बुधवार, 30 अप्रैल 2008

जाने कैसे आये ये दिन

जाने कैसे आये ये दिन
सूने सूने मेरी गली से
वर्षा की सफेद बदली से
मेरी आंखों के पुतली से
नि:स्तब्ध और भाव विहीन। जाने कैसे....

गरमी के तपते मरुथल से
झरना जैसे बिन कल कल के
नैना जैसे बिन काजल के
लेखनी मेरी, से रस हीन । जाने कैसे....

लंबी तपती दोपहरी से
किसी बिरहन की विभावरी से
खाली खाली गाँव गली से
तरु शाखाएँ पर्ण विहीन । जाने कैसे....

ना इच्छा ना कोई आशा
ना ही मन में कोई निराशा
शब्द न सूझें, कैसी भाषा ?
जल ही नही तब कैसे मीन । जाने कैसे....

आज का विचार
बोलने से पहले हम सोचें कि क्या, कब, और कहाँ
बोल रहे हैं ।

स्वास्थ्य सुझाव
केल्शियम और विटामिन सी के रोज सेवन से
रक्त में शकर्रा की मात्रा कम रखने में मदद मिलती है ।
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