गुरुवार, 1 सितंबर 2011

हे गणराय कुछ हमारी भी सुनो



आज आये हो तो अब रहोगे ना दस दिन
और सुनोंगे ना भक्तों की फरियाद,
तुम्हें तो रहता ही नही कुछ याद ।

कितने वर्षों से पूज रहे हैं तुम्हें
कि कुछ तो हमारी भी सुनी जाये
पर कुछ सुनवाई ही नही हो रही
लगता है भारत सरकार पे कुछ
ज्यादा ही मेहरबानी है तुम्हारी ।

इतने बडे कानों में हमारा रुदन
नही जा रहा कितनी अजीब है बात ?
पेट में डाले जा रहे हो
सरकार के तो सारे अपराध
और हमसे आँखें चुरा रहे हो ।

मत करो ना ऐसा,
तनिक हमारी और भी ये स्नेह
की सूंड बढाओ और करो स्नेह सिंचन
ता कि बोल उठे हमारा भी मन,
गणपति बाप्पा मोरया
मंगल मूर्ती मोरया ।


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