गुरुवार, 4 सितंबर 2008

अलास्का क्रूझ- ४

आराम से सोफे पर, बिस्तर पर पसर कर बैठे ही थे कि अनाउन्समेन्ट हुआ कि साढे चार बजे सेफ्टी ड्रिल के लिये जाना है । देखा कि सवा चार तो बज चुके हैं चाय की बडी तलब लग रही थी । पता चला कि टॉप डेक पर चाय नाश्ते का इंतजाम है तो पहुँच गये ये सोचकर कि चाय तो पी ही सकते हैं । और चाय पी कर वापिस रूम पर आये ड्रिल के लिये सेफ्टी जैकेट जो रूम में रखा था लिया और पहुंचे पांचवे डेक पर । यह शिप १२ मंजिला था जिसके ४ थी से लेकर १२ वीं मंजिल तक क्रूझर जा सकते थे। नीचे की तीन मंजिल स्टाफ के लिये थीं जिनमें कोई व्यू नही था, पानी के नीचे जो रहती थीं । सारे पेसेंजर्स के लिये यह ड्रिल अटेंड करना जरूरी था तो बार बार पुकार लगाई गई जब तक सारे आ नही गये और फिर बताया गया कि सेफ्टी जैकेट कैसे पहनते हैं और बोट्स कहाँ रहती हैं इमरजेन्सी में कैसे डेक ३ पर पहुंचना है वगैरा वगैरा (इसका विडियो पिछले भाग में देख सकते हैं) । हमारा सामान अब तक नही पहुँचा था तो हम रिसेप्सन पर जाकर जो कि डेक ५ पर था रिपोर्ट कर आये पर मेनेजर ने कहा कि चिंता की कोई बात नही है आपका सामान पहुंच जायेगा। फिर भी ऊपर आकर हमने रूम अटेंडंट से पता लगाने को बोला और उस ने सामान आखिर लाकर दे ही दिया .

वहाँ से आये तो पता चला हमारा डिनर टाइम हमारे अपग्रेडेशन के साथ ही अपग्रेड हो गया है यानि ८ बजे के स्थान पर ६ बजे । इतने जल्दी खाने की हम देसी लोगों को आदत तो नही थी पर करते क्या सुंदर कमरे के साथ हमारे खाने का टाइम भी अपग्रेड हो गया था ।
इतने में ही शिप चलने लगा इसी लिये हम सब बालकनी में आकर खडे हो गये । हमारे कमरे साथ साथ और बालकनी दोनों कमरों की साथ साथ ही थी । समंदर की लहरें शाम के रंग और धीरे धीरे आगे को बढता जहाज हम सभी इस का आनंद उठा रहे थे । तय किया कि आज तो हम जनरल डायनिंग में ही खाना खायेंगे । कल से देखते हैं फॉर्मल डायनिंग का शो । और हम सारे थोडी देर लेट गये फिर आराम से साढे सात बजे तैयार हुए और खाना खाने पहुंच गये । और क्या खाना था,(देखें विडियो )

इटालियन पास्ता, सलाद, सूप तथा पिज्जा । खाया पीया और रूम पर वापिस आये तो हमारा रूम अटेंडेंट हमारी राह देख रहा था बोला , “अरे आप फॉर्मल डाइनिंग में नही गये आपके टेबल पर कोई नही था और वहां का वेटर भी गोवा का है आप लोगों के न जाने से उसकी बडी निराशा हुई । वह तो आपकी उत्सुकता से राह देख रहा था” । तो उसे, कल अवश्य जायेंगे बोल कर रूम मे आ गये और जिसको किताब पढनी थी वो किताब पढने मे लग गया जिसे टी वी देखना था उसने टी वी देखा और सो गये । अगले दिन सारा दिन ट्रेवल ही करना था ।
हम में से सुहास ,सुरेश और प्रकाश जल्दी उठने वालों में से थे तो उनका सुबह जल्दी उठ कर सनराइज़ यानि सूर्योदय देखने का प्रोग्राम बन गया मै, जयश्री और विजय ठहरे सूर्यवंशी तो हमने तो ७ बजे तक सोने का तय कर लिया था । चाय–कॉफी तो सबसे ऊपर यानि १२ वे डेक पर रात १० बजे तक और सुबह फिर ६ बजेसे मिलने लगती । तो जब मेरी आंख खुली साढे ६ बजे तो जयश्री तैयार थी मै उठी तो उसने पूछा ,चलें ऊपर, सब लोग तो चले गये । हाँ बस ५ मिनिट कह कर मैं भी बाथरूम मे जाकर जल्दी जल्दी तैयार होकर आ गई ।

हम दोनों डेक पर जाने के बजाय सीधे रेस्तराँ मे गये और एक एक कप चाय पी । डेक पर आये तो ये तीनों अपने केमरे वैमरे सहित वापस रूम में जा रहे थे । हम दोनों ने डेक पर कम से कम ६ चक्क्रर लगाये । नीचे आये तो रूम में आज के कार्यक्रम का फ्लायर पडा था यह प्रोग्राम जरूर देखना है मैने फ्लायर देख कर कहा । रात को ८ बजे डांस प्रोग्राम था ।
वैसे दिनभर लेक्चर , योगा, जिम, स्विमिंग, हाउसी, वॉल क्लाइंबिंग जैसे कई कई कार्यक्रम थे जयश्री का और मेरा बडा मन था तंबोला खेलने का पर वह तो १० बजे से था और शुरू हो चुका था । पर हम सब मिलकर यानि दोनों कमरों की जनता, पहले नाश्ते के लिये गये जहाँ अमेरिकन और एशियन और यूरोपियन नाश्ता हमारा इन्तजार कर रहा था । नाश्ता किया और पूरा शिप देखने चले गये ।
सारे डेक घूम घूम कर देख लिये । असल डेक थे ५,६,७,११,और १२ कहीं केप्टन साहब का स्पेशल क्लब था तो कहीं शापिंग और कहीं कसीनो और ७ वे पर था फॉर्मल डाइनिंग हॉल
और थिएटर ,११ वी पर ही हमारे कमरे थे और एक्झीबीशन। बाकी डेक्स पर रहने के कमरे थे या स्वीटस थे । १२ वे पर जनरल डाइनिंग था एक तरफ एशियन ओर दूसरी तरफ अमेरिकन और युरोपियन बाहर की तरफ स्विमिंग पूल थे, चलने का ट्रेक था और और ऊपर जाने की सीढी यानि १३ वे डेक पर जहां सिवा डेक के और कुछ भी नही था । पर वहाँ से व्यू एकदम साफ था ।
फिर लंच करने गये सच मानिये सजे हुए खाद्य पदार्थों को देख कर भूख भी खूब लगती थी
और मैने तो तय कर लिया था वजन बढने की बिलकुल परवाह न करते हुए खाना भी खूब एन्जॉय करना है । उस दिन हमने एशियन लंच किया खूब बढिया स्टर फ्राय था जिसे बनाने वाले थे एक बंगाली बाबू । पर क्या स्टर फ्राय बनाते थे । मसाले, लोग देख कर और हां पूछ कर भी , डालते थे । इसके अलावा सूप सेलेड और, और भी बहुत सी चीजें थीं । मांसाहारियों की तो खासी मौज थी पर हमारे लिये भी बहुत वेरायटी थी । एक दो इंडियन चीजें भी होती ही थीं ।
खाना वाना खाकर थोडी देर रूम में आकर सारे पसर गये ।
आज फॉर्मल डिनर के लिये जाना था ६ बजे तो सारे लोग तैयार हुए अपने अपने बेस्ट अटायर में । रात को ८ बजे फिर डांस प्रोग्राम भी देखने जाना था । तो ठीक ६ बजे पहूंच गये । हमारा वेटर जो गोवा का था तेजी से हमारे पास आया और हमें अपने टेबल पर ले गया टेबल ८ लोगों का था । हमारे साथ एक गोरा कपल भी था । उस दिन तो उन लोगों ने बडे प्यार मोहब्बत से बातें की पर अगले ही दिन से उनहोने अपनी टेबल बदल ली ओर हमने भी चैन की सांस ली । हमारी प्रायवेसी जो वापिस बहाल हो गई थी । उस दिन तो हमारा डिनर मेनू फ्रेंच था और छोटे छोटे पोर्शन बडे नजाकत और नफासत से पेश किये गये। पांच कोर्स डिनर था । परोसने और खाने में पूरे पौने दो घंटे लग गये । फिर वहां से फारिग हुए तो पहुँच गये डांस देखने और खूब मजा आया ।
लौट कर जिसने जो करना था किया पर पहले शैंपेन खोली और सेलिब्रेट किया । अगले दिन हमें देखना था केचिकन ।
(क्रमश:)
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