
मौज और मस्ती
तब जो थी सस्ती
जोशे जवानी
सारी मनमानी
होटल सिनेमा
लंच डिनर खाना
प्यारी प्यारी बीवी
नया नया टीवी
जब जो चाहा
वो ही तो पाया
इससे ही पनपा
प्यार जो इनका
गुल खिला प्यारा
मुन्ना हमारा
तब से है हाथ में
और है साथ में
दूदू की बोतल
और पेसीफायर
बैग में डाय़पर
और थोडे वायपर
थोडे से बिब
और दो चार पोंछे
कहाँ गये मस्ती के
दिन हम यूँ सोचें
नींद गई रातकी
चैन दिन का गया
यार इनका तो
हाल बुरा हो गया
कहाँ थे ये
और पहुँचे कहाँपर
छोडो जी इन्हें
इनके ही हाल पर
आज का विचार
यत्न, यत्न, यत्न.........यश ।
स्वास्थ्य सुझाव
खाना ... दिन में भरपेट रातमें आधा पेट।