रविवार, 28 अक्तूबर 2012

चांदनी का दरिया




ये जगमगाता चांदनी का दरिया
और उसमें दमकता सा तुम्हारा चेहेरा
ये अनोखी सी मदभरी ठंडक
अपनी नजदीकियों की ये गरमाहट ।

ये शरद की लुभावनी सी ऋतु
ये फिज़ा भी महकती महकाती
ये चारों और बिखरी सुंदरता
चांदनी में कुछ और ही चमचमाती  ।

जुबाँ खामोश, आँख बात करती सी
उंगलियां हाथों में थरथरातीं सी
ये हलकी सी होंटों की जुंबिश
जुल्फों की छांव घने बादल सी ।

ये प्यारे पल हमारे प्रेम-पगे
इनको हमेशा जहन में रख्खेंगे
फिर चाहे आये अंधेरी अमावस कोई
रोशनी से उसको भी नहला देंगे ।



20 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

चाँदनी में नहायी रात,
सपनों में सकुचायी रात,
निहार लो, विहार लो,
अपनों में समायी रात।

रविकर ने कहा…

चेहरा खुश्बू चांदनी, चली दिखाती राह ।

प्रेरित कर मौजूदगी, दे अदम्य उत्साह ।

दे अदम्य उत्साह, लगे उंगली है पकड़ी ।

जगी अनोखी चाह, प्रेम में जकड़ी जकड़ी ।

डूब गया अब चाँद, अमावस में है पहरा ।

चलूँ अनवरत श्याम, देख के तेरा चेहरा ।।

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना है ..बढ़िया

सदा ने कहा…

वाह ... बेहतरीन

Dr.NISHA MAHARANA ने कहा…

ये प्यारे पल हमारे प्रेम-पगे
इनको हमेशा जहन में रख्खेंगे
फिर चाहे आये अंधेरी अमावस कोई
रोशनी से उसको भी नहला देंगे ।bahut acchi...prastuti....

रविकर ने कहा…

उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

रश्मि प्रभा... ने कहा…

ये प्यारे पल हमारे प्रेम-पगे
इनको हमेशा जहन में रख्खेंगे
फिर चाहे आये अंधेरी अमावस कोई
रोशनी से उसको भी नहला देंगे ... इससे अच्छी जगमगाहट और क्या होगी

dheerendra bhadauriya ने कहा…

जुबाँ खामोश, आँख बात करती सी
उंगलियां हाथों में थरथरातीं सी
ये हलकी सी होंटों की जुंबिश
जुल्फों की छांव घने बादल सी,,,,

बहुत ही बढ़िया रचना लगी मुझे,,,,बधाई,,,

RECENT POST LINK...: खता,,,

भारतीय नागरिक - Indian Citizen ने कहा…

ये तो वाकई शानदार है.

Vaanbhatt ने कहा…

जिनके दिल-जज्बात रौशन हैं...उन्हें अमावस की परवाह भला क्यों होने लगी...

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

चाँदनी के दरिया में
बहा दिया हर अंधेरा
बस याद रहा वो लम्हा
जो था बस तेरा - मेरा ।

बहुत खूबसूरत रचना

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

ये शरद की लुभावनी सी ऋतु
ये फिज़ा भी महकती महकाती
ये चारों और बिखरी सुंदरता
चांदनी में कुछ और ही चमचमाती ।

मनमोहक शब्दिक चित्रण ......

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

चाँदनी का ज्वार !
कवि-मन बहा रहा है
उद्दाम मन की कामना ,
ले भाव वेग अपार !

Suman ने कहा…

ये प्यारे पल हमारे प्रेम-पगे
इनको हमेशा जहन में रख्खेंगे
फिर चाहे आये अंधेरी अमावस कोई
रोशनी से उसको भी नहला देंगे ।
खूबसूरत....

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत सुंदर ..

आशा जोगळेकर ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
Kumar Radharaman ने कहा…

सुंदर। अच्छी कविता है।

mahendra verma ने कहा…

ये प्यारे पल हमारे प्रेम-पगे
इनको हमेशा जहन में रख्खेंगे
फिर चाहे आये अंधेरी अमावस कोई
रोशनी से उसको भी नहला देंगे ।

अमावस को रोशनी से नहलाने की कल्पना अनूठी और प्रेरणादायी है।

expression ने कहा…

सुन्दर....
बहुत सुन्दर रचना...

सादर
अनु

mehhekk ने कहा…

bahut sunder pyari abhivyakti.