मंगलवार, 10 नवंबर 2009

कैसा ये मौसम


कैसा ये मौसम, प्यारा सा मौसम
बरफ की सफेद चादर चांदनी सी
ठंडी हवाएँ और आग गुनगुनी सी
ये साथ अपना और मन में रागिनी सी
सर्दियां है कितनी कितनी प्यारी सी । कैसा ये मौसम.......

दिन की नरम नरम धूप बावली सी
पल भर में हो जाती शाम सांवली सी
कंपकंपा जाती है देह सलोनी सी
ऐसे में कांगडी गर्म सुहानी सी । कैसा ये मौसम....

मिट्टी के प्याली में चाय सौंधी सी
आंच से तपते चेहरों पे ऱौशनी सी
चूल्हे में मक्के की रोटी फूलती सी
मन प्राणों में एक आग सुलगती सी । कैसा ये मौसम....

थोडा सुकून और थोडी शांती सी
सीमा पार से घुसपैठ थमती सी
बम और गोलियों में होती कमती सी
जिंदगी भी लगती थोडी थमती सी । कैसा ये मोसम.......
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