गुरुवार, 8 मई 2008

हम क्या कर रहे हैं


हम क्या कर रहे हैं
कहाँ जा रहे हैं
एक पल को रुक कर सोचें जरा
क्या पाने की ललक में हम क्या खो रहे हैं।
वर्तमान के क्षणिक सुख की खातिर
अपना भविष्य खोते जा रहे हैं






इन नन्हे से फूलों को प्रकाश दो
छाया दो
वर्षा का पानी दो ममता की माया दो
इस जानलेवा तेज धूप में वे कुम्हला रहे हैं ।

इतना न डालें दबाव उनके मन पर
कि दाब से कोई विस्फोट हो जाये
हम संभाल सकें इससे पहले
दिल पर भीषण चोट हो जाये
अपने से खिलने दो, दो सारी सुविधाएँ
न दो अपने सपनों का भार
जो वे ढोते जा रहे हैं



ये किशोर ये युवा भविष्य हैं, हमारा ही नही
देश का भी
ये जागीर नही है हमारी, धरोहर है
मालिक नहीं हैं हम, पालक हैं
ध्यान रखें, कोमलता जतन करें
आकांक्षा का क्षितिज दे
पर चुनाव का हक भी दें
इन्हें न लगे कि वे जीने का हक ही
खोते जा रहे है ।

आज का विचार
सफलता का सबसे बडा मंत्र यह है कि
हम जो भी कार्य करना चाहते हैं अभी करें।

स्दास्थ्य सुझाव

आंखों की रोशनी सुधारने के लिये तुलसी के पत्ते चबाना लाभकारी है ।
छह पत्तो से शुरू करें और रोज एक एक बढाते हुए इक्कीस तक जायें
और वापिस एक एक कम करते हुए छह तक आयें ।
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