा टॉयलेट जाना हो तो चलो बैंक में हो आते हैं वरना बाहर तो हरेक के 40-50 सेंट देने पडेंगे । तब हमे पता चला कि बटन दबाने के बाद ही बैंक का दरवाजा खुलेगा । अंदर जाकर हम ने ऐसे पोझ किया कि जैसे बैंक में हमे कोई काम है और टॉयलेट तक चलते चले गये । अपना काम किया और बाहर चले आये ।  वहाँ के स्क्वेअर में कुछ प्यारे प्यारे बच्चे खेल रहे थे आप भी देखें । वहां से चलते हुए फिर हम बज़ार गये छोटी छोटी दूकाने और गलियों जैसे संकरे रास्ते पर साफ सुथरे । वहां से कार्ड और टी शर्टस खरीदे । जयश्री ने बेटियों के लिये पर्सेज़ खरीजीं । यह सब करके हम वह पुरानी दीवार देखने गये जिसे नगर की रक्षा के लिये बनाया गया था पर इसकी ऊँचाई इतनी कम लगी कि घोडा आराम से छलांग लगा कर पार कर सकता होगा ।  लेकिन दीवार का अधिकांश हिस्सा आज भी सुरक्षित है । उस जमाने में ज्यादातर नगर शायद दीवार से सुरक्षित किये जाते होंगे । दिल्ली में भी तो वॉल्ड सिटी है । (विडियो)  669-688 (1)
 
वापसी पर हमने सैंडविचेज खरीदे, जो बहुत ही अच्छे निकले, और लंच किया ।  यहां से बहुत से लोग ड्यूओमो कथीड्रल के टॉवर पर चढने गये पर हम ने तो बस का इंतजार करना ही ठीक समझा । हम जब इंतजार कर रहे थे तो यहां हमने चिक्की खरीदी काजू की और बादाम की हम खा रहे थे कि हमारे पास एक कबूतर आ बैठा उसे हमने थोडी चिक्की दी पर उसने नही खाई फिर मैने उसे तोड कर उसका चाशनी वाल भाग हटा कर बादाम के छोटे टुकडे कर के उसे दिये तो खा गया फिर जयश्री ने उसे अपने सैंडविच में से ब्रेड भी दी । उसका पेट तो खासा भर गया था पर वो हमारे आसपास ही मंडरा रहा था । तो एक छोटा सा टुकडा और फेंका वह इसे अभी चोंच में दबाये ही था कि कहीं से एक चिडिया आ गई और उस पर खूब चिल्लाई चूंचूंचूंचूं चूंचूं चूंचूंचूं -जैसे कह रही हो, “पेटू कहीं का इतना खा लिया तब भी तसल्ली न हुई, चल ला इधर” और हमारे देखते ही देखते कबूतर के मुंह से टुकडा छीन कर.. यह जा और वह जा । उस दृष्य को याद कर के आज भी खूब हंसी आती है । उस वक्त कैमेरे का बाहर हाथ में न होना अखर गया ।
इसके बाद बस में बैठे और गये पीसा जहां का तिरछा टॉवर जग प्रसिध्द है । इसके लिये हमें जाना था मिरेकल स्क्वेअर । हम पीसा के शहर में प्रवेश करने के बाद चलते हुए सीधे मिरेकल स्क्वेअर पहुँचे क्या सुंदर दृष्य था । ताजमहल देखने पर कैसे लगता है कुछ कुछ वैसी अनुभूती थी । पूरा इलाका एक दीवार से घिरा हुआ  और अंदर सफेद ग्रेनाइट ( हमारी गाइड ने यही बताया ) के एक के पास एक बने तीन अद्भुत आश्चर्य हमारे सामने उपस्थित थे । चारों तरफ खूबसूरत हराभरा लॉन । गाइड हमें इन इमारतों के इतिहास के बारे में बता रही थी । एक है केथीड्रल या ड्यूओमो । यह 1064 में बनना शुरू हुआ । युध्द और आग में झुलसने के बावजूद इसे बार बार ठीक किया गया और आज भी इसका रख रखाव बहुत ही अच्छा है ।  कथीड्रल के अंदर मेडोना की बच्चे के साथ मूर्ती है । शायद ये मेडोना ही मेरी है । इसके ठीक सामने है बाप्तिस्त्री जो सेंट जॉन बाप्टिस्ट के नाम पर है । हम अंदर तो नही गये । ड्यूओमा कथीड्रल  या चर्च हमें तो सब एक से ही लगते हैं । ड्यूओमा  के  पीछे  है पीसा का झुका हुआ टॉवर ।  कहते हैं इस टॉवर के सबसे ऊपर के बालकनी से गेलिलियो अपने टेलिस्कोप से सितारे देखा करते थे । कितना अच्छा लगता है जब हम ऐसी पुरानी इमारतों की सैर कर रहे होते हैं जहां बडे बडे दिग्गजों के कदम पडे थे । मुझे ऐसा ही अनुभव बनारस में पांडवों के कुएँ मे झांकते हुए हुआ था और तब भी जब पंढरपूर के विठ्ठल मंदिर में गई थी जहां ज्ञानेश्वर महाराज, नामदेव महाराज और एकनाथ महाराज कभी दर्शन करने आते थे । हम ने पहले तो बाहर से तीनों इमारतों को खूब गौर से देखा और तस्वीरें लीं फिर पास जाकर भी देखा । बहुत लोग पीसा के टॉवर को सहारा देकर गिरने से बचा रहे हैं ऐसी तस्वीरें खिंचवा रहे थे कोशिश तो हमने भी की पर कुछ खास जमा नही । पीसा के टॉवर पर जाने के लिये सिर्फ किसी एक समय 300 लोग ही जा सकते हैं एक साथ जिसमें एक घंटा लगता है (विडियो ) 669-688 942-1900
 
 यहाँ हमें मुंबई से केसरी टूर्स एन्ड ट्रेवल्स के साथ आये कुछ मराठी लोग मिल गये जिनके साथ हमने नोट्स एक्सचेन्ज किये । बाप्तिस्त्री के साथ ही लगा हुआ है केम्पो सान्टो यानि कबर गाह या सीमेट्री । सारी की सारी इमारतें हजार साल पुरानी फिर भी इतनी सुंदर । फिर सारे इलाके में घूम घूम कर फोटो लिये और विडियो भी । आप भी देखें । वहीं एक छोटा सा बाजार था जहां पीसा के टॉवर, चर्च आदि की  छोटी छोटी मूर्तियां मिल रही थीं तो दोनो बेटों के लिये एक एक पीसा का टॉवर खरीदा । (क्रमशः)
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