रविवार, 16 दिसंबर 2007

याद

आती है याद तुम्हारी हवा के साथ
महकी खुशबू से रात रानी के
फिर तो मन भी खिला खिला रहता
बे वजह रात आसमानी से

जब भी सुन लूँ पुराना गीत कोई
तुम जहन में ही उतर आते हो
और कैसे वहाँ से चोरी से
दिल के आईने में बस जाते हो

क्या तुम्हें भी मै याद आती हूँ
जब भी सुनते हो नया गीत कोई
या कि फिर किताब में छूटा
देखते हो दबा सा फूल कोई

हो गये दिन बहुत, न तरसाओ
बस मेरे पास लौटकर आओ
मेरी साँसों को फिर से महकाओ
मेरे जीवन में रंग ले आओ


आज का विचार

जो पक्षी बादलों में घोंसला बनाना चाहता है
वह सदैव ऊँची डालियों पर ही विचरण करता है ।

स्वास्थ्य सुझाव

गॅस और एसिडिटि के लिये
१ चम्मच जीरा पाउडर
१ चम्मच धनिया पाउडर
एक चौथाई चम्मच अजवायन पाउडर
१ गिलास गुनगुने पानी मे डाल कर हिलायें
और धीरे धीरे पीयें ।
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