रविवार, 16 सितंबर 2007

बीत गया सावन




बीत गया सावन, साजन फिर भी नही आये
मेरे इस उदास मन को अब कुछ भी ना भाये

ना चूडी ना बिंदिया पायल ना कजरा ना गजरा
ना सतरंगी सोन चुनरिया ना जयपुर का घगरा
इन सब चीजों के माने क्या जब कोई देखन ना आये ।

सूना सूना घर ना सोहे बाकी सब के रहते
जिनसे मेरी लगन लगी है वे क्यूं यहाँ न रहते
किसके लिये सजाऊँ काया जब कोई देखन ना आये ।

सूखे केश आँख में पानी, दुनिया जैसे हुई वीरानी
कडवी लगे सखियों की बानी, बिन राजा मै कैसी रानी
ना भाये अब मेले ठेले जब मेरे साजन ना आये ।



आज का विचार

समय एक परि-कल्पना है । तुम्हारा समय आज है और अभी।



आज का स्वास्थ्य सुझाव
थकान अनुभव करने पर हल्का व्यायाम करें । रक्त संचालन सुधरने से जाती रहेगी ।
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