रविवार, 12 सितंबर 2010

बारिश

कभी तो ये आंगन छिडकती है बारिश
कभी पेड-पौधे धुलाती है बारिश ।
कभी तो झमाझम बरसती है बारिश
और मोर छमाछम नचाती है बारिश ।
बादल के ढोलक बजाती है बारिश
कभी बिजली में नाचती है ये बारिश ।
पवन में कभी सनसनाती है बारिश
कभी घोर गर्जन सुनाती है बारिश ।
कहीं आँसुओं को छुपाती है बारिश
तो चेहरे पे खुशियाँ खिलाती है बारिश ।
घटा में कभी घिर के आती है बारिश
कभी धूप मे मुस्कुराती है बारिश ।
कहीं नन्हे मुन्ने रुदन में है बारिश
बाढ आये तो सबके सदन में है बारिश ।
रास्तों बाजारों में पानी है बारिश
इन्सां की मुश्किल बढाती, ये बारिश ।
कभी आंधियों सी उखडती, ये बारिश
गाँवों, घरों को उजडती ये बारिश ।
कभी खेत में लहलहाती है बारिश
कभी दूर प्रीतम सी रहती है बारिश ।
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