मंगलवार, 28 जून 2011

चलते रहिये चलते रहिये 3-विक्टोरिया फॉल्स


कमरे में आकर नहाया और निकल पडे विक्टोरिया प्रपात देखने, इसका अफ्रीकी नाम है मोसी ओआ तून्या इसका अर्थ है धुआं जो गरजे । सबसे पहले तो वह बस ली जो होटल से हर आधे पौने घंटे पर चलती है । कोई दस मिनिट में पहुँच गये स्मोक दैट थंडर्स के गेट पर । बाहरसे कुछ भी दिखाई नही देता । वहां काफी दूकानें थी जहां चित्र, मूर्तियाँ, रेनकोट आदि मिल रहे थे तो रेन कोट किराये पर लिये और अंदर आये । (विडियो)1

30-30 $ टिकिट लिया । प्रपात में गिरने से पहले झाँबेझी नदी काफी चौडी हो जाती है पर ज्यादा गहरी नही है । इसमें काफी उप-नदियां आकर मिली हैं । प्रपात से पहले दो नदियां मिलती हैं इसमें लुआम्पा और कुआन्डो । टिकिट लेकर अंदर आये, अंदर जाकर चलते चले गये, और क्या नजारा था ! आंखें कृतार्थ हो गईं ।
व्योम से उतरे, पाताल गहन
जल का प्रचंड, अवतरण
छाया कुहरा, गहरा गहरा
अवगुंठन, न कोई दर्शन
उठीं फुहारें, बरसे सावन (विडियो)2

रिम झिम रिम झिम, बिना घन ।
हरियाला बन, मन हिरण
डोले, संग पवन, सनन सन
ऐसा सुखद, अनुभवन
मानो पा लिया, त्रिभुवन।
ये कोई कविता नही है मन के भाव हैं तो इसको अनदेखा किया जा सकता है ।
नायगारा प्रपात से दुगना गहरा और दुगने से कुछ ज्यादा लंबा है ये प्रपात । लगता है पूरी की पूरी झांबेझी नदी कूद पडी हो खाई में और ऐसा ही है । बीच बीच में जमीन के उठान है जो इसको गरमी में बहुत सी धाराओं में विभाजित कर देते हैं । पर हम गये तब इसमें 95 प्रतिशत पानी था तब भी इसे सात भागों में बांटा गया है सबसे पहला है डेविल्स कैटरेक्ट । मुख्य प्रपात सबसे लंबा है इसे मेन फाल्स कहते हैं । पानी इतने जोरों से इतने गहराई में गिरता है कि उससे होने वाली बौछार उँचे जाकर बारिश की तरह गिरती है । इसी की वजह से यहां रेन फॉरेस्ट बना हुआ है ।
यहां किस्म किस्म के पाम वृक्ष टीक, एबोनी, महोगनी आदि वृक्ष भी हैं और है लोह वृक्ष (आयरन वुड) । य़ह दुनिया के सात प्राकृतिक आश्चर्यों में गिना जाता है । इसकी खोज करने वाले पहले यूरोपियन थे डेविड लिविंगस्टन जिन्होने इस प्रपात को एक द्वीप पर से देखा जो अब लिविंगस्टन आयलेंड के नाम से जाना जाता है । लिविंगस्टन ने इसे रानी विक्टोरिया के नाम पर विक्टोरया फॉल्स नाम दिया । हालांकि यहां के लोग इसे पहले से ही जानते थे। अब आप सब प्रपात के विडियो से आनंद उठायें । (विडियो)3

बीच में मै और विजय थकान की वजह से एक बैंच पर बैठ गये । पर मै फिर से सुरेश और सुहास के साथ झांबेझी पुल देखने चली गई । यह काफी लंबा रास्ता था और बारिश हुए ही जा रही थी ।।
हम चल कर उस जगह तक गये जहां झांबेझी नदी पर पुल बना हुआ है जो झांबिया और झिंबाब्वे को जोडता है । रास्ते में एक जगह जहां रास्ता प्रपात की तरफ गया था वहां लिखा था खतरा!!!!! आगे अपने भरोसे जायें । हम भी आगे बढ गये ।
यह नदी कई खाइयाँ जिन्हें गॉर्ज कहते हैं, बनाती चलती है और प्रपात के रूप में गिरने के बाद संकरी हो जाती है पर बहती बहुत तेज है । यहां हमने एक साथ दो दो इंद्रधनुष बनते देखे ।
सुना है कि चांदनी रात को भी इस फॉल पर इंद्रधनुष बनता है हम तो देख नही पाये । खूब घुमाई हो गई थी भीग भी गये रेनकोट होते हुए पर चलते चलते सूख भी गये । बहुत मजा आया वापिस आये एक डीवीडी खरीदी फॉल्स की। वहां कुछ नर्तक नाच रहे तथे । हमारी बस अभी आनी थी तो वह नाच देखा और उसकी भी डीवीडी खरीदी । सुहास ने एक हाथी खरीदा । मेने एक हिप्पो । सचमुच का नही शो पीस । (विडियो) 4

बस तब तक आ ही गई । बस में बैठे और लंच करने उसी जगह गये जहां से वॉटर होल दिखता था । तब बहुत से पंछी दिखे चीलें, गिध्द, हॉक वगैरा (क्यूंकि होटल के लोग इन्हे मीट खिलाते हैं )। बंदर भी आ गये । तीन चार मगर भी देखे जो सुस्त से पडे हुए थे धूप सेंक रहे थे और शिकार की ताक में थे । एक जंगली सूअर भी देखा । हिरन तो थे ही । जकाना पक्षी भी थे । मगर के आस पास कोई भी नही फटक रहा था
खाना खा कर थोडा लेटे । साढे चार बजे बोट क्रूज़ के लिये जाना था । साढे तीन बजे उठे तैयार हुए और नीचे आकर बस की वेट करने लगे । तीन चार और और बसें आईं पर हमारी नही थीं आखिर कार हमारी बस आई और हम उसमें बैठ कर चल पडे । क्रूज़ के लिये बस ने हमें जहां उतारा वहां अफ्रीकी नर्तक हमारे स्वागत में खडे थे हमारे आते ही उन्होने नृत्य करना चालू किया । नर्तकों ने हमें भी अपने साथ नाचने को बुलाया तो हम भी नाचे वहां एक ड्रम बजाने वाले का पुतला था उसके साथ फोटो खिंचवाया । फिर चढे बोट में । हमारा जोरदार स्वागत हुआ । रेड वाइन मानो बह रही थी । साथ में थी नमकीन मूंगफली । इतने में शिप का कैप्टन आया और कहा क्षमा चाहता हूँ पर हम आगे नही जा सकेंगे । अभी तो क्रूज शुरू हो ही रही थी । हमारे सबके मुख पर प्रश्न चिन्ह टंग गये । तो उसने हंस कर कह मै देख रहा हूँ कि आप लोग वाइन पी ही नही रहे । तो पीजीये, फिर मै आगे बढता हूँ । (विडियो) Cruise1

उसके साथ जो लडकी मैनेजरियल असिस्टंट थी वह कहने लगी, “जो पीयेगा नही उसे गुलाबी हाथी नही दिखेंगे“, सारे लोग हँस पडे और हमारी बोट आगे बढी । सबसे पहले हमे दिखे हाथी, तीन थे, माँ बाप और बच्चा । झांबेझी नदी इतनी चौडी है कि देखते ही बनती है । विक्टोरिया फॉल्स से पहले इसमें दो बडी नदियां आकर मिलती हैं । इस बोट-क्रूज में हमे केरला की बैक व़ाटर सैर याद आ रही थी । पर वहां नदी इतनी चौडी नही थी । बोट आगे जा रही थी हम अब उत्सुक थे हिप्पो देखने के लिये । और अचानक शोर मचा हिप्पो हिप्पो । देखा पानी के ऊपर कुछ चट्टाने सी हिल रही थीं यह दरियाइ घोडों की पीठ थी । जैसे बोट कुछ आगे बढी उनके सिर नज़र आये । कोई पांच या छह हिप्पो थे । हमारी बोट को इनके बिलकुल पास ले जाने लगे तभी एक हिप्पो खडा हो गया उसका पूरा शरीर दिखाई दिया । ऐसे तन कर खडा था पठ्ठा कि और पास आये तो उलट दूंगा । उसके बाद देखा एक मगरमच्छ का बच्चा जो आराम से एक चट्टान पर लेटा था, इसे काफी अच्छे से देख पाये । (विडियो) Cruise2

फिर अचानक बादल घिर आये और हवा तेज चलने लगी । नैया डगमग डगमग डोलने लगी । बिजलियाँ चमकने लगी हमने कोशिश की कि इसे कैमरे में कैद करें । एक तरफ डर भी लग रहा था कि ठीक ठाक वापिस पहुंच जायें । खैर पहुंच तो गये और एकदम ठीक ठाक पहुँचे ।
वापिस जाकर डिनर खाया । बोमा रेस्तरॉँ में नही जा पाये क्यूं कि बारिश हो रही थी । सुहास बहुत मायूस थी तो मैनेजर ने पूछा क्या हुआ, क्यूं उदास हो ? सुहास ने कहा हमें बोमा रेस्तरॉं में जाना था नाच देखने ड्रम सुनने । तो बोले बस इतना ही ? नाच और ड्रम यहीं करवा देते हैं और वाकई हमने नाच भी देखा और ड्रम भी सुने पर बोमाँ मे ये कैसे होता ये सवाल तो रहा ही । यहाँ ये हमारा आखरी डिनर था, कल तो ब्रेकफास्ट के बाद हमें निकलना था । पर ब्रेकफास्ट करते हुए जानवर दिख जायें ये आस भी थी । दूसरे दिन सुबह आराम से उठे नहा धो कर तैयार हुए सामान पैक किया और नाश्ता करने गये । हमारे हमेशा के स्पॉट पर बैठे और एक बार और सफारी का आनंद उठाया । फिर कमरे में आये सामान उठाया और रिसेप्शन पर जाकर बैठ गये । हमारी टैक्सी आई और उसने हमें हवाई अड्डे छोडा । उडान समय से थी तो दो घंटे बाद वापिस जोहेन्सबर्ग और एडम के घर । गाडी में एडम ने हमे बताया कि कल हम चीता दौड देखने जायेंगे और परसों सफारी । (क्रमशः)

16 टिप्‍पणियां:

जाट देवता (संदीप पवाँर) ने कहा…

ऐसे लेख पढने में जो मजा आता है वो ब्यान नहीं किया जा सकता है

रविकर ने कहा…

व्योम से उतरे, पाताल गहन
जल का प्रगाढ, अवतरण
छाया कुहरा, गहरा गहरा
अवगुंठन, न कोई दर्शन
उठीं फुहारें, बरसे सावन

जाट -बंधू भारत भ्रमण
करा रहे और
आप अमेरिकी प्रपात |

आभार ||

ब्लॉ.ललित शर्मा ने कहा…

बढिया यात्रा चल रही है,अगर बांधवगढ की सैर करनी है तो यहां पर आएं।

शुभकामनाएं

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

विक्टोरिया प्रपात के नयनाभिराम दृश्य देख कर मन प्रसन्न हो गया...

मलीहाबादी आमों की बहार देखने के लिए पधारें -
http://amirrorofindianhistory.blogspot.com/

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

विवरण रोमांच दे गया।

Vaanbhatt ने कहा…

चरैवेति...चरैवेति...जबरदस्त झरना...लाइव कवेरेज...हम भी घूम आये...विक्टोरिया फाल्स...

kshama ने कहा…

Kho gaye ham padhte,padhte,dekhte,dekhte!

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

विक्टोरिया फाल्स के नयनाभिराम दृश्य...सुंदर

मीनाक्षी ने कहा…

आपके सफ़र में हम भी जैसे साथ होते है...फिल्माया गया विवरण तो और भी मुग्ध कर देता है..

सतीश सक्सेना ने कहा…

मज़ा आ गया ...एक बार जरूर देखने की कोशिश करूंगा ! आभार आपका !

Suman ने कहा…

खुपच सुंदर ........खुप मजा आली !

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

बड़ा आनंद आया यात्रा वृत्तान्त पढ़कर

JHAROKHA ने कहा…

aadarniy mam
aapke is yatra vivran ko bahut hi dhyan se padha aur dimag me baithati chali gai taki bachchon ko bhi itni jankariyon se avgat kara sakun.
waqai me aapne victoriya falls ka bilkul sajiv chitran kiya hai aur anekon dher saari jankariyan bhi .
aapki yah adhbhut yatra hamesha ke liye aapke jehan bas gai hogi .aur kyon na ho ham bhi to aapke saath
yani aapke blog ke saath bhar -pur aanand utha rahr hain .
aapki yatra bahut hi rochka lagi .
bahut hi sahi tareeke se aapne ek ek jagah ki vistrit jankari di.
bahut bahut hi achha laga.
hardik badhai
v sadar naman
poonam

Abhishek Ojha ने कहा…

हम्म... नयाग्रा की याद आई. पर ये ज्यादा अच्छा लग रहा है. ज्यादा प्राकृतिक.

अल्पना वर्मा ने कहा…

इतने बड़े जल प्रपात विडियो में देख कर मन ही नहीं भरा..मन कर रहा है कि वहीँ पहुँच जाऊं!
...पानी गिरने की आवाज़ ...उडती हुई भाप!
यात्रा का यह भाग भी बहुत अच्छा लगा.
आप से मालूम हुआ कि इसका नाम विक्टोरिया कैसे पड़ा.
आप के लिखे विवरण को पढ़कर ऐसा लगता है जैसे साथ साथ मैं भी सैर कर रही हूँ .
अगली यात्रा में चिता दौड देखेंगे.
नियाग्रा फ़ाल्स की याद आ गयी.

निर्मला कपिला ने कहा…

आपकी पोस्ट पढ कर और कहीँ कुछ पढने का मन नही होता इस आनन्द मे ही डूबे रहने का मन होता है और मै इमैजिन करती हूँ कि कहीं आपके आस पास ही हूँ। बहुत अच्छे वीडिओ और वृताँत। धन्यवाद।